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DRDO की परियोजनाओं में देरी पर सरकार से जवाब तलब, 33,000 करोड़ के R&D रोडमैप पर भी नजर
33,000 करोड़ रुपये के डिफेंस R&D रोडमैप की निगरानी बढ़ाने की सिफारिश, टेक्नोलॉजी और ऑपरेशनल क्षमता पर भी हो आकलन
बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 2 hours ago
रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (DRDO) की परियोजनाओं में देरी और लागत बढ़ने को लेकर संसद की स्थायी समिति ने सख्त रुख अपनाया है. रक्षा मामलों की संसदीय स्थायी समिति ने DRDO से अपनी परियोजनाओं के लिए स्पष्ट और मापने योग्य प्रदर्शन लक्ष्य यानी Key Performance Indicators (KPIs) तय करने को कहा है. इन KPIs में लागत, समयसीमा, तकनीकी परिपक्वता और ऑपरेशनल प्रभावशीलता जैसे मानकों को शामिल करने की सिफारिश की गई है.
DRDO प्रोजेक्ट्स की नियमित होगी समीक्षा
शुक्रवार को संसद में पेश रिपोर्ट में समिति ने कहा कि DRDO को लागत दक्षता, तकनीकी परिपक्वता, निर्धारित समयसीमा, परियोजना पूरी होने और ऑपरेशनल प्रभावशीलता से जुड़े KPIs को जल्द अंतिम रूप देकर अधिसूचित करना चाहिए.
समिति ने DRDO की परियोजनाओं के प्रदर्शन का समय-समय पर आकलन और बेंचमार्किंग करने के लिए एक व्यवस्थित और पारदर्शी व्यवस्था बनाने की भी सिफारिश की है. इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि रक्षा अनुसंधान परियोजनाओं का मूल्यांकन केवल उनकी प्रगति के आधार पर न हो, बल्कि यह भी देखा जाए कि वे तय तकनीकी और ऑपरेशनल लक्ष्यों को हासिल कर रही हैं या नहीं.
लागत बढ़ने और प्रोजेक्ट में देरी पर मांगा जवाब
संसदीय समिति ने रक्षा मंत्रालय से यह जानकारी भी मांगी है कि DRDO की परियोजनाओं को समय पर पूरा करने और आवंटित धन के बेहतर इस्तेमाल के लिए क्या कदम उठाए जा रहे हैं. साथ ही, मंत्रालय की Action Taken Report में लागत बढ़ने यानी Cost Overrun को रोकने के लिए उठाए गए कदमों की जानकारी देने को कहा गया है.
समिति ने DRDO परियोजनाओं के लिए एक संरचित, पारदर्शी और नियमित बेंचमार्किंग व्यवस्था की अपनी पुरानी सिफारिश को भी दोहराया. इस व्यवस्था में टेक्नोलॉजी रेडीनेस, प्रोजेक्ट टाइमलाइन, लागत दक्षता और ऑपरेशनल उपयोगिता पर विशेष जोर देने की बात कही गई है.
33,000 करोड़ रुपये के डिफेंस R&D रोडमैप पर नजर
समिति ने अगले पांच वर्षों में रक्षा अनुसंधान एवं विकास के लिए लगातार बढ़ते निवेश का समर्थन किया है. समिति के मुताबिक, तकनीकी आत्मनिर्भरता मजबूत करने और भारतीय रक्षा उद्योग की प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता बनाए रखने के लिए R&D में अधिक निवेश जरूरी है.
समिति ने पांच साल के रक्षा R&D रोडमैप के तहत प्रस्तावित 33,000 करोड़ रुपये के निवेश का भी उल्लेख किया. उसने कहा कि इस निवेश का असर रक्षा क्षेत्र में अधिक स्वदेशीकरण और आयात पर कम निर्भरता के रूप में दिखना चाहिए. रक्षा उत्पादन विभाग को रोडमैप के क्रियान्वयन की करीबी निगरानी करने को कहा गया है, ताकि निवेश से अपेक्षित नतीजे हासिल हो सकें.
ऑपरेशन सिंदूर के बाद बढ़े रक्षा पूंजीगत बजट का भी जिक्र
समिति ने मौजूदा वित्त वर्ष में ऑपरेशन सिंदूर के बाद रक्षा पूंजीगत बजट में हुई बढ़ोतरी का भी संज्ञान लिया. समिति ने कहा कि सरकार का रक्षा R&D को मजबूत करने पर जोर देश की समग्र रक्षा क्षमताओं को बढ़ाने की दिशा में महत्वपूर्ण है.
DRDO में शिकायत व्यवस्था मजबूत करने की सिफारिश
समिति ने DRDO में कार्यस्थल से जुड़ी शिकायतों की व्यवस्था की भी समीक्षा की. रिपोर्ट में कहा गया कि संगठन में महिला कर्मचारियों को समान अवसर मिल रहे हैं और शिकायतों के निपटारे के लिए एक स्थापित व्यवस्था मौजूद है.
हालांकि, समिति ने शिकायत निवारण तंत्र को और मजबूत करने तथा POSH कानून के तहत शिकायतों के निपटारे के लिए तय Standard Operating Procedure (SOP) का सख्ती से पालन सुनिश्चित करने की सिफारिश की है. इसमें Internal Complaints Committees, Sexual Harassment Electronic Box (She-Box) और DRDO की विभिन्न प्रयोगशालाओं में नियुक्त नोडल अधिकारियों की भूमिका को महत्वपूर्ण बताया गया है.
रक्षा कर्मियों के बच्चों के लिए शिक्षा के अवसर बढ़ाने पर जोर
समिति ने सशस्त्र बलों के कर्मियों के बच्चों और आश्रितों के लिए उपलब्ध शैक्षणिक अवसरों की व्यापक समीक्षा की भी सिफारिश की. समिति ने पूर्व सैनिकों और उनके आश्रितों के लिए मौजूदा कल्याणकारी उपायों को स्वीकार करते हुए कहा कि रक्षा मंत्रालय ने बच्चों, आश्रितों और रक्षा कर्मियों की विधवाओं के लिए अतिरिक्त सहायता से जुड़ी उसकी पिछली सिफारिश पर विशेष रूप से कार्रवाई नहीं की है.
समिति ने मंत्रालय को शिक्षा मंत्रालय, राज्य सरकारों, प्रोफेशनल रेगुलेटरी बॉडीज और अन्य हितधारकों के साथ मिलकर एक व्यापक अध्ययन कराने को कहा है. इसमें प्रोफेशनल कॉलेजों में रक्षा कर्मियों के बच्चों और आश्रितों के लिए आरक्षण समेत अन्य सहायता उपाय बढ़ाने की संभावनाओं की समीक्षा करने की बात कही गई है.
ECHS के लिए टाइम-बाउंड रोडमैप
समिति ने Ex-Servicemen Contributory Health Scheme (ECHS) के एप्लिकेशन को National Government Cloud पर माइग्रेट किए जाने का स्वागत किया. साथ ही, माइग्रेशन पूरा करने, विभिन्न हितधारकों को जोड़ने और एक यूनिफाइड प्लेटफॉर्म शुरू करने के लिए समयबद्ध रोडमैप बनाने की सिफारिश की.
NCC में 3 लाख अतिरिक्त सीटों को मंजूरी
समिति ने यह भी बताया कि सरकार ने National Cadet Corps (NCC) में तीन लाख अतिरिक्त कैडेट सीटों को मंजूरी दी है. NCC से जुड़ने की लगातार बढ़ती मांग के बीच इन सीटों पर नामांकन शुरू हो चुका है और इसे 2025 से 2028 के बीच चरणबद्ध तरीके से पूरा किए जाने की उम्मीद है.
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