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दुनिया में सबसे ज्यादा इस देश में बिकती हैं इलेक्ट्रिक कारें, जानें कैसे बना वर्ल्ड लीडर

फ्यूल की बढ़ती कीमतें और पर्यावरण संरक्षण को ध्यान में रखते हुए इलेक्ट्रिक वाहनों की बिक्री में पिछले कुछ सालों में तेजी आई है.

बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 3 years ago

बीते कुछ वक्त में भारत में इलेक्ट्रिक वाहनों (EV) के बिक्री में तेजी आई है. इसकी सबसे बड़ी वजह है पेट्रोल-डीजल के आसमान छूते दाम. महंगाई के दौर में लोग ईंधन पर होने वाले खर्चे को सीमित करना चाहते हैं, इसलिए वह EV का रुख कर रहे हैं. हालांकि, इस मामले में भारत अभी भी कई देशों से पीछे है. हमारा पड़ोसी चीन दुनिया का सबसे बड़ा इलेक्ट्रिक कार मार्केट है.

कुल बिक्री में EV की हिस्सेदारी
एक रिपोर्ट के अनुसार, दुनिया का सबसे बड़ा EV मैन्युफैक्चरर भी चीन ही है. न्यूयॉर्क टाइम्स की रिपोर्ट बताती है कि इस साल दुनिया में जितनी भी EV बिकेंगी, उनसे ज्यादा अकेले चीन में बिकने की उम्मीद है. इससे अंदाजा लगाया जा सकता है कि चीन EV के बाजार को बढ़ाने को लेकर कितना गंभीर है. अमेरिका में नई कारों की कुल बिक्री में EV की हिस्सेदारी 5% है. जबकि चीन इस आंकड़े को 2018 में ही पार कर चुका है. भारत की बात करें, तो वित्त वर्ष 2021-22 में इलेक्ट्रिक कार की बिक्री कुल कार बिक्री का महज 0.7% रही.

आधे टॉप ब्रांड चीनी
चीन दुनिया का सबसे बड़ा EV मार्केट है. उसकी कई कंपनियां इस सेक्टर में तेजी से ग्रोथ कर रही हैं. दुनिया के टॉप-10 सबसे ज्यादा बिकने वाले EV ब्रांड में से आधे चीनी हैं. फिलहाल 300 से ज्यादा चीनी कंपनियां EV बना रही हैं. चीन की इलेक्ट्रिक व्हीकल कंपनी SAIC और बिल्ड योज ड्रीम्स (BYD) ग्लोबल मार्केट शेयर में केवल एलन मस्क की टेस्ला से पीछे हैं. चीन की सरकार कंपनियों को ज्यादा से ज्यादा इलेक्ट्रिक कारें बनाने और लोगों को उन्हें खरीदने के लिए प्रमोट कर रही है. इसलिए सब्सिडी पर भी अच्छी-खासी रकम खर्च करती है.

US तीसरे नंबर पर
पिछले साल सबसे ज्यादा इलेक्ट्रिक वाहन बेचने वाले देशों की बात करें, तो चीन 3,519,054 यूनिट की बिक्री के साथ पहले स्थान पर है. इसके बाद जर्मनी है, जहां पिछले साल 695,657 EV बेची गईं. फिर अमेरिका (631,152 यूनिट) फ्रांस, यूके, नार्वे और इटली का नंबर आता है. बात केवल EV की ही नहीं है, उसमें लगनी वाली बैटरी के मामले में भी चीन काफी आगे है. चीनी बैटरी मैन्युफैक्चरर CATL और BYD इंडस्ट्री में सबसे बड़े प्लेयर्स माने जाते हैं.

आखिर चीन ने क्या किया? 
यहां यह सवाल भी लाजमी है कि आखिर चीन में EV का बाजार इतना बड़ा कैसे हो गया है? इसका जवाब है, सही प्लानिंग और इम्पेलिमेंटशन. चीन ने काफी पहले ही सोच लिया था कि उसे इलेक्ट्रिक मार्केट में वर्ल्ड लीडर बनना है और उसी के अनुरूप उसने अपनी योजनाओं को परवान चढ़ाया. भारत जैसे देश में EV को चार्ज करना फिलहाल बड़ी समस्या है. सरकार इस दिशा में काम कर रही है, लेकिन स्पीड धीमी है. वहीं, चीन में लगभग 1.15 मिलियन पब्लिक चार्जिंग स्टेशन हैं और इनकी संख्या लगातार बढ़ रही है. इसके अलावा, EV की कॉस्ट कम करने के लिए उसने एंडवांस्ड टेक्नोलॉजी विकसित की और सब्सिडी पर फोकस किया. सेल्स की करीब 33% सब्सिडी ऑटो कंपनी, सप्लायर और कंज्यूमर तीनों को दी गई. इस तरह, उसने लोगों को EV खरीदने और निर्माताओं को ज्यादा से ज्यादा इलेक्ट्रिक वाहन बनाने के लिए प्रेरित किया.


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