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लॉन्ग टर्म विजन वाले Budget 2023 में सबके लिए है कुछ न कुछ
बजट में टैक्स स्लैब में बदलाव किया गया है और नई टैक्स व्यवस्था में 7 लाख रुपए की आय को टैक्स फ्री रखा गया है, जो स्वास्थ्य योग्य कदम है.
बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 3 years ago
- एस रवि, पूर्व अध्यक्ष BSE, रवि राजन एंड कंपनी के फाउंडर और मैनेजिंग पार्टनर
बजट 2023 का फोकस प्रो-ग्रोथ है और इसका लॉन्ग टर्म विजन है. इसे "अमृत काल" बजट के रूप में भी वर्णित किया गया है. बजट मुफ्त नकदी उपलब्धता की अनुमति देता है और रोजगार सृजन को बढ़ावा देता है, जिससे घरेलू खपत के साथ-साथ ग्रामीण मांग को भी बढ़ावा मिलेगा. आर्थिक विकास में तेजी लाने के लिए सरकार ने बजट में कई उपायों की घोषणा की है और महत्वपूर्ण क्षेत्रों के लिए आवंटन बढ़ाया है. इससे रोजगार के अवसर पैदा होंगे और डिस्पोजेबल इनकम में वृद्धि होगी.
ऐसे होगी मनरेगा की भरपाई
इस तरह के उपायों में पीएम गरीब कल्याण अन्न योजना के तहत 2 लाख करोड़ रुपए का आवंटन और 20 लाख करोड़ का एग्रीकल्चरल क्रेडिट टारगेट निर्धारित करना शामिल है. पीएम आवास योजना के फंड को भी 66 प्रतिशत बढ़ाकर 79,000 करोड़ रुपए कर दिया गया है. मनरेगा के बजट में कटौती पर भले ही बहस का मुद्दा हो, लेकिन उम्मीद है कि ग्रामीण भारत को बढ़ावा देने के उपायों से इसकी भरपाई हो जाएगी.
बजट की असाधारण विशेषता
रेलवे के लिए बजट में 2.40 लाख करोड़ रुपए का प्रावधान किया गया है, जो 2013-14 का 9 गुना है. रेलवे की विकास दर सुस्त रही है, और उम्मीद है कि इस क्षमता विस्तार का अर्थव्यवस्था पर सकारात्मक प्रभाव पड़ेगा. कुल मिलाकर पूंजी निवेश परिव्यय (Capital Investment Outlay) 33 प्रतिशत बढ़कर 10 लाख करोड़ रुपए (जिसका अर्थ है, 2021-22 में खर्च की गई पूर्ण राशि का लगभग दोगुना) करना, केंद्रीय बजट की एक असाधारण विशेषता है. यह विकास को बढ़ावा देने के लिए बुनियादी ढांचे के विस्तार को बढ़ावा देने के सिद्धांत में सरकार के विश्वास को दर्शाता है.
स्वागत योग्य कदम
बजट में टैक्स स्लैब में बदलाव किया गया है और नई टैक्स व्यवस्था में 7 लाख रुपए की आय को टैक्स फ्री रखा गया है, जो स्वास्थ्य योग्य कदम है. कुल मिलाकर इस बजट में हर किसी के लिए और समाज के हर वर्ग के लिए कुछ न कुछ है. अर्थव्यवस्था पर नजर रखने वालों के लिए, राजकोषीय समेकन (Fiscal Consolidation) के प्रति सरकार की प्रतिबद्धता का स्वागत है. वैश्विक उथल-पुथल (उदाहरण के लिए, यूक्रेन युद्ध ने उर्वरक क्षेत्र को किस तरह प्रभावित किया) को ध्यान में रखें, तो बजट में 2023-24 के लिए केंद्र के राजकोषीय घाटे का लक्ष्य जीडीपी के 5.9 प्रतिशत, 6.4 प्रतिशत से कम, आश्वस्त करने वाला है.
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