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कैसे महाराष्ट्र की तरह बनता जा रहा है उत्तर प्रदेश?

बुनियादी ढांचे और दीर्घकालिक निवेश के महत्वपूर्ण क्षेत्रों में सरकार और निजी क्षेत्र के बीच प्रभावी भागीदारी से विकास में तेजी आएगी.

बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 3 years ago

  • विवेक शुक्ला, वरिष्ठ पत्रकार 

उत्तर प्रदेश को लेकर एक आम धारणा थी कि यहां राजनीतिक हस्तक्षेप और भ्रष्ट नौकरशाही के चलते कोई काम नहीं हो पाता. हालांकि यूपी अब अपनी इस छवि से बाहर निकल रहा है. यह ना केवल भारत में पसंदीदा निवेश स्थल के रूप में तेजी से उभर रहा है, बल्कि विभिन्न योजनाओं (प्रोजेक्ट) को भी तेजी से लागू कर रहा है. योजनाओं को लागू करने के मामले में महाराष्ट्र के बाद उत्तर प्रदेश दूसरे नंबर पर है. 

9.79 लाख करोड़ की योजनाएं
वित्तीय वर्ष 2022 में महाराष्ट्र में 17.31 लाख करोड रुपए के प्रोजेक्ट या तो लागू किए जा चुके हैं या कार्यान्वयन के अंतिम चरण में हैं. वहीं, यदि हम उत्तर प्रदेश की बात करें तो यह योजनाओं को लागू करने के मामले में दूसरे नंबर पर है. सेंटर फॉर मॉनिटरिंग इंडियन इकोनॉमी एंड केयरएज से प्राप्त आंकड़ों के अनुसार, उत्तर प्रदेश में 9.79 लाख करोड़ रुपए की योजनाएं या तो लागू की जा चुकी हैं या कार्यान्वयन के अंतिम चरण में हैं. इस सूची में ओडिशा (9.11 लाख करोड़) और गुजरात (8.95 लाख करोड़ रुपए) क्रमशः तीसरे और चौथे स्थान पर हैं. जबकि आंध्र प्रदेश पांचवें नंबर पर है. यहां 8.73 लाख करोड़ रुपए की योजनाएं लागू करने के अंतिम चरण में हैं. उत्तर प्रदेश में पिछले पांच वर्षों में 3 लाख करोड रुपये के निवेश संबंधी प्रस्ताव लागू किए गए.  

आश्चर्यचकित करती है यूपी की छलांग
यह स्पष्ट है कि महाराष्ट्र, गुजरात, कर्नाटक और आंध्र प्रदेश जैसे राज्य निवेशकों को आकर्षित करने के साथ ही योजनाओं को लागू भी कर रहे हैं. इस सूची में उत्तर प्रदेश का शामिल होना स्वागत और आश्चर्यचकित, दोनों करता है. आश्चर्य इसलिए कि कुछ साल पहले तक उत्तर प्रदेश निवेशकों को लुभाने और यह सुनिश्चित करने के लिए कि योजनाएं समय पर लागू की जाए, इस पर बमुश्किल ही ध्यान देता था. अब उत्तर प्रदेश की प्रकृति में एक बड़ा बदलाव आया है. निश्चित रूप से इस तरह के बदलाव से निवेशक प्रोत्साहित और खुश होते हैं कि अब उनके प्रोजेक्ट समय पर शुरू होंगे. इससे उन निवेशकों को भी प्रोत्साहन मिलता है तो निवेश की योजना बना रहे हैं.

इस तरह होगा फायदा
स्वाभाविक रूप से, योजनाओं को लागू करने में उत्तर प्रदेश का प्रदर्शन कम से कम कहने के लिए अभूतपूर्व है. उत्तर प्रदेश केवल महाराष्ट्र से पीछे है और परियोजनाओं के कार्यान्वयन के मामले में गुजरात, आंध्र प्रदेश, दिल्ली और कर्नाटक जैसे राज्यों से आगे है. यह कहना पर्याप्त होगा कि यह कारपोरेट क्षेत्र से निजी निवेश को आकर्षित करने में काफी मददगार साबित होगा. यह उच्च विकास दर और आर्थिक विकास के लिए भी महत्वपूर्ण है. अधिक निवेश प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष, दोनों तरह से रोजगार पैदा करके, खपत को बढ़ावा देकर और आगे के विकास को बढ़ाकर अर्थव्यवस्था में योगदान देते हैं.  खैर, समग्र रूप से भारत भर में बहुत उत्साहित करने वाला माहौल दिख रहा है. भारत के अधिकांश राज्य निवेश और निवेशकों की तलाश कर रहे हैं. 

वैश्विक कंपनियों को किया आकर्षित
हाल के दिनों में, हमने देखा है कि उत्तर प्रदेश, गुजरात, महाराष्ट्र और तेलंगाना ने वैश्विक इलेक्ट्रॉनिक कंपनियों को आकर्षित किया है. इनमें एप्पल, इंटेल, सैमसंग और एलजी की प्रतिनिधि कंपनियों के साथ-साथ फॉक्सकॉन और जाबिल जैसे कांट्रैक्टर और असेंबलर (संयोजनकर्ता) भी शामिल हैं. उत्तर प्रदेश और रियायतें देने का वादा कर रहा है - रियायती भूमि से लेकर जीएसटी पर छूट और पूंजी और ब्याज सब्सिडी तक. उत्तर प्रदेश स्पष्ट रूप से संभावित निवेशकों को ऐसे समय में लुभाने के लिए लगातार प्रयास कर रहा है जब आर्थिक गतिविधियों को गति देने के लिए निवेश की आवश्यकता है. भारत के विकास के लिए, राज्यों के बीच सहयोग और प्रतिस्पर्धा के बीच एक स्वस्थ संतुलन समय की आवश्यकता है. प्रधानमंत्री ने अपने स्वतंत्रता दिवस भाषण में भी 'सहकारी प्रतिस्पर्धी संघवाद' का आह्वान किया था. उच्च आर्थिक विकास हासिल करने और विकास के मापदंडों पर एक-दूसरे को मात देने के लिए राज्यों के बीच प्रतिस्पर्धा, भारत के लिए अच्छा है.

बढ़ेगी विकास की रफ्तार
बुनियादी ढांचे और दीर्घकालिक निवेश के महत्वपूर्ण क्षेत्रों में सरकार और निजी क्षेत्र के बीच प्रभावी भागीदारी से विकास में तेजी आएगी. चूंकि उत्तर प्रदेश विशाल आबादी वाला एक बड़ा राज्य है, इसलिए समग्र विकास के लिए इसे सभी क्षेत्रों से निवेश की आवश्यकता है. हालांकि, यह सभी राज्यों पर लागू होता है. उत्तर प्रदेश सरकार ने निजी निवेश को आकर्षित करने के लिए विभिन्न प्रारुपों की घोषणा की है, खासकर सड़क और राजमार्गों, हवाई अड्डों, औद्योगिक पार्कों और उच्च शिक्षा और कौशल विकास क्षेत्रों में. 10-12 फरवरी को लखनऊ में ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट (जीआईएस) का आयोजन होना है. यूपी ने शिखर सम्मेलन के माध्यम से 10 लाख करोड़ रुपए के निवेश का लक्ष्य रखा है. यह याद रखना जरूरी है कि कोई भी देश या राज्य तब बड़ी छलांग लगाता है जब नेतृत्व सक्रिय होकर इस दिशा में कार्य करता है. 

निवेशकों को लुभा रहे योगी
इस संबंध में, उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ निवेशकों को लुभाने की पूरी कोशिश कर रहे हैं. उन्होंने वैश्विक और घरेलू उद्योगों को उत्तर प्रदेश द्वारा प्रदान किए जा रहे बड़े अवसरों का लाभ उठाने का आह्वान किया है. ताकि समृद्ध और शक्तिशाली "न्यू इंडिया" बनाया जा सके. और अगर उत्तर प्रदेश सरकार बेहतरी के लिए बदली है, तो यह सही समय है कि राज्य के युवा नौकरी करने से परे सोचें. उन्हें एक उद्यमी बनने पर विचार करना चाहिए. उद्यमिता एक गतिशील वैश्विक बाजार में एक नए व्यापार विचार के जरिए जोखिम लेने, योजना बनाने, व्यवस्थित करने और लागू करने की सहज प्रवृत्ति है. उद्यमिता नौकरी की तलाश के बजाय नौकरी सृजन के लिए जानी जाती है. उद्यमी स्वतंत्र सोच वाले, नवोन्मेषी लोग होते हैं. उद्यमिता कठिन हो सकती है, लेकिन यह एक पुरस्कृत यात्रा है.

आगरा के रवीश पीपल की कहानी
आर्थिक उदारीकरण के बाद, हजारों युवाओं ने अपना उद्यम शुरू किया है और बहुत अच्छा कर रहे हैं. रवीश पीपल, आगरा के ऐसे ही एक युवा हैं. ताजमहल वाले शहर में उनके पिता की जूतों की एक छोटी सी फैक्ट्री थी. कॉलेज के बाद रवीश पीपल नौकरी या व्यवसाय के अंर्तद्वंद से जूझ थे. अंत में, उन्होंने अपने पारिवारिक व्यवसाय को चुना और इसका बड़े पैमाने पर विस्तार किया. पीपल कहते हैं, “जब तक मैंने कारोबार नहीं चुना था उस समय तक हम छोटा व्यवसाय कर रहे थे. मैंने अपने उत्पादों के लिए स्थानीय बाजार के बजाय विदेशी बाजार को देखा. विदेशी बाजार, मेरी उम्मीद से अधिक बड़ा था. मैंने इसे ध्यान से टैप किया और इस समय अच्छा बिजनेस कर रहा हूं. उनके अनुसार, नौकरी करने के बजाय कुछ व्यवसाय शुरू करने का यह एक अच्छा समय है क्योंकि इस समय आसानी से ऋण प्राप्त किया जा सकता है. 

राजनीति से परे सोचना होगा
एक बात बहस से परे है, उत्तर प्रदेश को राजनीति से परे सोचना है, तो निवेशकों को निवेश करने के लिए एक आदर्श स्थिति बनानी होगी और राज्य के युवाओं को भी नौकरी मांगने के बजाय खुद का मालिक बनने के बारे में सोचना होगा. कई कारणों से यह बिहार के बजाय महाराष्ट्र और गुजरात जैसे प्रगतिशील राज्यों के साथ रहने जैसा है. उत्तर प्रदेश को मौजूदा निवेशकों के अनुकूल नीतियों को बनाए रखना है ताकि निवेशक भगवान राम और भगवान कृष्ण को जन्म देने वाली पवित्र भूमि में निवेश करना पसंद करें.


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