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Explainer: रुपये पर निर्मला सीतारमण का बयान, कितनी हकीकत, कितना फसाना?
इसी साल जुलाई में ये बात खुद लोकसभा में मानी थी कि दिसंबर 2014 से लेकर अबतक रुपया 25 परसेंट तक कमजोर हो चुका है.
बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 3 years ago
नई दिल्ली: "Rupee is not sliding, dollar is strengthening" यानी रुपया नहीं गिर रहा है, डॉलर मजबूत हो रहा है. IMF और वर्ल्ड बैंक की सालाना आम बैठक के बाद वित्त मंत्री का ये बयान ऐसा वायरल हुआ कि सोशल मीडिया पर मीम की बाढ़ सी आ गई. टीवी चैनलों पर जिसको इकोनॉमिक्स और करेंसी मार्केट का धेला भर का भी पता नहीं, वो भी रुपये और डॉलर पर ज्ञान बघारता दिखा.
ऐसे में हमारे लिये ये समझना जरूरी है कि क्या निर्मला ताई का ये बयान इतना ऊटपटांग है और उन्होंने ये बिना सोचे समझे बस ऐसे ही बोल दिया. कुछ तो लॉजिक जरूर होगा इसके पीछे. वो देश की वित्त मंत्री हैं, उनका तो KRA ही है देश की अर्थव्यवस्था को संभालना. उनकी टीम में इकोनॉमी की समझ रखने वाले एक से एक धुरंधर हैं, तो क्या ये बयान देने से पहले एक बार भी नहीं सोचा होगा कि वो उनसे पूछ ही लें कि, वो क्या बोलें और क्या नहीं.
वित्त मंत्री के बयान का मतलब
निर्मला सीतारण का बयान - रुपया नहीं गिर रहा है, डॉलर मजबूत हो रहा है. इस बयान को अगर सतही रूप से देखेंगे तो आप भी गच्चा खा जाएंगे कि ये क्या बात हुई, रुपया कमजोर हो रहा है तभी तो डॉलर मजबूत हो रहा है. जी नहीं ऐसा बिल्कुल नहीं है. निर्मला सीतारमण का ये बयान जिसका इतना मजाक बनाया जा रहा है, तकनीकी रूप से बिल्कुल सही है, लेकिन ये सच भी पूरा सच नहीं है, यानी इस एक लाइन के बयान में वित्तमंत्री ने बड़े स्मार्ट तरीके से रुपये को बचाकर सारा ठीकरा डॉलर पर डाल दिया है, वित्त मंत्री ने बड़ी चालाकी से जितना बताया, उससे कहीं ज्यादा वो छिपा ले गईं. अब वो क्या छिपा ले गईं और जो बताया वो कितना सच है, जरा इसे समझते हैं
डॉलर मजबूत हुआ, ये सच है
डॉलर मजबूत हुआ है, इसमें कोई दो राय नहीं है. आज की तारीख में डॉलर के सामने दुनिया की सारी करेंसीज ने घुटने टेक रखे हैं. इस वक्त डॉलर इंडेक्स 112 के लेवल पर है. यानी दुनिया की 6 बड़ी करेंसीज के मुकाबले 12-14 परसेंट तक मजबूत है, एक साल पहले अक्टूबर 2021 में डॉलर इंडेक्स 98 के स्तर पर था. इसके मुकाबले अब दुनिया की करेंसीज का हाल देखिये. जापान की करेंसी साल भर में 22 परसेंट टूटी है और 32 साल के सबसे कमजोर लेवल पर पहुंच चुकी है. जहां तक ब्रिटिश पाउंड की बात है, जो कभी डॉलर से हमेशा ऊपर ही रहा, पिछले दिनों इतना कमजोर हुआ कि डॉलर के बराबर हो गया. हालांकि पिछले 70 सालों का चार्ट देखा जाए तो डॉलर के मुकाबले पाउंड धीरे धीरे ही सही, कमजोर हुआ है.
साल 2014 में डॉलर का हाल
एक नजर डॉलर इंडेक्स के इतिहास पर डालिये तो तस्वीर साफ होगी है. हम साल 2014 में चलते हैं, जहां से सारा किस्सा शुरू हुआ. उस वक्त भी डॉलर के मुकाबले दुनिया भर की करेंसीज कमजोर रही थीं. यूरो और जापान की करेंसी येन दोनों ही 12 परसेंट कमजोर थे. साल 2014 के दौरान भी निवेशक उभरती हुई अर्थव्यवस्थाओं से पैसा निकालकर डॉलर की ओर मुड़ रहे थे. 2014 के आखिरी हफ्ते में डॉलर इंडेक्स ने 9 साल की सबसे बड़ी ऊंचाई को छुआ था, उस समय भी साल भर में डॉलर इंडेक्स 13 परसेंट मजबूत हुआ था. कच्चे तेल की कीमतों में कमजोरी ने डॉलर को और मजबूत करने का काम किया था. उस दौरान भी दुनिया की अर्थव्यवस्थाओं की मुद्राएं चरमराने लगीं थी, नॉर्वे की करेंसी क्रोन 2014 में सबसे खराब प्रदर्शन करने वाली करेंसी रही, जो 19 परसेंट तक टूट गई. इसके अलावा चीन की करेंसी युआन और स्विस फ्रैंक का साल 2014 के दौरान प्रदर्शन निगेटिव ही रहा था. इस दौरान डॉलर इंडेक्स साल 2014 में 89-90 के बीच में था. जो कि अब 112 के पार पहुंच चुका है. यानी इन 8 सालों में डॉलर इंडेक्स 22 परसेंट से ज्यादा मजबूत हो चुका है.
मोदी सरकार में 8 साल में रुपया
अब इस सीन में भारत को डाल दीजिए, सवाल उठता है जब साल 2014 में भी पूरी दुनिया की करेंसीज की हालत खराब थी, तब रुपया कहां था. मोदी सरकार ने साल 2014 में देश की कमान संभाली थी, उनको सत्ता में आए 8 साल से ज्यादा का वक्त हो चुका है. 26 मई 2014 को जब नरेंद्र मोदी ने प्रधानमंत्री पद की शपथ ली थी, तब डॉलर के मुकाबले रुपया 58.62 के स्तर पर था. जो कि अब टूटकर 82 के स्तर से भी नीचे जा चुका है. आपको याद होगा कि जब मोदी सरकार सत्ता में नहीं थी, तब रुपये की गिरावट को लेकर निर्मला सीतारमण ने खुद प्रेस कॉन्फ्रेंस करके मनमोहन सरकार को घेरा था. जबकि उस वक्त भी सच यही था कि दुनिया भर की करेंसीज कमजोर हो रही थीं और डॉलर मजबूत हो रहा था. उस वक्त मनमोहन सरकार भी यही तर्क देती कि रुपया कमजोर नहीं हो रहा है, बल्कि डॉलर मजबूत हो रहा है, तो क्या निर्मला सीतारमण उसे मानतीं.
ये कोई छिपाने वाली बात नहीं है, सरकार ने इसी साल जुलाई में ये बात खुद लोकसभा में मानी थी कि दिसंबर 2014 से लेकर अबतक रुपया 25 परसेंट तक कमजोर हो चुका है. RBI के डेटा का हवाला देते हुए सरकार ने खुद ये बात बताई थी कि 31 दिसंबर 2014 को 63.33 के स्तर से डॉलर के मुकाबले रुपया 11 जुलाई, 2022 को 79.41 पर आ गया है. जो लोग ये सोच रहे हैं कि निर्मला सीतारमण ने गलत बयानबाजी की है, ये पूरा सच नहीं है, और जो लोग इस बात से इत्तेफाक रखते हैं कि उन्होंने जो बयान दिया है वो सही है, ये भी ठीक नहीं है. मामला 50:50 का ज्यादा लगता है, मतलब आधी हकीकत आधा फसाना. इसलिये इस बात का मुगालता मत पालिये कि निर्मला ताई का बयान बेतुका है, बल्कि नपा-तुला है. अब आपको तय करना है कि कैसे नापा गया है और कैसे तौला गया है.
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