✕

होम / एक्सप्लेनर / ग्लोबल बॉन्ड इंडेक्स क्या है? भारत को इसमें क्यों सूचीबद्ध किया जाना चाहिए? समझिए

ग्लोबल बॉन्ड इंडेक्स क्या है? भारत को इसमें क्यों सूचीबद्ध किया जाना चाहिए? समझिए

सरकार ऐसी स्थिति में है जहां वह अपनी कमाई से ज्यादा खर्च कर रही है. कुछ अनुमानों के मुताबिक इस साल यह 16 से 17 लाख करोड़ रुपये ज्यादा है.

उर्वी श्रीवास्तव 4 years ago

ग्लोबल बॉन्ड बाजार को कंपनियों के लिए वैश्विक स्तर पर विदेशी निवेश को अपने देश में आकर्षित करने के लिए एक विकल्प के रूप में देखा जाता है. भारत भी ग्लोबल फंड्स को आकर्षित करने में पीछे नहीं रहना चाहता है.

भारत को वैश्विक निवेश बाजार में शामिल करने पर जोर दिया जा रहा है. इस मामले में केंद्र सरकार और सूचकांक धारकों के बीच बातचीत भी चल रही है. सूचीबद्ध हो जाने पर भारतीय बांडों को 2023 में जेपी मॉर्गन गवर्नमेंट बॉन्ड इंडेक्स-इमर्जिंग मार्केट्स में शामिल किए जाने की उम्मीद है. ऐसे समय में जब भारत सरकार 'आत्मनिर्भर भारत' और 'मेक इन इंडिया' का प्रचार कर रही है, तब भारतीय कंपनियों को वैश्विक लिस्टिंग की परवाह क्यों करनी चाहिए?

ग्लोबल बॉन्ड इंडेक्स क्या है?
सबसे पहले ये समझते हैं कि ये ग्लोबल बॉन्ड इंडेक्स क्या है? सरल शब्दों में इसे समझें तो, सूचकांक वित्तीय साधन की गति को ट्रैक करने का एक तरीका है, जिस पर यह आधारित है. ये सूचकांक निवेशकों को कई न्यायालयों में बांडों की आवाजाही को ट्रैक करने और सापेक्ष तुलना में सहायता करने में मदद करते हैं. इससे उन दिग्गज निवेशकों को मदद मिलती है जो म्यूचुअल फंड, पेंशन फंड और अन्य फंड्स में लंबे समय के लिए बड़ा निवेश करते हैं. उदाहरण के लिए, सेंसेक्स और निफ्टी भारत में विशेष शेयरों को ट्रैक करने में मदद करते हैं.

निफ्टी 100 नेशनल स्टॉक एक्सचेंज में सूचीबद्ध शीर्ष 100 कंपनियों पर नजर रखता है. जब बाजार ऊपर जाता है, तब व्यक्तिगत शेयरों का मूल्य बढ़ता है या फिर घटता है. इसी तरह, हमारे पास एक वैश्विक सूचकांक है, जहां बॉन्ड की लिस्टिंग होती है न कि शेयरों की. वे बॉन्ड्स को सबकैटेगरी में ट्रैक करते हैं, जैसे उच्च जोखिम वाले बांड, उभरते बाजार वाले बांड और सरकारी बांड. जेपी मॉर्गन और ब्लूमबर्ग बार्कले ऋण बाजारों में कुछ प्रमुख सूचकांक हैं जो उभरते बाजारों से लेकर देश-विशेष विश्व सूचकांकों तक की एक विस्तृत श्रृंखला प्रदान करते हैं.

भारत को सूचीबद्ध क्यों किया जाना चाहिए?
अब बात करते हैं कि इसमें भारत को सूचीबद्ध क्यों किया जाना चाहिए? सरकार ऐसी स्थिति में है जहां वह अपनी कमाई से ज्यादा खर्च कर रही है. कुछ अनुमानों के मुताबिक इस साल यह 16 से 17 लाख करोड़ रुपये ज्यादा है. यह पैसा आमतौर पर बॉन्ड मार्केट से आता है, जहां सरकार बॉन्ड बेचती है और पैसा इकट्ठा करती है (सरकारी बॉन्ड को सॉवरेन बॉन्ड के रूप में भी जाना जाता है).

एक बार जब भारतीय बांड सूचीबद्ध हो जाते हैं तो आरबीआई को सरकार की उधारी लागत को कम करने के लिए सरकार के लिए अंतिम उपाय का खरीदार नहीं बनना पड़ेगा. यह बात इंटरेस्टिंग है कि हमारे पास दुनिया के सबसे मजबूत बॉन्ड बाजारों में से एक है, जिसकी कीमत 1 ट्रिलियन यूएस डॉलर है. पर समस्या है कि यह किसी वैश्विक सूचकांक में लिस्टेड नहीं है.

संक्षेप में कहें तो विश्व स्तर पर खुद को सूचीबद्ध करके, भारतीय बांड उन निवेशकों की दृष्टि में बने रहेंगे जो विदेशों में पैसा लगाने के इच्छुक हैं. इससे देश में अधिक विदेशी मुद्रा लाने में मदद मिलेगी, जिसका घटते रुपये पर सकारात्मक प्रभाव पड़ेगा जो 82 रुपये प्रति यूएस डॉलर के ऑलटाइम लो लेवल पर है. यह सुनिश्चित करेगा कि निष्क्रिय रूप से प्रबंधित फंडों से नियमित रूप से डॉलर की कुछ राशि प्रवाहित हो रही है. इससे भारतीय बॉन्ड को टॉप परफॉर्म करने वाले वैश्विक बॉन्ड के मुकाबले वैश्विक स्तर पर अधिक प्रतिस्पर्धी बनने में मदद मिलेगी. रुपये में गिरावट के कारण निवेशक भारतीय बाजार से पैसा निकाल रहे हैं. वैश्विक बाजार उसी के आसपास वित्तीय बफर के रूप में काम कर सकता है.    

हालांकि, यह कहना आसान है. तरलता (liquidity), सुरक्षा और रिटर्न को लेकर सख्त मानदंड हैं. इसमें बाजार का आकार (उदाहरण के लिए, विश्व स्तर पर सबसे बड़े बॉन्ड बाजारों में से एक है), बॉन्ड एक्सेस में आसानी और सॉवरेन रेटिंग, अन्य मापदंडों के साथ शामिल हैं. भारत इन सभी मापदंडों में अच्छा प्रदर्शन करता है, जो भारत को निवेशकों के लिए एक फायदे वाला बाजार बनाता है.

उदाहरण के लिए, आरबीआई 2020 में फुली एक्सेसिबल रूट (एफएआर) लेकर आया, जिसके तहत विदेशी निवेशक भारत में बिना किसी कैप पीआर प्रतिबंध के निवेश कर सकते हैं. अंत में, रूस को वैश्विक बांड सूचकांक से बाहर कर दिया गया है, इससे भारत के लिए वैश्विक बांड बाजार में एक व्यवहार्य प्रतियोगी के रूप में उभरने की गुंजाइश बनती है. अगर कोई भारतीय बॉन्ड बाजार में निवेश करना चाहता है, तो वो समय अब आ चुका है.


टैग्स
सम्बंधित खबरें

समझिए: भारतीय पासपोर्ट नागरिकता का अंतिम कानूनी प्रमाण क्यों नहीं माना जाता?

मंत्रालय ने स्पष्ट किया कि पासपोर्ट कानूनी रूप से एक यात्रा दस्तावेज है, न कि नागरिकता का अंतिम प्रमाण.

26-June-2026

क्या है 65 साल पुराना सिंधु जल समझौता, जिससे पाकिस्तान में मचेगा हाहाकार, कितना होगा असर?

भारत ने कहा है कि पाकिस्तान के साथ 1960 से चले आ रहे जल समझौते का बोझ आगे नहीं ढोएगा, जब तक पाकिस्तान सीमा पार से आतंकवाद को प्रभावी रूप से बंद नहीं कर देता है.

24-April-2025

अमेरिका के टैरिफ लगाने से भारत के किस सेक्टर्स पर क्या होगा असर? जानिए डिटेल्स

अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दुनिया को बड़ा झटका दिया है. ट्रंप ने भारत समेत कई देशों पर टैरिफ लगाने का ऐलान कर दिया है. जिससे भारत के निर्यात पर गहरा असर देखने को मिल सकता है.

03-April-2025

भारत की तरक्की को कई गुना बढ़ा रही महिला एंटरप्रेन्योर, NeoGrowth की रिपोर्ट में आया सामने

3,000 से अधिक महिला उद्यमियों के सर्वेक्षण पर आधारित इस रिपोर्ट में महिलाओं की व्यापारिक सफलता और उनके सामने आने वाली चुनौतियों दोनों को दिखाया गया है.

06-March-2025

अडानी परिवार की शादी का उत्सव: परंपरा, आधुनिकता और समाज सेवा का संगम

यह शादी सिर्फ एक उत्सव नहीं, बल्कि अडानी परिवार की समाज सेवा के प्रति प्रतिबद्धता का प्रमाण है, जिसमें हर पहलू में कला, परंपरा और सशक्तिकरण जुड़ा हुआ है.

24-February-2025


बड़ी खबरें

एक्सिस बैंक का फेस्टिव ऑफर, पर्सनल लोन 9.99% से शुरू; कार और EV लोन पर भी छूट

एक्सिस बैंक ने त्योहारी सीजन को देखते हुए होम लोन, पर्सनल लोन, वाहन लोन और एजुकेशन लोन सहित कई वित्तीय उत्पादों पर विशेष ऑफर की घोषणा की है.

3 hours ago

अक्षर योग केंद्र ने मास्टर एंथनी को चीन का कंट्री हेड नियुक्त किया, वैश्विक विस्तार की तैयारी

संस्थान की योजना 2027 की शुरुआत में चीन में योग, ध्यान और प्राणायाम से जुड़े विशेष कार्यक्रम शुरू करने की है.

27 minutes ago

मोबावेन्यू के रेवेन्यू में 48.6% की बढ़ोतरी, पहली छमाही में मुनाफा 72.2% उछला

एडटेक कंपनी मोबावेन्यू ने वित्त वर्ष 2026-27 की पहली छमाही (H1 FY27) के वित्तीय नतीजे जारी किए हैं.

52 minutes ago

चार दिन की तेजी के बाद बाजार में मुनाफावसूली के संकेत, गिफ्ट निफ्टी टूटा; आज इन शेयरों पर रहेगी नजर

मंगलवार को बीएसई सेंसेक्स 1,225.07 अंक यानी 1.62 फीसदी उछलकर 76,917.85 पर बंद हुआ. वहीं, एनएसई निफ्टी 370.05 अंक यानी 1.58 फीसदी की बढ़त के साथ 23,810.85 पर पहुंच गया.

3 hours ago

सोने पर अभी और बढ़ेगी मंदी की मार, 11% तक गिर सकते हैं दाम: रिपोर्ट

ग्लोबल ब्रोकरेज फर्म नोमुरा का अनुमान है कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने का भाव गिरकर 3,500 डॉलर प्रति औंस तक आ सकता है.

3 hours ago