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मौसम के इस मिजाज से आपके लिए आने वाली है मुश्किलों की सुनामी, समझिए पूरा गणित

देश के कई इलाके इस समय पर्याप्त बारिश की कमी का सामना कर रहे है, तो कहीं पर बारिश प्रलय बनकर सामने आई है.

नीरज नैयर 2 years ago

मौसम का मिजाज पहेली बनता जा रहा है. एक तरफ जहां आधा मानसून बीतने के बाद भी कई इलाके कम बारिश का सामना कर रहे हैं. वहीं, कुछ जगहों पर 'रहमत' वाली बारिश कहर बनकर टूटी है. खासकर, केरल और हिमाचल में बारिश ने कोहराम मचा दिया है. मौसम के इस दोहरे रूप का खामियाजा आने वाले दिनों में पूरे देशों को अपनी जेब ज्यादा ढीली करके उठाना पड़ सकता है. सीधे शब्दों में कहें तो इस असंतुलित बारिश के चलते महंगाई का चक्का तेजी से घूमने की आशंका उत्पन्न हो गई है. 

अनुमान के उलट नजारा  
मानसून के आने से पहले मौसम विभाग ने 25 राज्यों में सामान्य से ज्यादा बारिश का अनुमान जताया था. इसमें केरल, कर्नाटक, तमिलनाडु, तेलंगाना, महाराष्ट्र , गुजरात, मध्यप्रदेश, आंध्रप्रदेश, राजस्थान, पंजाब, चंडीगढ़, दिल्ली, हरियाणा, उत्तराखंड, उत्तरप्रदेश, बिहार, झारखंड, सिक्किम, मेघालय, बंगाल, अरुणाचल प्रदेश, पुड्डुचेरी, अंडमान निकोबार द्वीप समूह, लक्षदीप, दमन-दीव, दादरा और नगर हवेली शामिल थे. जबकि छत्तीसगढ़, हिमाचल, जम्मू-कश्मीर और लद्दाख में सामान्य बारिश की बात कही थी. जबकि पूर्वी उत्तर प्रदेश, बिहार, झारखंड, पश्चिम बंगाल के गंगा के मैदानी इलाकों और पूर्वोत्तर के कुछ हिस्सों में बारिश 25 प्रतिशत से कम हुई है. इसी तरह, हरियाणा, पंजाब और जम्मू-कश्मीर भी कम बारिश का सामना कर रहे हैं. यहां कमी का प्रतिशत 35 से 45 तक है.

संतुलित बारिश ज़रूरी
देश में सालभर होने वाली कुल बारिश का 70% पानी मानसून में ही बरसता है. हमारे देश में में 70 से 80 प्रतिशत किसान फसलों की सिंचाई के लिए बारिश पर निर्भर हैं. इसलिए हर साल संतुलित मानसून की उम्मीद लगाई जाती है.भारत की अर्थव्यवस्था में कृषि क्षेत्र की हिस्सेदारी लगभग 20 प्रतिशत है. ऐसे में मानसून का अच्छा रहना अर्थव्यवस्था के लिए भी बेहद जरूरी है. लेकिन अब तक कई राज्यों में बादल झूमकर नहीं बरसे हैं. इसमें वो राज्य भी शामिल हैं, जहां के कृषि उत्पाद पूरे देश का पेट भरते हैं. उदाहरण के तौर पर उत्तर प्रदेश अपने हिस्से की बारिश से अब तक वंचित है. पूर्वी यूपी में काफी कम बारिश हुई है, जो फसलों के लिए नुकसानदायक है. खासतौर पर धान की खेती के लिए पर्याप्त पानी की ज़रूरत होती है. 

अच्छी बारिश का इंतजार
पंजाब भी कम बारिश का सामना कर रहा है. देश में उत्पादित अनाज में लगभग 12% हिस्सेदारी पंजाब की होती है. यहां गेहूं के साथ-साथ धान, कपास, गन्ना, बाजरा, मक्का, जौ आदि की भी खेती होती है. पंजाब अपने फल-सब्जियों की पैदावार के लिए भी प्रसिद्ध है. जाहिर है ऐसे में पर्याप्त बारिश के अभाव में फसलें प्रभावित होने का खतरा बना रहेगा. इसी तरह, बिहार सब्जियों का चौथा सबसे बड़ा उत्पादक राज्य है. यहां आलू , प्याज , बैंगन और फूलगोभी की अच्छी पैदावार होती है. झारखंड में भी चावल की खूब खेती होती है. इन सब पर कम बारिश ने संकट खड़ा कर दिया है. 

ज्यादा बारिश से बुरे हाल
दूसरी तरफ, केरल और हिमाचल के लिए बारिश आफत बन गई है. केरल के वायनाड में बारिश ने तबाही मचाई है. हिमाचल प्रदेश के कुल्लू, मंडी और शिमला में तीन जगहों पर बादल फटने से हालात खराब हो गए हैं. केरल में कई तरह की फसलों की खेती होती है, लेकिन राज्य के लिए सबसे आवश्यक फसल धान है. केरल के विशाल क्षेत्र में धान की 600 किस्में उगाई जाती हैं. बेशक धान यानी चावल के लिए पानी ज्यादा चाहिए, लेकिन उतना भी नहीं जितना केरल में बरस रहा है. जिस वायनाड में कहर मचा है, वहां भी चावल के साथ-साथ  कॉफ़ी, चाय, कोको, काली मिर्च, केला, वेनिला, नारियल, इलायची, चाय और अदरक का काफी उत्पादन होता है. ऐसे में आने वाले समय में इनकी कीमतों में ज़बरदस्त इजाफा संभव है.

और लाल होगा टमाटर
हिमाचल की फल और सब्जियां देश के अधिकांश इलाकों तक पहुंचती हैं. खासतौर पर यहां के टमाटर की 'लाली' सबको आकर्षित करती है, लेकिन भारी बारिश ने टमाटर की फसलों को नुकसान पहुंचाया है. इसके अलावा,  हिमाचल के कई हिस्सों में सड़कें भी बह गई हैं, जिसने आपूर्ति श्रृंखला को बाधित किया है. ऐसे में आने वाले दिनों में टमाटर के दाम रॉकेट की तरह भाग सकते हैं. इस समय दिल्ली-NCR में टमाटर की कीमत 60-70 रुपए प्रति किलो है. मगर हिमाचल में बारिश से हुए नुकसान के चलते यह 100 रुपए के आंकड़े को अगले कुछ दिनों में ही पार कर सकती है. गौरतलब है कि पिछले साल भी भारी बारिश के चलते टमाटर की कीमतें असमान पर पहुंच गई थीं. 

पहले गर्मी ने मारा, अब बारिश
इससे पहले, भीषण गर्मी के चलते महंगाई का चक्का काफी तेजी से घूम चुका है. फल-सब्जियों से लेकर अनाज तक के दामों में भारी बढ़ोत्तरी हुई है. ऐसे में अब असंतुलित बारिश की वजह से हालात और खराब हो सकते हैं. कुल मिलाकर आने वाला समय आम आदमी के लिए मुश्किलों की सुनामी लेकर आएगा. खाने-पीने पर उसके खर्चों में पहले से ज्यादा इजाफा हो सकता है.


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