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दुनिया की करेंसीज के सामने रुपये की हालत हो रही पतली! इस दावे में कितनी सच्चाई, जानिए
अमेरिका में ब्याज दरें बढ़ना तय है, इसलिए निवेशकों ने दुनियाभर से अपना पैसा निकालकर अमेरिका में झोंकना शुरू कर दिया है.
बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 3 years ago
नई दिल्ली: इसमें कोई दो राय नहीं कि डॉलर के मुकाबले रुपया वाकई कमजोर हो रहा है, रुपये की खराब होती सेहत पर थोड़ी चिंता तो जायज है, देखा जाए तो आज भी रुपये ने 80.05 का रिकॉर्ड निचला लेवल छुआ है. लेकिन रुपये की कमजोरी पर छाती पीटने से पहले इसका दूसरा पहलू भी देखना जरूरी है. डॉलर के मुकाबले दुनिया की सभी करेंसीज की हालत पतली है. हमेशा डॉलर से मजबूत रहने वाला यूरो भी डॉलर के सामने बौना हो गया, बाकी देशों की करेंसीज की तो क्या ही बात करें.
दूसरी करेंसीज के मुकाबले रुपया कितना मजबूत
डॉलर से तुलना करके सिर्फ ये बताना कि रुपया कमजोर हो गया है, ये आधी सच्चाई है, जबतक कि रुपये को दुनिया की बाकी करेंसीज के सामने खड़ा करके न तौला जाए. जब रुपये की तुलना बाकी करेंसीज से करेंगे तो तस्वीर ठीक उलट हो जाएगी. रुपया एक साल के दौरान दुनिया की कई करेंसीज के मुकाबले काफी मजबूत हुआ है. नीचे की टेबल पर एक नजर डालिए.
A. जापानी येन Vs रुपया
1 जापानी येन =
₹0.70 ₹0.58
19 जुलाई 2021 19 जुलाई 2022
B. यूरो Vs रुपया
1 यूरो =
₹88 ₹80
19 जुलाई 2021 19 जुलाई 2022
C. पाउंड स्टर्लिंग Vs रुपया
1 पाउंड स्टर्लिंग
₹102 ₹95
19 जुलाई 2021 19 जुलाई 2022
D. फ्रेंच फ्रैंक Vs रुपया
1 फ्रेंच फ्रैंक =
₹13.6 ₹12.2
19 जुलाई 2021 19 जुलाई 2022
अमेरिका पर पड़ेगी ब्याज दरों की मार
इन आंकड़ों को देखकर आपको ये समझ आ गया होगा कि रुपया दुनिया की करेंसीज के मुकाबले कमजोर नहीं बल्कि मजबूत हुआ है. अब बात करतें हैं डॉलर की जो लगातार मजबूत होता जा रहा है. सबसे पहले ये सवाल पूछिये कि डॉलर क्यों मजबूत हो रहा है, क्या अमेरिका की इकोनॉमी बहुत ग्रोथ कर रही है, तो इसका जवाब है बिल्कुल नहीं. बल्कि हकीकत तो ये है कि अमेरिका में रिटेल महंगाई दर 41 साल के सबसे ऊंचे स्तर पर पहुंच गई है, ये 9.1 परसेंट दर्ज की गई है. जिसकी वजह से अब ये अनुमान लगाया जा रहा है कि महंगाई को काबू करने के लिए फेडरल रिजर्व ब्याज दरों में 75 से लेकर 100 बेसिस प्वाइंट तक की बढ़ोतरी कर सकता है.
अमेरिका की ओर मुड़ गए निवेशक
अब जब अमेरिका में ब्याज दरें बढ़ेंगी तो निवेशकों को मुंह में तो पानी आएगा ही, यूएस बॉन्ड यील्ड भी बढ़ रहा है जिससे निवेशक अपना पैसा दूसरी अर्थव्यवस्थाओं से निकालकर अमेरिकी बॉन्ड में लगा रहे हैं और यही वजह से ही डॉलर दूसरे देशों की करेंसीज के मुकाबले लगातार मजबूत होता जा रहा है. जो डॉलर इंडेक्स कभी 90 के इर्द-गिर्द घूमता था अब 108 पहुंच चुका है, जो कि इसका भी ऑल टाइम हाई है.
रुपये के लिए उठाया ये कदम
तो एक तो साफ है कि अगर डॉलर-रुपया एक्सचेंज रेट अगर बढ़ रहा है तो इसमें रुपये का कोई कुसूर नहीं है. हां अगर रुपये की मजबूती के लिए सरकार ने कुछ किया है तो ये कि उसने रूस और ईरान जैसे देशों के साथ व्यापार करने के लिए डॉलर की जगह रुपये को एक्सचेंज करेंसी के तौर पर इस्तेमाल करने को मंजूरी दी है. इससे रुपये की डिमांड बढ़ेगी और डॉलर की डिमांड घटेगी तो रुपया अपने आप सुधर जाएगा.
अब एक बात और समझ लीजिए कि डॉलर भले ही मजबूत हो रहा है लेकिन महंगाई भी आसमान पर है, जिसे काबू में करने के लिए अमेरिका के लिए ब्याज दरें बढ़ाना मजबूरी होगी. ऐसे में अमेरिका में कंपनियों को सस्ता लोन नहीं मिलेगा, जिसका सीधा असर ग्रोथ पर दिखेगा.
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