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रुपया कमजोर या डॉलर मजबूत, सच या कहानी? जानिए आंकड़ों की जुबानी
बीते 1 साल के दौरान, रूस यूक्रेन जंग की वजह से, तेल और गैस की कीमतों में जोरदार तेजी आई, जिससे भारत का इंपोर्ट बिल बढ़ा.
बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 3 years ago
नई दिल्ली: अगर किसी को भी इकोनॉमिक्स की थोड़ी सी भी जानकारी होगी तो इस सवाल का जवाब उसके लिए जानना मुश्किल नहीं. लेकिन भारत में जितने मुंह उतनी बातें. इस पर ज्ञान देने से अच्छा है सिर्फ आंकड़ों पर ही नजर डाल लें तो तस्वीर अपने आप साफ हो जाएगी, न किसी और से कुछ सुनने को बाकी रह जाएगा और न कुछ कहने को.
पूरी दुनिया में 200 से ज्यादा देश हैं, सबकी अपनी अपनी मुद्राएं हैं, ये सभी मुद्राएं दूसरे देशों की मुद्राओं के साथ एक एक्सचेंज रेट के साथ चलती हैं. ये एक्सचेंज रेट करेंसी की सप्लाई और डिमांड पर निर्भर करता है.
अब सवाल - क्या डॉलर मजबूत हो रहा है या रुपया कमजोर हो रहा है?
1 साल के दौरान डॉलर और रुपये के प्रदर्शन पर नजर डालिए
Oct 2021 : 1 USD = Rs 75
Oct 2022 : 1 USD = Rs 82
अब सवाल है कि ये डॉलर के अच्छे प्रदर्शन की वजह से है या फिर रुपये के खराब प्रदर्शन की वजह से ? अब इस सवाल का जवाब सिर्फ इकलौते एक कर्व से तो पाया नहीं जा सकता है. इसके लिए हमें कुछ चीजों पर ध्यान देना होगा
1 रुपया दुनिया की बाकी मुख्य करेंसीज के मुकाबले कैसा प्रदर्शन कर रहा है
2. दुनिया की मुख्य करेंसीज डॉलर के मुकाबले कैसा प्रदर्शन कर रही हैं
अगर रुपया दुनिया की बाकी मुख्य मुद्राओं के खिलाफ भी गिर रहा है तो हम कह सकते हैं कि रुपया कमजोर हो रहा है
अगर दुनिया की बाकी मुद्राएं भी डॉलर के खिलाफ गिर रही हैं तो हम कह सकते हैं कि डॉलर मजबूत हो रहा है.
ब्रिटिश पाउंड, यूरो और जापानी येन दुनिया की मुख्य मुद्राएं हैं.
1 साल के दौरान रुपये और पाउंड का हाल
Oct 2021 - 1 GBP = Rs 104
Oct 2022 - 1 GBP = Rs 92
यानी बीते 1 साल के दौरान ब्रिटिश पाउंड के मुकाबले रुपया मजबूत हुआ है
1 साल के दौरान रुपये और यूरो का हाल
Oct 2021: 1 Euro = Rs 88
Oct 2022: 1 Euro = Rs 82
यानी बीते 1 साल के दौरान रुपया यूरो के खिलाफ भी मजबूत हुआ है
1 साल के दौरान रुपये और येन का हाल
Oct 2021 : 1 Yen = 0.65 Rs
Oct 2022 : 1 Yen = 0.55 Rs
यानी बीते 1 साल के दौरान येन के मुकाबले भी रुपया मजबूत हुआ है
बीते 1 साल के दौरान डॉलर के मुकाबले रुपया जरूर गिरा है, लेकिन बाकी मुख्य करेंसीज के मुकाबले मजबूत हुआ है. इससे साफ होता है कि रुपया नहीं गिर रहा है.
अब इन करेंसीज का प्रदर्शन डॉलर के मुकाबले कैसा रहा है, जरा इस पर एक नजर डालते हैं. इसके लिए हमें डॉलर इंडेक्स को देखना होगा. ये एक बास्केट होता है जिसमें 6 करेंसीज होती हैं, जिसमें पाउंड, यूरो, येन शामिल हैं. इसमें ये देखा जाता है कि ये सभी करेंसी डॉलर के मुकाबले कैसा प्रदर्शन कर रही हैं.
Oct 2021: डॉलर इंडेक्स = 93
Oct 2022: डॉलर इंडेक्स = 112
इससे साबित हो जाता है कि रुपया नहीं गिर रहा है, बल्कि डॉलर मजबूत हो रहा है. रुपया तो डॉलर से बहादुरी के साथ लड़ रहा है और बाकी करेंसीज के मुकाबले बेहतर प्रदर्शन कर रहा है, जिसकी जरूर तारीफ होनी चाहिए.
अब इसके पीछे वजह क्या है
कुल इंपोर्ट में से पेट्रोल इंपोर्ट का हिस्सा 30-40% है
बीते 1 साल के दौरान, रूस यूक्रेन जंग की वजह से, तेल और गैस की कीमतों में जोरदार तेजी आई, जिससे भारत का इंपोर्ट बिल बढ़ा. अब चूंकि तेल की ट्रेडिंग डॉलर में होती है. इंपोर्ट बढ़ने और एक्सपोर्ट घटने का मतलब हुआ कि डॉलर की डिमांड बढ़ेगी और रुपये की घटेगी. इन सब निगेटिव परिस्थितियों के बावजूद, दूसरी करेंसीज के मुकाबले रुपया बेहतर प्रदर्शन कर रहा है.
अब जानते हैं कि डॉलर में इतनी तेजी आ क्यों रही है. फरवरी 2022 में अमेरिकी फेडरल रिजर्व की ब्याज दरें 0 परसेंट थीं, जो अब बढ़कर 3.5 परसेंट हो गई हैं. अब इसको समझिये, अमेरिकी बैंकों को अमेरिकी फेडरल रिजर्व के साथ रोजाना आधार पर एक तय राशि को मेनटेन करना पड़ता है. वो दूसरे बैंकों से लगातार लोन लेते रहते हैं, जिस रेट पर लोन लिया जाता है उसे फेड इंटरेस्ट रेट कहते हैं. जब फेड ब्याज दरों को बढ़ाता है तो दुनिया में जितने भी निवेशक हैं, वो अपना निवेश निकालकर यूएस फेड बैंक में डाल देते हैं. क्योंकि संकट की परिस्थितियों में ये सबसे सुरक्षित निवेश माना जाता है. फेड बैंक में निवेश सिर्फ डॉलर में किया जा सकता है, यानी इसके लिए आपको डॉलर चाहिये. डॉलर की डिमांड बढ़ने से इसकी कीमतें बढ़ने लगती हैं, और यही चीज बीते 6 महीने में हुई है.
फेड महंगाई को काबू करने के लिए ब्याज दरें बढ़ाईं, जैसे ही ब्याज दरें बढ़ाईं, लोगों ने खर्च करने की बजाय निवेश करना शुरू कर दिया. मार्केट में पैसों का सर्कुलेशन घट जाता है. जिससे डिमांड कम हो जाती है और कीमतें कम होने लगती हैं. ब्याज दरें बढ़ने से डॉलर की डिमांड बढ़ जाती है, ऐसे में डॉलर बाकी करेंसीज के मुकाबले मजबूत हो जाता है.
तो अंतिम नतीजा यही है कि डॉलर मजबूत हो रहा है, रुपया कमजोर नहीं हो रहा है. लेकिन ऐसा भी नहीं है कि रुपया कभी कमजोर नहीं हुआ. साल 2008-14 के दौरान रुपया कमजोर हुआ था. बीते 40 सालों के दौरान फेड रेट पर नजर डालिये. 2010-14 के दौरान फेड की दरें 0 परसेंट थीं.
अब देखिये बीते 40 सालों में डॉलर इंडेक्स क्या था. 2001-03 और 2022, ये वो समय था जब डॉलर बहुत मजबूत रहा है. 2008-14 वो समय था जब डॉलर दुनिया की 6 मुख्य करेंसीज के मुकाबले कमजोर रहा है.
2008 -2014 के दौरान रुपये और डॉलर का प्रदर्शन देखिए
2008 : 1 USD = Rs 40
2014 : 1 USD = Rs 63
जब डॉलर कमजोर था, तब भी फेड की दरें 0 परसेंट थीं, उस दौरान भी रुपया गिरता रहा और 50 परसेंट के करीब टूटा. इसे कहते हैं रुपये का गिरना. इसलिये आंकड़े आपके सामने हैं, ये तय करने के लिए कि रुपया गिरा नहीं है जैसा कि बताया और समझाया जा रहा है.
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