होम / एक्सप्लेनर / चीन, पाकिस्तान, श्रीलंका जैसे खस्ताहाल पड़ोसी, क्या भारत भी घिरेगा संकट में?
चीन, पाकिस्तान, श्रीलंका जैसे खस्ताहाल पड़ोसी, क्या भारत भी घिरेगा संकट में?
पाकिस्तान पर लगातार कर्ज के तले दबता जा रहा है. पाकिस्तान पर 53.5 लाख करोड़ पाकिस्तानी रुपये का कर्ज है, जो कि लगातार बढ़ता जा रहा है
बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 3 years ago
नई दिल्ली: अगर आपके पड़ोसी अच्छे हैं तो आपकी भी तरक्की होती है. लेकिन भारत की किस्मत इतनी अच्छी नहीं है. क्योंकि अगर आप भारत के पड़ोसी देशों को देखेंगे तो उनकी हालत कुछ ठीक नहीं चल रही है. श्रीलंका संकट दुनिया देख रही है, पाकिस्तान की इकोनॉमी शुरू से ही फटेहाल और अब चीन में भी संकट गहराने लगा है. नेपाल, बांग्लादेश जैसे छोटे देशों की भी कुछ खास तरक्की नहीं हो रही है, ऐसे में भारत के लिए क्या चुनातियां हैं, क्या भारत भी अपने पड़ोसियों की तरह आर्थिक संकटों से घिर जाएगा.
बर्बादी की कगार पर खड़ा पाकिस्तान
इसे समझने के लिए सबसे पहले हमें अपने पड़ोसियों की हालत को समझना होगा, उसकी क्या वजह है ये जानना होगा फिर हम भारत की चुनौतियों की बात करेंगे. सबसे पहले पाकिस्तान की बात करते हैं. पूरी दुनिया महंगाई के चंगुल में फंसी है, दूसरों से उधार लेकर जिंदगी बसर करने वाला पाकिस्तान महंगाई के गर्त में गिर चुका है. यहां महंगाई 14 साल की ऊंचाई पर पहुंच चुकी है, जुलाई में यहां महंगाई दर 24.9 परसेंट दर्ज की गई है, जो कि पिछले साल जुलाई में सिर्फ 1.3 परसेंट थी. खाने पीने की कीमतों में जुलाई के महीने में 28 परसेंट का इजाफा देखा गया. पाकिस्तान पर लगातार कर्ज के तले दबता जा रहा है. पाकिस्तान पर 53.5 लाख करोड़ पाकिस्तानी रुपये का कर्ज है, जो कि लगातार बढ़ता जा रहा है, उसकी पाकिस्तानी करेंसी भी 239 प्रति डॉलर के लेवल तक आ चुकी है. पाकिस्तान का फॉरेक्स रिजर्व यानी विदेशी मुद्रा भंडार लगातार कम हो रहा है. पाकिस्तान के सेंट्रल बैंक के मुताबिक उसके फॉरेक्स रिजर्व में $754 मिलियन की कमी आई है अब ये घटर $8.57 बिलियन हो गया है. पाकिस्तान का फॉरेक्स रिजर्व तेजी से खत्म हो रहा है क्योंकि उसके ऊपर लगातार कर्ज का बोझ बढ़ रहा है. साल 2021-22 की पहली तीन तिमाहियों में पाकिस्तान पर विदेशी कर्ज $10.886 बिलियन बढ़ा. जो कि पूरे वित्त वर्ष 2021 के दौरान ये $13.38 बिलियन था. वित्त वर्ष 2022 की दूसरी और तीसरी तिमाही में पाकिस्तान पर विदेशी कर्ज $4.357 बिलियन और $4.875 बिलियन चढ़ा. जून में पाकिस्तान ने चीन से $2.3 बिलियन का कर्ज भी लिया है. इसके अलावा IMF से भी 1.2 बिलियन के आर्थिक मदद की गुहार भी पाकिस्तान लगा रहा है. इससे अंदाजा लगाया जा सकता है कि पाकिस्तान कर्ज के जाल में किस कदर फंस चुका है. पाकिस्तान की कमाई कुछ नहीं और खर्चा ज्यादा है, जिसके चलते इसका वित्तीय घाटा भी 4 साल की ऊंचाई $17.4 बिलियन पर पहुंच चुका है.
चीन का रियल एस्टेट संकट
चीन इस समय जिन हालातों से गुजर रहा है, उसने राष्ट्रपति शी जिनपिंग की गद्दी हिला दी है. जिनपिंग चीन के लिए तीसरी बार राष्ट्रपति की गद्दी पर बैठना चुनौतीपूर्ण हो सकता है, क्योंकि चीन के लिए जिनपिंग की नीतियों से काफी नाराज हैं. चूंकि चीन में आर्थिक हालातों को लेकर कोई एक संकट नहीं है. सबसे बड़ा संकट जो मुंह बाए खड़ा है वो है चीन का रियल एस्टेट संकट. चीन का रियल एस्टेट कारोबार बिल्कुल बर्बाद हो चुका है. इस सेक्टर के पास अपने प्रोजेक्ट्स को पूरा करने के लिए पैसे नहीं है, लोगों को उनके घर नहीं मिले तो उन्होंने लोन चुकाने से मना कर दिया. अब रियल एस्टेट सेक्टर $300 ट्रिलियन के कर्ज तले दबा हुआ है. कई रियल एस्टेट कंपनियां दिवालिया हो चुकी हैं, कई दिवालिया होने वाली है. मार्च की शुरुआत में चीन की सरकार ने कहा था कि वो इस साल 5.5 परसेंट की जीडीपी हासिल करेंगे, जो कि बीते तीन दशक में चीन की सरकार का जीडीपी को लेकर सबसे निचला लक्ष्य है. अर्थशास्त्री तो इसको भी मुश्किल बता रहे हैं. कई अर्थशास्त्रियों के मुताबिक चीन की ग्रोथ इस साल के पहले हाफ में सिर्फ 2.5 परसेंट रही है, 5.5 परसेंट का लक्ष्य तो बहुत दूर है. दरअसल चीन से शुरू हुआ कोविड चीन के लिए भारी पड़ गया, लगातार सख्त लॉकडाउन से आर्थिक गतिविधियां ठप पड़ गईं, इससे निजी कंपनियों को जबरदस्त मार पड़ी, रियल एस्टेट सेक्टर बुरी तरह प्रभावित हुआ. नतीजा ये हुआ की बेरोजगारी अपने चरम पर पहुंच गई, ग्रोथ 0.4 परसेंट गिर गई. Nomura का अनुमान है कि इस साल 2022 में चीन की ग्रोथ 3.3% रहेगी.
श्रीलंका तबाह हुआ
श्रीलंका से भारत के तार काफी अंदर तक जुड़े हैं, इसलिए भारत श्रीलंका की बढ़चढ़कर मदद कर रहा है, लेकिन इस मदद के बावजूद क्या श्रीलंका अपनी आर्थिक चुनौतियों से लड़ पाएगा ये बड़ा सवाल है. श्रीलंका में महंगाई मजाक बनकर रह गई है. जून में जो महंगाई 54.6 परसेंट थी अब जुलाई में महंगाई 60.8 परसेंट पर आ गई है. खाने पीन की चीजों के दाम सुनकर आपको होश उड़ जाएंगे. 1948 में आजादी मिलने के बाद से श्रीलंका अपने सबसे खराब आर्थिक और राजनीतिक संकट से गुजर रहा है. विदेशी मुद्रा संकट के कारण ईंधन की कमी से देश का निर्यात क्षेत्र बुरी तरह प्रभावित हुआ है. श्रीलंका पर 51 अरब डॉलर से भी ज्यादा का कर्ज है, हालत ऐसी ही कि श्रीलंका इस कर्ज का ब्याज तक नहीं चुका पा रहा है. विश्व बैंक ने श्रीलंका को और कर्ज देने से मना कर दिया है. हालत ये है कि श्रीलंका में लोगों को सिर्फ एक वक्त का खाना मिल रहा है और 12-14 घंटे बिजली की कटौती का सामना करना पड़ रहा है.
भारत पर क्या असर होगा
इस सवाल का जवाब रिजर्व बैंक के पूर्व गवर्नर रघुराम राजन ने बखूबी दिया है. जब उनसे पूछा गया कि कहीं भारत के हालात श्रीलंका और पाकिस्तान जैसे तो नहीं हो जाएंगे, तो उन्होंने कहा कि आरबीआई ने विदेशी मुद्रा भंडार यानी Foreign Exchange Reserves बढ़ाने में अच्छा काम किया है. हमारे पास पर्याप्त विदेशी मुद्रा भंडार है. हमारी समस्या श्रीलंका और पाकिस्तान जैसी नहीं है. हमारे विदेशी कर्ज भी कम हैं. जहां तक महंगाई की बात है तो इस समय पूरी दुनिया में महंगाई है. आरबीआई ब्याज दरें बढ़ा रहा है जिससे महंगाई कम करने में मदद मिलेगी. सबसे ज्यादा महंगाई खाद्य और ईंधन में है. दुनिया में फूड आइटम्स में महंगाई कम हो रही है, यह आने वाले दिनों में भारत में भी घटेगी. RBI के ताजा आंकड़ों के मुताबिक 22 जुलाई को खत्म हफ्ते में भारत का विदेशी मुद्रा भंडार 571.56 बिलियन डॉलर था.
VIDEO: अडानी को टक्कर देने के लिए अंबानी ने तैयार किया ये प्लान
टैग्स