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अग्निपथ: सेना ने बताया क्यों ज़रूरी है जाति-धर्म पूछना
अग्निपथ भर्ती योजना में उम्मीदवारों से जाति और धर्म संबंधी प्रमाणपत्र मांगे जाने पर उठे सवालों के बीच सेना ने सफाई दी है.
बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 4 years ago
अग्निपथ भर्ती योजना में उम्मीदवारों से जाति और धर्म संबंधी प्रमाणपत्र मांगे जाने पर उठे सवालों के बीच सेना ने सफाई दी है. मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, सेना का कहना है कि इसमें कुछ भी नया नहीं है. आवश्यकता के आधार पर उम्मीदवारों से पहले भी ऐसे प्रमाणपत्र जमा कराए जाते रहे हैं. अधिकारियों के मुताबिक, शहीद होने वाले सैनिकों का धार्मिक अनुष्ठानों के तहत अंतिम संस्कार किया जाता है. ऐसे में उनके धर्म की जानकारी आवश्यक है.
तेजस्वी यादव ने बोला हमला
अग्निपथ योजना में उम्मीदवारों से जाति और धर्म प्रमाण पत्र मांगे जाने पर विपक्ष ने नाराज़गी जताई है. राजद नेता तेजस्वी यादव ने ट्वीट करके केंद्र सरकार और आरएसएस पर हमला बोला है. उन्होंने लिखा है, 'जात न पूछो साधु की, लेकिन जात पूछो फौजी की. संघ की BJP सरकार जातिगत जनगणना से दूर भागती है, लेकिन देश सेवा के लिए जान देने वाले अग्निवीर भाइयों से जाति पूछती है. ये जाति इसलिए पूछ रहे है क्योंकि देश का सबसे बड़ा जातिवादी संगठन RSS बाद में जाति के आधार पर अग्निवीरों की छंटनी करेगा'.
आरक्षण नहीं, तो प्रमाणपत्र क्यों?
तेजस्वी यादव ने आगे कहा कि आजादी के बाद 75 वर्षों तक सेना में ठेके पर अग्निपथ व्यवस्था लागू नहीं थी. सेना में भर्ती के बाद 75% सैनिकों की छंटनी नहीं होती थी, लेकिन संघ की जातिवादी सरकार अब जाति/धर्म देखकर 75% सैनिकों की छंटनी करेगी. उन्होंने सवाल किया कि सेना में जब आरक्षण है ही नहीं तो जाति प्रमाणपत्र की क्या जरूरत?
दावा: पहली बार ऐसा हो रहा है
वहीं, आम आदमी पार्टी के नेता संजय सिंह ने दावा किया कि देश के इतिहास में पहली बार सेना भर्ती में जाति पूछी जा रही है. उन्होंने ट्वीट में लिखा, 'मोदी सरकार का घटिया चेहरा देश के सामने आ चुका है. क्या मोदी जी दलितों/पिछड़ों/आदिवासियों को सेना भर्ती के काबिल नहीं मानते? भारत के इतिहास में पहली बार सेना भर्ती में जाति पूछी जा रही है. मोदी जी आपको अग्निवीर बनाना है या जातिवीर'.
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