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झटका! SBI समेत कई बैंकों ने महंगा किया लोन, इसी महीने से लागू हुई नई दरें
Punjab National Bank, ICICI Bank, Yes Bank, HDFC Bank, Bank of Baroda उन बैंकों में हैं जिन्होंने पहले ही MLCR की दरों में इजाफा कर दिया है.
बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 3 years ago
नई दिल्ली: महंगाई को काबू करने के लिए रिजर्व बैंक ने लगातार चार बार रेपो रेट में इजाफा किया है, जिससे रेपो रेट 1.09 परसेंट बढ़कर 5.90 परसेंट हो चुका है. रिजर्व बैंक जब रेपो रेट बढ़ाता है तो बैंक भी अपना लोन महंगा करते हैं.
अबतक कई बैंक बढ़ा चुके हैं दरें
कई बैंक RBI के रेपो रेट बढ़ाने के बाद अपनी होम लोन की दरें बढ़ा चुके हैं. अब इसी कड़ी में देश के सबसे बड़े बैंक स्टेट बैंक ऑफ इंडिया - SBI, Kotak Mahindra Bank और Federal Bank ने भी अपनी MCLR (marginal cost of funds based lending rates) की दरों में इजाफा कर दिया है.
SBI ने बदलीं MCLR की दरें
दरअसल, 30 सितंबर को जब रिजर्व बैंक ने रेपो रेट 0.50 परसेंट बढ़ाया था, तो बैंकों ने कदमताल करते हुए करीब इतना ही अपना रेपो लिंक्ड लेंडिंग रेट भी बढ़ा दिया था. धीरे-धीरे बैंकों ने MCLR (marginal cost of funds based lending rates) भी बढ़ा दिया है. देश के सबसे बड़े बैंक SBI ने बेंचमार्क एक साल की अवधि के लिए MCLR को बढ़ाकर 7.95% कर दिया है, जो पिछली दर से 0.25 % ज्यादा है, जो 15 अक्टूबर, 2022 से प्रभावी हो चुका है. एक साल की अवधि वाला MLCR वह दर है, जिस पर ज्यादातर कंज्यूमर लोन जुड़े होते हैं. इसके अलावा SBI ने 2 और 3 साल की अवधि के MLCR को बढ़ाकर 8.15% और 8.25% कर दिया है, जबकि यह 7.9% और 8% था. ओवरनाइट, 1, 3 और 6 महीने की दरों को 7.60-7.90% की रेंज में बढ़ा दिया गया है.
इन बैंकों ने भी बदलीं MCLR की दरें
कोटक महिंद्रा बैंक ने कहा कि अलग अलग अवधि के लिए MLCR 16 अक्टूबर, 2022 से 7.70-8.95% की रेंज में निर्धारित किया गया है. इसकी संशोधित एक साल की MLCR दर 8.75% है. दक्षिण भारत के बैंक Federal Bank ने भी MLCR की दरों में बदलाव किया है. लोन और एडवांस पर एक साल का MCLR संशोधित करके 8.70% कर दिया गया है, जो 16 अक्टूबर से प्रभावी है.
इसके पहले Punjab National Bank, ICICI Bank, Yes Bank, HDFC Bank, Bank of Baroda उन बैंकों में हैं जिन्होंने रिजर्व बैंक के रेपो रेट बढ़ाने के तुरंत बाद ही MLCR की दरों में इजाफा कर दिया है.
दरअसल, रेपो लिंक्ड लेंडिंग रेट ज्यादा तेज और पारदर्शी है, क्योंकि रिजर्व बैंक जैसे ही रेपो दरों में बदलाव करता है, बैंक भी उसी हिसाब से RLLR में बदलाव करते हैं, और ये उपभोक्ताओं को तुरंत ट्रांसफर हो जाता है. लेकिन MCLR एक पुरानी पद्धति है, जिसमें दरों का ट्रांसफर उतना तेज नहीं होता है. इसलिये जब रिजर्व बैंक रेपो रेट में इजाफा करता है तो बैंक भी तुरंत ही RLLR बढ़ा देते हैं, लेकिन MLCR वाले ग्राहकों को इसे बाद में बढ़ाया जाता है. 1 अक्टूबर, 2019 से, सभी बैंक एक एक्टर्नल बेंचमार्क से जुड़ी ब्याज दर पर चले गए.
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