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10 नवंबर को रिटायर होंगे चीफ जस्टिस, जानिए उनकी उपलब्धियां, ऐतिहासिक फैसले सबकुछ

CJI ने व्यक्तिगत स्वतंत्रता, महिला अधिकार और लैंगिक समानता तथा दिव्यांगों के अधिकारों को बरकरार रखते हुए कई ऐतिहासिक फैसले दिए.

बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 1 year ago

चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया (CJI) डॉ. धनंजय यशवंत चंद्रचूड़ 10 नवंबर को रिटायर हो जाएंगे. सीजेआई के दो सालों की उपलब्धियों पर गौर किया जाए तो वे एक ऐसे व्यक्ति हैं जिन्होंने न्यायिक या प्रशासनिक पक्ष में सूचना प्रौद्योगिकी का उपयोग करके भारतीय न्यायपालिका को पूरी तरह से बदलने के मिशन को सफलतापूर्वक शुरू किया. साथ ही सभी स्तरों पर अदालतों को अधिक सुलभ, समावेशी बनाकर नागरिक-केंद्रित सेवाएं प्रदान करने की कोशिश की. 

चंद्रचूड़ ने दिए ये अहम फैसले

CJI का यह कार्यकाल असाधरण रहा, क्योंकि इस दौरान कई महत्वपूर्ण पहल की शुरुआत हुई, जिनमें न्याय और दक्षता तक पहुंच में सुधार के लिए अत्याधुनिक प्रौद्योगिकी को अपनाना शामिल रहा. इस दौरान व्यक्तिगत स्वतंत्रता, महिला अधिकार और लैंगिक समानता तथा दिव्यांगों के अधिकारों को बरकरार रखते हुए कई ऐतिहासिक फैसले दिए.

मुख्य न्यायाधीश बनने से पहले जस्टिस चंद्रचूड़ ने जो फैसले सुनाए थे, उनसे उम्मीदें बहुत बढ़ गई थीं. लेकिन सीजेआई के रूप में उनसे कई लोग निराश हुए, कुछ ऐसे मामले थे जिन्हें उन्होंने अनदेखा कर दिया, और अदालत के बाहर उनका आचरण और बयान भी इसमें अहम हैं. सबसे पहले, आइए उन फैसलों पर नजर डालते हैं, जिन्होंने जस्टिस चंद्रचूड़ को उदारवादियों का पसंदीदा बना दिया:

1.    ADM जबलपुर मामला- जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ उस पीठ का हिस्सा थे जिसने 1976 में उनके पिता वाईवी चंद्रचूड़ वाली पीठ की ओर से सुनाए गए एक फैसले को पलट दिया था. 1976 का फैसला, जो ADM जबलपुर मामले के नाम से मशहूर है. इसमें आपातकाल के दौरान गिरफ्तार किए गए लोगों को न्यायिक मदद लेने से रोक दिया था. अगस्त 2017 में, नौ जजों की एक पीठ ने 1976 के फैसले को 'गंभीर रूप से त्रुटिपूर्ण' बताते हुए पलट दिया. जस्टिस चंद्रचूड़ ने लिखा, 'जीवन और व्यक्तिगत स्वतंत्रता मानव अस्तित्व के लिए अपरिहार्य हैं. वे प्राकृतिक कानून के तहत अधिकार बनाते हैं.'

2.    एडल्ट्री कानून- जस्टिस चंद्रचूड़ उस पीठ का हिस्सा थे जिसने एडल्ट्री पर भारतीय दंड संहिता की धारा 497 को यह कहते हुए रद्द कर दिया था कि एक महिला को उसके पति की 'संपत्ति' नहीं माना जा सकता है. धारा 497 में व्यभिचार को 'किसी व्यक्ति की पत्नी के साथ उसकी सहमति या जानकारी के बिना यौन संबंध बनाना' के रूप में परिभाषित किया गया है. हालांकि, महिलाओं को इस धारा के तहत मुकदमा चलाने से छूट दी गई थी.

3.    समलैंगिकता- दो वयस्कों के बीच समलैंगिक गतिविधि को अपराध की श्रेणी से बाहर करने के अपने फैसले में, जस्टिस चंद्रचूड़ ने कहा कि यह प्रावधान एक ' पुराना और औपनिवेशिक कानून' था जो लोगों के जीवन और निजता के मौलिक अधिकारों का उल्लंघन करता है.

4.    लव जिहाद- जस्टिस चंद्रचूड़ उस पीठ का हिस्सा थे जिसने 'लव जिहाद' मामले में हाईकोर्ट के फैसले को पलट दिया था. हाईकोर्ट ने मामले की जांच राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) को सौंप दी थी. उन्होंने फैसला सुनाते हुए कहा कि एक महिला अपना जीवन कैसे जीना चाहती है यह पूरी तरह से उसके अपने फैसले की बात है.'

5.    आधार कार्ड- आधार अधिनियम मामले में उनके एकमात्र असहमतिपूर्ण फैसले ने इस एक्ट को पूरी तरह से यह कहते हुए रद्द कर दिया कि 2009 से आधार कार्यक्रम संवैधानिक खामियों और मौलिक अधिकारों के उल्लंघन से ग्रस्त है. 

6.    भीमा-कोरेगांव हिंसा- भीमा-कोरेगांव मामले में अपने एकमात्र असहमतिपूर्ण फैसले में, जस्टिस चंद्रचूड़ ने कहा था, 'न्यायिक घोषणाओं में बुलंद आदेशों का नागरिक के लिए कोई अर्थ नहीं हो सकता है जब तक कि मानव स्वतंत्रता की संवैधानिक तलाश उन व्यक्तियों के लिए न्याय हासिल करने में तब्दील न हो जाए जिनकी स्वतंत्रता खतरे में है.'

7.    मनी बिल्स पर दिए अहम फैसले- 2023 और 2024 के बीच तीन अलग-अलग मौकों पर, जस्टिस चंद्रचूड़ से अनुरोध किया गया कि वे मनी बिल्स के रूप में अत्यंत महत्वपूर्ण और दूरगामी कानून/संशोधन पारित करने वाली सरकार के मुद्दे पर फैसला करने के लिए सात न्यायाधीशों की एक पीठ का गठन करें. सरकार ने ऐसा राज्यसभा को दरकिनार करने के लिए किया, जहां उसके पास बहुमत नहीं था. इस शॉर्ट-कट का इस्तेमाल करके पारित किए गए कुछ बिलों में प्रीवेंशन मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट, इलेक्टोरल बॉन्ड योजना और आधार में संशोधन शामिल थे. हालांकि, CJI ने कहा कि वह इस मुद्दे पर फैसला करने के लिए पीठ का गठन करेंगे, लेकिन उन्होंने अभी तक पीठ को अधिसूचित नहीं किया है.

कुछ फैसलों पर उठे सवाल

सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश 'रोस्टर के मास्टर' भी होते हैं, इसका मतलब है कि वह अन्य जजों को मामले सौंपते हैं। पिछले साल दिसंबर में, तत्कालीन दूसरे मोस्ट सीनियर जज संजय किशन कौल ने पाया कि उनके केसों की लिस्ट से कुछ मामले हटा दिए गए हैं। उनसे छीने गए मामलों में से एक केस केंद्र सरकार की ओर से कॉलेजियम द्वारा रिकमेंड जजों की नियुक्तियों, पदोन्नति और ट्रांसफर पर कार्रवाई न करने के बारे में था।

मंदिर दौरे को लेकर बटोरी सुर्खियां

एक मुख्य न्यायाधीश के पास अपनी पसंद के पूजा स्थलों पर जाने का पूरा अधिकार है, यहां तक कि हाई ज्यूडिशियल अधिकारियों के लिए आचार संहिता में भी ऐसा कोई उल्लेख नहीं है जो उन्हें ऐसा करने से रोकता हो. लेकिन ये दौरे निजी प्रकृति के होने चाहिए या प्रचार के साथ, यह तय करना हर जज के विवेक पर निर्भर करता है, जस्टिस चंद्रचूड़ के मंदिर दौरे चर्चा का विषय बने रहे. उन्होंने अपने कार्यकाल में द्वारकाधीश मंदिर (गुजरात), राम मंदिर (अयोध्या), जगन्नाथ पुरी मंदिर (ओडिशा), पशुपतिनाथ मंदिर (नेपाल), और तिरुपति मंदिर (आंध्र प्रदेश) जैसे प्रसिद्ध मंदिरों के दर्शन किए, इन यात्राओं को लेकर काफी प्रचार भी हुआ.

गणेश पूजा में CJI के घर जब पहुंचे पीएम मोदी

इसके बाद, 10 दिवसीय गणेश उत्सव के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को CJI के आधिकारिक आवास पर गणपति आरती में शामिल होने के लिए आमंत्रित किया गया. एक बार फिर, कैमरों ने पीछा किया, जिस पर कई सियासी पार्टियों और नेताओं ने सवाल उठाए.
 


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