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सऊदी अरब ने पाकिस्तान को दुविधा में डाल दिया है

पाकिस्तानी नेताओं की हरकतों और राजनीतिक कारणों ने सऊदी के साथ रिश्तों को और कमज़ोर कर दिया है, और अब इज़रायल को मान्यता देकर सऊदी ने पाकिस्तान के सामने बड़ी दुविधा खड़ी कर दी है। 

बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 4 years ago

नई दिल्ली/DineshK: सऊदी अरब ने इज़रायल के लिए अपना एयर स्पेस खोलने का ऐतिहासिक ऐलान कर दिया है। 14 जुलाई की देर रात को सऊदी अरब की तरफ से इस ऐलान का डॉक्यूमेंट रिलीज़ किया गया। इस ऐलान के बाद अब इज़रायल के प्लेन सऊदी अरब के आसमान से होकर गु़ज़र सकेंगे। 2020 में फिलिस्तीनी क्षेत्र को इज़रायल और सऊदी अरब के बीच हुए समझौते के बाद दोनों देशों करीब आ रहे थे, और अब एयरस्पेस खोलने के ऐलान ने इन रिश्तों को और मज़बूत कर दिया है। 

पाकिस्तान के सामने बड़ी मुश्किल 

जिस फिलिस्तीन को लेकर सऊदी अरब और इज़रायल समझौता कर चुके हैं उसी फिलिस्तीन का नाम लेकर पाकिस्तान इज़रायल से दूरियां बनाए बैठा है। सऊदी के अलावा बहरीन और ओमान जैसे देश भी इज़रायल को मान्यता देकर आर्थिक फायदा उठा रहे हैं। पाकिस्तान के हुक्मरान इसे देख तो रहे हैं लेकिन कोई पहल करने का जोखिम उठाना नहीं चाहता। इस झिझक की वजह हैं पाकिस्तान के कट्टरपंथी। हालांकि पाकिस्तानी सेना में ये हलचल है कि इज़रायल से रिश्तों का सिलसिला शुरू किया जाए। पिछले दिनो एक रिटायर्ड पाकिस्तानी आर्मी जनरल ने कहा था कि दुनिया बदल रही है और हम इज़रायल के साथ मजहब के आधार पर दुश्मनी नहीं रख सकते। पाकिस्तानी आर्मी के जनरल ने ये बयान यूं ही नहीं दिया। पाकिस्तान के हर टीवी शो में जाने वाले आर्मी की जनरल की दिशा वहां के डीजी-ISPR तय करते हैं। इसलिये ये साफ है कि इज़रायल की अरब देशों से बढ़ती नज़दीकियों ने पाकिस्तान को बेचैन कर दिया है। पाकिस्तान की बेचैनी इस बात से ज्यादा बढ़ गई है कि भारत के रिश्ते इज़रायल के साथ तो अपनी जड़े मज़बूत कर ही रहे हैं सऊदी अरब भी बहुत करीब आ गया है। 

भारत के साथ इज़रायल के रिश्ते भी मजबूत

1992 में जब भारत और इजरायल के बीच राजनयिक संबध स्थापित हुए थे तब दोनों देशों के बीच 1500 करोड़ रुपये का कारोबार होता था, जबकि अप्रैल 2021 से जनवरी 2022 तक ही दोनों देशों के बीच 50700 करोड़ रुपये का कारोबार हो चुका है। इस कारोबार में डिफेंस डील शामिल नहीं है। 2015 के बाद से भारत अपने रक्षा खरीद का 13 फीसदी से ज्यादा सामान इज़रायल से खरीद रहा है। इसके साथ साथ भारतीय कंपनियां इज़रायल में 990 करोड़ रुपये का निवेश भी कर चुकी हैं। 

अमेरिका, चीन और यूएई के बाद सऊदी अरब हमारा चौथा सबसे बड़ा बिजनेस पार्टनर है। हमारा 18 फीसदी कच्चा तेल सऊदी से आता है तो अब भारत अपने कुल निर्यात का 2 फीसदी हिस्सा केवल इस अरब देश को भेजता है। रिश्ते न केवल कारोबारी तौर पर नए आयाम ले रहे हैं बल्कि सामरिक रूप में भी नई उड़ान भर रहे हैं। यही पाकिस्तान की परेशानी है।

सऊदी और पाकिस्तीन के रिश्ते कमजोर हुए

पाकिस्तान और सऊदी के कारोबारी रिश्ते तो पुराने हैं लेकिन नए ज़माने में उनकी गर्माहट लगातार कम होती जा रही है। पाकिस्तानी नेताओं की हरकतों और राजनीतिक कारणों ने इन रिश्तों को और कमज़ोर कर दिया है, और अब इज़रायल को मान्यता देकर सऊदी ने पाकिस्तान के सामने बड़ी दुविधा खड़ी कर दी है। 

कट्टरपंथियों की हाथ में पाकिस्तान

पाकिस्तान में कट्टरपंथियों के आगे सरकार का झुकना कोई नई बात नहीं है। पिछले दिनों इज़रायल दौरे पर गए पाकिस्तानी नागरिकों को के एक डेलीगेशन के सदस्यों को घर वापसी पर हिंसक प्रदर्शन झेलने पड़े। डेलीगेशन के एक सदस्य को तो पाकिस्तान के सरकारी टीवी की नौकरी से तक निकाल दिया गया। कट्टरपंथियों ने जो माहौल बनाया है उसमें सेना भी खुलकर बोलने की हिम्मत नहीं कर पा रही है। एक तरफ कट्टरपंथियों की जमात पाकिस्तान को नई दुनिया में दाखिल नहीं हो दे रही, तो दूसरी तरफ सऊदी अरब के नए ऐलान ने इजरायल के लिये अपना एयरस्पेस खोलकर नए रिश्तों का ऐलान कर दिया है। भारत हर तरफ से फायदे में है, पाकिस्तान के लिये यही सबसे बड़ी दुविधा है।
 


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