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11 साल बाद यूरोप ने ब्याज दरें बढ़ाकर चौंकाया, उम्मीद से कहीं ज्यादा बढ़ा दी दरें

ECB ने आखिरी बार ब्याज दरों में बढ़ोतरी 2011 में की थी, जबकि साल 2014 से ही दरें निगेटिव हैं. ECB का कहना है कि ब्याज दरों में ये बढ़ोतरी आगे भी जारी रह सकती है.

बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 4 years ago

नई दिल्ली: 11 साल बाद आखिरकार यूरोप ने भी ब्याज दरों में इजाफा कर दिया है. यूरोपियन सेंट्रल बैंक ECB ने पॉलिसी रेट्स में 50 बेसिस प्वाइंट का इजाफा करके सबको चौंका दिया है, क्योंकि इसके पहले तक केंद्रीय बैंक ने 25 बेसिस प्वाइंट का इजाफा करने का ही संकेत दिया था. ECB के इस कदम से साफ है कि वो महंगाई को रोकने के लिए कदम बढ़ा चुका है और दुनिया के बाकी देशों के साथ कदमताल करने को तैयार है. अमेरिका और भारत भी महंगाई को काबू करने के लिए लगातार ब्याज दरें बढ़ा रहे हैं और आगे भी बढ़ाएंगे. 

आगे भी बढ़ेंगी ब्याज दरें 
इस बढ़ोतरी के बाद डिपॉजिट की ब्याज दर अब माइनस 0.5% से 0% हो गई है. ECB ने आखिरी बार ब्याज दरों में बढ़ोतरी 2011 में की थी, जबकि साल 2014 से ही दरें निगेटिव हैं. ECB का कहना है कि ब्याज दरों में ये बढ़ोतरी आगे भी जारी रह सकती है, उनकी अगली बैठक 8 सितंबर को है, यानी इसमें भी ब्याज दरें बढ़ाने का ऐलान किया जा सकता है. ब्याज दरों में बढ़ोतरी के फैसले की आलोचना होने के बाद ECB का कहना है कि ब्याज दरों में बढ़ोतरी बिल्कुल जायज है. बैंकों में अब ब्याज दर बढ़ेगी जो अबतक नकारात्मक थी. 

उम्मीद से ज्यादा क्यों बढ़ी ब्याज दर
पूरी दुनिया के एक्सपर्ट्स अनुमान लगा रहे थे और खुद ECB भी यही संकेत दे रहा था कि ब्याज दरों में 0.25 परसेंट का इजाफा होगा, लेकिन अचानक ही 0.50 परसेंट का इजाफा करने का फैसला क्यों किया गया. इस पर स्रोत बताते हैं कि मीटिंग से ठीक पहले इसे 0.50 परसेंट कर दिया गया क्योंकि ये उन्हें ऐसा लगा कि आगे भी महंगाई को लेकर आउटलुक कुछ ज्यादा अच्छा नहीं है. अभी महंगाई पहले से ही डबल डिजिट की ओर बढ़ रही है, ये 8.6 परसेंट पर है. ऐसे में इसके ECB के 2 परसेंट के लक्ष्य से आगे निकल जाने का खतरा है. आगे आने वाली सर्दियों में गैस की कीमतों में इजाफा होगा. ECB अध्यक्ष क्रिस्टीन लेगार्ड ने संवाददाता सम्मेलन में कहा कि आर्थिक गतिविधियां धीमी हो रही हैं. रूस का यूक्रेन पर हमले का असर ग्रोथ पर पड़ा है. उन्होंने कहा कि ऊंची महंगाई से खरीद शक्ति पर बुरा असर पड़ा है, साथ ही सप्लाई के लेवल पर कई दिक्कतें आने से अर्थव्यवस्था पर बुरा प्रभाव हुआ है. इन सब वजहों के चलते साल 2022 की दूसरी छमाही और आगे के अनुमान बेहतर नहीं लग रहे हैं. 

ब्याज दरें बढ़ने का असर 
ECB के ब्याज दरें बढ़ाने का सबसे ज्यादा असर यूरो पर हुआ है. डॉलर के मुकाबले 20 साल के निचले स्तर पर फिसलने के बाद यूरो में मजबूती आती दिखी है. यूरो ऐलान के तुरंत बाद $1.0278 के लेवल तक चढ़ गया. बाजार अब सितंबर में भी 50 बेसिस प्वाइंट के इजाफे का अनुमान लगाकर चल रहा है. हालांकि ECB ने कहा है कि वो ब्याज दरें बढ़ाने का फैसला मीटिंग - दर - मीटिंग करेंगे. 

VIDEO: किस बैंक में FD पर मिल रहा कितना इंटरेस्ट? जानिए सबसे ज्यादा कौन दे रहा?


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