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प्रीमियमाइजेशन की लहर: कैसे बदल रहा है भारतीय आवासीय बाजार
भारत में लग्जरी रियल एस्टेट की बढ़ती मांग केवल संपन्नता का संकेत नहीं है, बल्कि यह दिखाती है कि महामारी के बाद खरीदार अब सिर्फ घर नहीं, बल्कि अपना सैंक्चुअरी, समग्र जीवन-परिसर और विश्व-स्तरीय दूसरा घर चाहते हैं.
बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 5 months ago
भारत का आवासीय रियल एस्टेट बाज़ार इस समय एक महत्वपूर्ण परिवर्तन के दौर से गुजर रहा है. कभी इस क्षेत्र में किफ़ायती आवास का वर्चस्व था, वहीं अब प्रीमियमाइजेशन और लग्जरी व हाई-एंड घरों की बढ़ती मांग बाज़ार की दिशा तय कर रही है. यह बदलाव केवल संपन्नता के प्रदर्शन तक सीमित नहीं है; बल्कि खरीदारों की मानसिकता में आए परिवर्तन विशेषकर महामारी के बाद संकेत देता है और “घर” की परिभाषा को नए आयाम प्रदान कर रहा है. उल्लेखनीय है कि गोवा जैसे बाजार इस उभरते रुझान को अप्रत्याशित, परंतु प्रभावी ढंग से आगे बढ़ा रहे हैं.
स्टेटस सिंबल से आगे, अब ‘सैंक्चुअरी’ की तलाश
आज के उच्च मूल्य गृह-खरीदारों के लिए लग्ज़री अब केवल प्रतिष्ठा का प्रतीक नहीं रह गई है. भारत में प्रीमियम घरों की चाहत अब इस भावना से जुड़ रही है कि घर केवल स्टेटस नहीं, एक सुरक्षित ‘सैंक्चुअरी’ होना चाहिए. महामारी के बाद के दौर ने घर की भूमिका को पूरी तरह बदल दिया है, अब यह वर्कस्पेस, वेलनेस सेंटर, स्कूल, और एंटरटेनमेंट हब सब एक साथ बन चुका है. इस परिवर्तन ने लग्जरी सेगमेंट के खरीदारों की मानसिकता को गहराई से प्रभावित किया है. अब खरीदार केवल रियल एस्टेट का लेन-देन नहीं, बल्कि एक अनुभव-प्रधान और जीवनशैली-संवर्धित निवास की तलाश में हैं.
प्रीमियमाइजेशन की लहर
उपलब्ध आँकड़ों से यह रुझान और स्पष्ट हो जाता है. जानकारी के अनुसार, साल 2025 की पहली छमाही में ₹1 करोड़ से अधिक मूल्य वाले घरों की कुल आवासीय बिक्री 62% थी, जो पिछले वर्ष की समान अवधि के 51% से अधिक है. विशेष रूप से उच्च मूल्य वर्गों में मांग मज़बूत बनी हुई है, ₹3–5 करोड़ श्रेणी के घरों में सालाना 14% की वृद्धि दर्ज की गई, जबकि अल्ट्रा-लग्ज़री सेगमेंट (₹5 करोड़ से अधिक) ने वर्ष-दर-वर्ष 80% की छलांग लगाई. यह समग्र वृद्धि निवेशकों के विश्वास को और मजबूत कर रही है. इसके साथ ही, देश के प्रमुख शहरों में संपत्ति मूल्यों में निरंतर वृद्धि देखी जा रही है. बाजार में यह सकारात्मकता अनुकूल मैक्रो-इकोनॉमिक परिस्थितियों, बढ़ती आय, आसान वित्त उपलब्धता और वैश्विक खरीदारों की बढ़ती दिलचस्पी से सशक्त हो रही है.
गोवा: उभरता हुआ सितारा
जहाँ मेट्रो शहरों में लग्ज़री रियल एस्टेट की लहर स्पष्ट रूप से दिखाई देती है, वहीं गोवा तेजी से भारत के सबसे सक्रिय और संभावनाशील प्रीमियम रियल एस्टेट बाजारों में से एक बनकर उभरा है. ट्राइडेंट के बाजार विश्लेषण के अनुसार, गोवा लग्जरी आवासों का प्रमुख हॉटस्पॉट बन चुका है, जहाँ क्षेत्र में संपत्ति मूल्यों में 66.30 प्रतिशत की तेज वृद्धि दर्ज की गई है. खास बात यह है कि ₹15 करोड़ से अधिक मूल्य वाली हाई-एंड विला बाज़ार में 30–40 प्रतिशत तक के किराया प्रतिफल आकर्षित कर रही हैं, जो इस श्रेणी की संपत्तियों के लिए अत्यंत उल्लेखनीय माना जाता है.
गोवा के भीतर स्थित माइक्रो-मार्केट्स इस रुझान को और भी अधिक आकर्षक बनाते हैं. नॉर्थ गोवा में संपत्तियों पर वार्षिक पूँजी वृद्धि लगभग 20% तक दर्ज की जा रही है, जबकि औसत किराया प्रतिफल 8–9% के स्तर पर बना हुआ है, जो देश के अधिकांश मेट्रो शहरों की तुलना में कहीं अधिक है. साउथ गोवा में भी स्थिति मजबूत बनी हुई है, जहाँ किराया प्रतिफल 6–8% के बीच है. ये आँकड़े स्पष्ट रूप से संकेत देते हैं कि गोवा के दोनों ही क्षेत्रों में निवेशकों की मजबूत और निरंतर बढ़ती रुचि है.
ये आँकड़े स्पष्ट रूप से दर्शाते हैं कि लग्ज़री सेगमेंट के खरीदारों के लिए गोवा अब केवल एक हॉलिडे डेस्टिनेशन नहीं रह गया है. अब यह एक रणनीतिक निवेश स्थल बन चुका है, ऐसी जगह जहाँ दूसरा घर रखना न सिर्फ जीवनशैली का हिस्सा है, बल्कि स्वयं अपनी लागत निकालने वाला और समय के साथ तेज़ी से मूल्यवृद्धि करने वाला परिसंपत्ति विकल्प भी है.
डेवलपर्स कैसे प्रतिक्रिया दे रहे हैं
अब डेवलपर्स केवल अधिक लग्ज़री घर लॉन्च नहीं कर रहे, बल्कि उनके विकास के तरीक़ों पर भी पुनर्विचार कर रहे हैं. उनका मानना है कि भविष्य इंटीग्रेटेड और अनुभव-केंद्रित टाउनशिप्स का है. इसी कारण नई परियोजनाओं में अब बढ़ते रूप से सस्टेनेबिलिटी उपाय (जैसे सोलर पैनल, रेनवॉटर हार्वेस्टिंग), बायोफिलिक डिजाइन और स्मार्ट ऑटोमेशन जैसे तत्व शामिल किए जा रहे हैं, जो आधुनिक HNI खरीदारों के ESG मानकों के अनुरूप हैं.
भविष्य के संकेत
भारत के रियल एस्टेट बाजार में दिखाई दे रहा परिवर्तन संरचनात्मक प्रतीत होता है, न कि किसी अस्थायी रुझान का परिणाम है. प्रीमियम और लग्जरी सेगमेंट में वृद्धि आगे भी जारी रहने की संभावना है, क्योंकि अधिकाधिक खरीदार अब केवल कीमत के बजाय जीवन-गुणवत्ता को प्राथमिकता दे रहे हैं. साथ ही, बहुत उच्च मूल्य वाली अल्ट्रा-लग्जरी संपत्तियों में बढ़ती अनसोल्ड इन्वेंटरी यह दर्शाती है कि इस श्रेणी में उत्पाद और बाजार की उपयुक्तता (प्रोडक्ट-मार्केट फिट) पर अधिक ध्यान देने की आवश्यकता है.
खरीदारों, विशेषकर एनआरआई और एचएनआई के लिए बड़ा अवसर यह है कि वे गोवा या टियर-2 शहरों जैसे उभरते लग्ज़री बाज़ारों में समय रहते निवेश करें. ऐसे बाजार भविष्य में बेहतर रिटर्न के साथ-साथ उच्च स्तर का जीवन अनुभव भी प्रदान कर सकते हैं. डेवलपर्स का संदेश भी स्पष्ट है: रियल एस्टेट का भविष्य केवल अधिक टावर बनाने में नहीं, बल्कि सतत विकास, पर्सनलाइज्ड पेशकश, और इंटीग्रेटेड लिविंग में है.
(डिस्क्लेमर : इस लेख में व्यक्त किए गए विचार लेखक के निजी हैं और आवश्यक नहीं कि यह प्रकाशन के विचारों को दर्शाते हों.)
अतिथि लेखक-शीशराम यादव, मैनेजिंग डायरेक्टर, यूजेन इंफ्रा
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