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भारत की आर्थिक सेहत के लिए ठीक नहीं है Iran-Israel संघर्ष, ऐसे प्रभावित होंगे हमारे हित!
ईरान ने इजरायल के खिलाफ एक खतरनाक योजना तैयार की है, जिसके बाद युद्ध की आशंका और भी ज्यादा बढ़ गई है.
बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 1 year ago
ईरान और इजरायल के बीच तनाव (Iran-Israel Tension) चरम पर पहुंच गया है. हमास सुप्रीमो इस्माइल हानिया की हत्या का बदला लेने के लिए ईरान इजरायल पर बड़ा हमला करने की तैयारी कर रहा है. मीडिया रिपोर्ट्स की मानें, तो ईरान ने लेबनान के चरमपंथी संगठन हिज्बुल्ला और हूती विद्रोहियों के साथ मिलकर इजरायल पर मिसाइल, रॉकेट और विस्फोटक ड्रोन से हमला बोलने की योजना बनाई है. हूती विद्रोही इजरायल द्वारा फिलिस्तीन पर किए जा रहे हमलों से नाराज हैं और यह नाराज़गी वह लाल सागर (Red Sea) से गुजरने वाले कमर्शियल जहाजों को निशाना बनाकर पहले भी व्यक्त कर चुके हैं. यदि ईरान अपनी योजना में सफल होता है, तो हालात नियंत्रण से बाहर हो जाएंगे.
जारी की है एडवाइजरी
पश्चिम एशिया के इस घटनाक्रम पर भारत करीबी से नजर बनाए हुए है. सरकार ने इजरायल और लेबनान में रह रहे भारतीयों के लिए एडवाइजरी जारी की है. एक अनुमान के मुताबिक, ईरान, इजरायल और लेबनान में कुल मिलाकर 40 हजार भारतीय रह रहे हैं. भारत की एक टेंशन यह भी है कि अगर हालात जल्द सामान्य होने बजाए बिगड़ जाते हैं, तो उसका व्यापार भी बड़े पैमाने पर प्रभावित होगा. भारत के इन तीनों ही देशों से व्यापारिक रिश्ते हैं.
इतना रहा है व्यापार
ईरान के साथ हमारे व्यापार में भले ही पहले के मुकाबले कुछ कमी आई है, लेकिन व्यापारिक रिश्ते कायम हैं और उनके प्रभावित होने से हमें आर्थिक नुकसान उठाना पड़ेगा. वित्त वर्ष 2019-20 में भारत और ईरान के बीच कुल व्यापार 4.77 बिलियन डॉलर (करीब 40 हजार करोड़ रुपए) का था, जो कि अप्रैल से जुलाई 2023 के बीच 0.66 बिलियन डॉलर (5500 करोड़ रुपए) रह गया. भारत की तरफ ईरान को कई सामान निर्यात किए जाते हैं. इसमें प्रमुख रूप से बासमती चावल, चाय, चीनी, ताजे फल, दवाएं/फार्मास्यूटिकल्स, सॉफ्ट ड्रिंक -शरबत और दालें आदि शामिल हैं.
ईरान से भारत का इम्पोर्ट
इसी तरह, ईरान से भारत मेथनॉल, पेट्रोलियम बिटुमेन, सेब, लिक्विफाइड प्रोपेन, सूखे खजूर, अकार्बनिक/कार्बनिक कैमिकल, बादाम आदि आयात करता है. युद्ध की स्थिति में आयात-निर्यात के प्रभावित होने से इंकार नहीं किया जा सकता. वहीं, भारत के इजरायल से भी व्यापारिक संबंध हैं. एशिया में इजरायल के लिए भारत तीसरा सबसे बड़ा ट्रेड पार्टनर है. भारत के कुल व्यापारिक निर्यात में इजरायल की हिस्सेदारी 1.8% है. इजरायल भारत से लगभग 5.5 से 6 बिलियन डॉलर के परिष्कृत पेट्रोलियम उत्पाद (Refined Petroleum Products) खरीदता है. वित्तवर्ष 23 में, इजराइल को भारत का कुल निर्यात 8.4 बिलियन डॉलर था. जबकि आयात 2.3 बिलियन डॉलर रहा. इस तरह, दोनों देशों के बीच करीब 10 बिलियन डॉलर का कारोबार हुआ है.
इजरायल से इनका आयात
इजरायल भारत से परिष्कृत पेट्रोलियम उत्पादों के साथ-साथ ज्लैवरी, कंज्यूमर इलेक्ट्रॉनिक्स और इंजीनियरिंग से जुड़े प्रोडक्ट्स मंगाता है. जबकि भारत मोती, हीरे, डिफेंस मशीनरी, पेट्रोलियम ऑयल्स, फर्टिलाइजर्स और इलेक्ट्रॉनिक्स कंपोनेंट आदि आयात करता है. एक रिपोर्ट बताती है कि अप्रैल 2000 से मार्च 2023 के दौरान, भारत में इजरायल का प्रत्यक्ष विदेशी निवेश यानी FDI 284.96 मिलियन अमेरिकी डॉलर था. कई भारतीय कंपनियों ने भी इजरायल में बड़ा निवेश किया हुआ है. यदि हालात बिगड़ते हैं और युद्ध होता है, तो यह तस्वीर काफी हद तक बदल सकती है.
लेबनान से हमारा कारोबार
लेबनान और इजरायल के बीच संघर्ष में तेजी आ सकती है. यदि ईरान की योजना अनुसार हिज्बुल्ला ने ईरान और हूती विद्रोहियों के साथ मिलकर इजरायल पर धावा बोला तो इजरायली हमले भी तेज हो जाएंगे. ऐसे में भारत के लेबनान से व्यापारिक रिश्तों पर भी असर पड़ेगा. एक रिपोर्ट के अनुसार, वर्ष 2022 में भारत ने लेबनान को कुल 308 मिलियन डॉलर का सामान निर्यात किया था. लेबनान भारत से काफी कुछ आयात करता है, इसमें इलेक्ट्रिक बैटरी, रिफाइंड पेट्रोलियम, मांस, मोती और प्लास्टिक आदि का योगदान सबसे ज्यादा है. संघर्ष बढ़ने की स्थिति में इम्पोर्ट और एक्सपोर्ट दोनों प्रभावित होगा. इसलिए दुनिया के अन्य देशों की तरह भारत भी यही चाहता है कि पश्चिम एशिया में युद्ध का खतरा टल जाए .
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