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डॉलर के मुकाबले और कितना गिरेगा रुपया, बाकी करेंसी का हाल भी समझिए

जुलाई 2022 में डॉलर करीब करीब सभी बड़ी ग्लोबल करेंसीज पर भारी पड़ा. DXY इंडेक्स जुलाई में अबतक 3.7% तक बढ़ चुका है

बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 4 years ago

नई दिल्ली: पूरी दुनिया इस समय महंगाई और ग्लोबल सुस्ती से जूझ रही है. दुनिया भर की करेंसी कमजोर हो रही है और डॉलर मजबूत हो रहा है. भविष्य में डॉलर के मुकाबले दुनिया भर की करेंसीज में क्या होगा, Bank Of Baroda ने अपना करेंसी आउटलुक दिया है. जिसकी कुछ खास बातें हम आपको बताने जा रहे हैं. 
 

अभी और गिरावट आएगी 
अर्थशास्त्री अदिति गुप्ता
की इस रिपोर्ट के मुताबिक 'डॉलर के मुकाबले दुनियाभर की करेंसीज में जो गिरावट आई है, वो अमेरिका की महंगाई रिपोर्ट के अनुमानों से कहीं ज्यादा है, जिसने डॉलर को और मजबूत किया है. महंगाई की रिपोर्ट और ग्लोबल मंदी के साथ डॉलर की बढ़ती मजबूती के बाद ये संभावना जताई जा रही है कि फेड अगले हफ्त अपनी पॉलिसी दरों में 100bps की बढ़ोतरी कर सकता है. 

इससे यूरो खासतौर पर बहुत ज्यादा प्रभावित हुआ है, जो 20 साल में पहली बार डॉलर के बराबरी के स्तर से नीचे फिसल गया. रुपया भी इससे अछूता नहीं है. पिछले सत्र में रुपया डॉलर के मुकाबले 79.88/$ के रिकॉर्ड निचले स्तर तक फिसल गया, जो 80 डॉलर से बस कुछ कदम ही दूर है. प्रतिकूल वैश्विक माहौल और बाहरी मार्चे पर बढ़ती चिंताओं से आगे चलकर रुपये असर पड़ने की संभावना है. हमारा अनुमान है कि छोटी अवधि में रुपये पर दबाव अभी जारी रहेगा और अगले पखवाड़े में रुपया 79.75-80.15/$ के बीच ट्रेड करता हुआ दिखेगा, फेड पॉलिसी आने के बाद तस्वीर और ज्यादा साफ होगी. 

करेंसीज का प्रदर्शन कैसा रहा 
रिपोर्ट के मुताबिक जुलाई 2022 में डॉलर करीब करीब सभी बड़ी ग्लोबल करेंसीज पर भारी पड़ा.  DXY इंडेक्स जुलाई में अबतक 3.7% तक बढ़ चुका है (CYTD22 में 13.5%), क्योंकि अनुमान से ज्यादा महंगाई ने इन संभावनाओं को और ज्यादा मजबूत कर दिया है  कि फेड महंगाई को काबू करने के लिए कुछ कदम उठा सकता है. अमेरिका की रिटेल महंगाई दर-CPI जून 2022 में 9.1% रही है जो कि 41 साल का उच्चतम स्तर है, जबकि अनुमान 8.8% का था. नतीजतन, एनालिस्ट्स को लगता है कि पिछले महीने की बैठक में 75bps की बढ़ोतरी के बाद इस महीने फेड ब्याज दरों में ऐतिहासिक100bps की बढ़ोतरी कर सकता है. फेड के अधिकारी इस बात का इशारा कर चुके है कि बीते दिनों की महंगाई प्राथमिकता रहेगी क्योंकि फेड चेयरमैन ने बढ़ती महंगाई को काबू करने के लिए बिना शर्त कोई भी सहारा देने का वादा किया है. डॉलर को तेजी से निराशावादी वैश्विक दृष्टिकोण से भी समर्थन मिला है क्योंकि ऊंची दरों के विकास पर असर पड़ने की संभावना है. इसके अलावा, यूरोजोन में ऊर्जा संकट और चीन में कोविड -19 के बढ़ते मामले भी वैश्विक विकास की स्टोरी पर भारी पड़ रहा है.

डॉलर की तेजी का खामियाजा यूरो को भुगतना पड़ा है और ये इस महीने अबतक 4.4% तक टूट चुका है साथ ही 20 साल में पहली बार डॉलर की बराबरी के स्तर से भी नीचे फिसल चुका है. यूरोजोन पर रूस-यूक्रेन जंग और इसके बाद रूस की ओर से गैस सप्लाई में कटौती का बहुत बुरा असर हुआ है. इसके अलावा, ऊंची महंगाई दर, डॉलर की मजबूती और दरों को बढ़ाने के लिए ईसीबी की हिचकिचाहट ने भी यूरो में गिरावट को और बढ़ाया है. CYTD22 में यूरो 11.9 परसेंट तक टूट चुका है. UK में, जब BoE ने दिसंबर’21 में दरें बढ़ाने का सिलसिला शुरू किया, महंगाई का बढ़ना जारी है, जो सेंट्रल बैंक को अगस्त’22 में रिकॉर्ड 50bps तक पॉलिसी रेट में इजाफा करने के लिए प्रोत्साहित कर सकता है. उभरते बाजार की करेसींज ने अपने विकसित समकक्षों की तुलना में बेहतर प्रदर्शन किया है और केवल 1.2% की गिरावट आई है. INR ने MSCI EM इंडेक्स से 1.1% बेहतर प्रदर्शन किया है. 

रुपये का प्रदर्शन 
पिछले कारोबारी सत्र में रुपया 79.88/$ के रिकॉर्ड-निचले स्तर तक पहुंच गया था. जनवरी 22 के बाद से रुपया ने 19 बार एक नया रिकॉर्ड निचला स्तर छुआ है. अप्रैल’20 में पिछला निचला स्तर 76.84/$ था, जो कोविड-19 संकट के चरम के दौरान था. वर्तमान में देखा गया रुपये में तेजी से गिरावट काफी हद तक प्रतिकूल वैश्विक कारकों, विशेष रूप से मजबूत डॉलर और FPI के अपना पैसा निकालने की वजह से है. इसके अलावा दो सालों तक भारत की बाहरी स्थिति मजबूत रहने के बाद  कोविड-19 महामारी ने स्थिति में थोड़ी कमजोरी आई. व्यापार घाटा रिकॉर्ड स्तर पर है और इसने लगातार FPI के पैसे निकालने के साथ भुगतान संतुलन पर दबाव डाला है जो रुपये पर भी दबाव डाल रहा है.  

रुपये का आउटलुक 
रुपये ने अपने नुकसानों की भरपाई कर ली है और आज डॉलर के मुकाबले मामूली मजबूत कारोबार कर रहा है. हालांकि, बिगड़ते बाहरी परिदृश्य के साथ-साथ बढ़ती वैश्विक प्रतिकूलता का असर आगे चलकर रुपये पर पड़ेगा. बढ़ते CAD का मुकाबला करने के लिए, आरबीआई ने कर्ज प्रवाह और ECBs पर ध्यान लगाते हुए कैपिटल अकाउंट को मजबूत करने के लिए कई उपायों का ऐलान किया है. हालाँकि, ये बढ़ते CAD यानी करेंट अकाउंट डेफिसिट का मुकाबला करने के लिए काफी नहीं हो सकते हैं. चालू खाता के मोर्चे पर सरकार ने गैर-विवेकाधीन आयात पर अंकुश लगाने के लिए सोने के आयात शुल्क में बढ़ोतरी की घोषणा की है. 
कुल मिलाकर, हमारा अनुमान है कि वित्त वर्ष 2013 में व्यापार घाटा और बढ़ेगा, यह कम पूंजी खाता सरप्लस के साथ मिलकर रुपये पर भार डालेगा.


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