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आपको ही तय करना है, कौन होगा आपकी कहानी का मुख्य किरदार

हम एक साथ इतनी सारी भूमिकाएं निभा रहे हैं, जो संभवतः शेक्सपियर की अपनी कविता से कहीं अधिक हैं, जो जीवन के सात चरणों के बारे में बात करती है.

बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 3 years ago

जो आपकी कहानी है ना – वो सिर्फ आपकी कहानी नहीं है, और ना ही वो आपकी पूरी कहानी है. तो फिर? फिर क्या, आप उस कहानी के महज एक किरदार हैं. हां, ये मुमकिन है आप बहुत सारी कहानियों के सहायक किरदार हों. जो भी आपकी कहानी है, उसमें आपका देश, आपका समाज, आपका परिवार, आपकी शिक्षा और आपके दोस्त भी उस कहानी में आपके साथी किरदार हैं.

ऐसा भी जरूरी नहीं
इसको समझने के लिए ये समझते हैं – क्या अभिषेक बच्चन की कहानी (सफल या असफल) उसकी खुद की कहानी है? जी नहीं. शायद उसकी कहानी का मुख्य किरदार उसके पिता अमिताभ बच्चन हैं. उसकी कहानी के दूसरे मुख्य किरदार शायद जया बच्चन या हरिवंश राय बच्चन हैं. इसमे कुछ बुरा भी नहीं है. हर बार, हर कहानी के मुख्य किरदार आप नहीं हो सकते. इसी के विपरीत धीरू भाई अम्बानी की कहानी के मुख्य किरदार वो खुद हैं और सचिन तेंदुलकर की कहानी का किरदार वो खुद ही हैं. 

कहानी में शोर होना चाहिए
कहानी का किरदार होना एक बात है, कहानी में शोर होना एक अलग बात है. वो कहानी एक सफल कहानी है ही नहीं जिसमे शोर ना हो, जिज्ञासा ना  हो, जो उत्साह से लबरेज ना हो और जिसमें सफलता की चाहत ही ना हो.  मैं आपको सिर्फ इतना सा कहना चाहता हूं कि आप ये तय कर सकते हैं कि आपकी कहानी के मुख्य किरदार कौन होंगे, कहानी कैसे शुरू होगी, कहानी कैसे खत्म होगी. आपको तय करना है कि कहानी में मध्यांतर आएगा भी कि नही. हां, मैं एक बात जरूर जानता हूं कि अगर आप ठान लें कि आप अपनी कहानी किसी दूसरे को नहीं लिखने देंगे, तो बहुत मुमकिन है कि आपकी कहानी एक सफल कहानी होगी.  

अपनी कहानी के मुख्य पात्र
अपनी-अपनी ऊचाइयों तक आपको खुद ही आना पड़ता है. अब चाहे वह आपका डर हो या आपकी निष्क्रियता जो आपको अपनी कहानी लिखने से रोक रही हो, आपको इसका लाभ उठाने की जरूरत है. हालांकि  दुनिया में ऐसी कई खूबसूरत कहानियां हैं जहां आप एक भूमिका निभा सकते हैं और नहीं भी, आप अपनी कहानी के मुख्य पात्र हैं. कम से कम, आपको होना तो चाहिए. मैंने अभिषेक बच्चन का जिक्र पहले किया तो था, लेकिन देखिये वह अपने परिवार और प्रशंसकों को गौरवान्वित करने के लिए दिन-रात कोशिश कर रहा है. वह दूसरों की नजरों में भी अपने जीवन की कहानी का मुख्य पात्र बनने की पूरी कोशिश कर रहा है. जब मैं कहता हूं कि कभी-कभी हम अपनी कहानी में एक सहायक भूमिका निभाते हैं, तो मैं इसके बारे में अन्य लोगों के दृष्टिकोण से बात करता हूं जिनकी कहानियां हमारी कहानी से इंटेरसेक्ट करती हैं. 

ये है जीवन का सबक 
हम एक साथ इतनी सारी भूमिकाएं निभा रहे हैं, जो संभवतः शेक्सपियर की अपनी कविता से कहीं अधिक हैं, जो जीवन के सात चरणों के बारे में बात करती है. इस पूरे संवाद का मुख्य उद्देश्य यह महसूस करना है कि हम मुख्य भूमिका और सहायक भूमिका की बात भी नहीं कर रहे हैं. हम अपनी कहानी के बारे में बात कर रहे हैं जिसमें शोर होना चाहिए और जिसमें शोर हम खुद ही डाल सकते हैं. हम सबकी अपनी कहानियां हैं. सवाल यह है कि उस कहानी में शोर कैसे डाला जाए. वैसे ऐसा करने के कई तरीके हैं, लेकिन सबसे अच्छा तरीका हमेशा हमें उस रास्ते से ले जाता है जिस पर अन्य लोग कम यात्रा करते हैं. जिस सड़क पर कम यात्रा की गई है, वह सिर्फ एक घिसी-पिटी बात नहीं है बल्कि एक जीवन सबक है जो आज के समय पर भी लागू होता है जब एंट्रेप्रेन्योरशिप और टेक्नोलॉजी राज कर रहे हैं.

 


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