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प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में भारतीय बैंकिंग क्षेत्र का उत्कर्ष : SBI की महत्वपूर्ण भूमिका

प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी के दूरदर्शी नेतृत्व में, भारत एक आत्मनिर्भर, वित्तीय रूप से मजबूत और विकसित राष्ट्र बनने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है.

स्वाति गुप्ता 1 year ago

माननीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी के दूरदर्शी और प्रेरणादायक नेतृत्व में पिछले एक दशक में भारतीय बैंकिंग क्षेत्र में अभूतपूर्व और निर्णायक परिवर्तन हुए हैं. इन सुधारों ने वित्तीय प्रणाली की स्थिरता को सुदृढ़ करने के साथ-साथ बैंकिंग सेवाओं को देश के अंतिम व्यक्ति तक पहुँचाने का रास्ता साफ़ किया है. वित्तीय समावेशन की इस दिशा में भारत ने उल्लेखनीय प्रगति की है, जिसने देश की आर्थिक शक्ति को नई ऊँचाइयों तक पहुँचाने में मदद की है.

भारतीय स्टेट बैंक: देश की वित्तीय रीढ़

भारतीय बैंकिंग क्षेत्र का प्रमुख स्तम्भ, भारतीय स्टेट बैंक (एसबीआई), आज 50 करोड़ से अधिक ग्राहकों को सेवा दे रहा है. इसका अर्थ है कि देश के लगभग हर तीन नागरिकों में से एक एसबीआई से जुड़ा हुआ है. एसबीआई की 23% परिसंपत्ति हिस्सेदारी और 25% ऋण एवं जमा हिस्सेदारी भारतीय वित्तीय प्रणाली की मजबूती का प्रमाण है. यह बैंक केवल वित्तीय सेवाओं का प्रदाता नहीं है, बल्कि देश की आर्थिक प्रगति का एक अहम सहयोगी भी है.

महिला नेतृत्व और वित्तीय समावेशन की दिशा

एकमात्र महिला निदेशक और सरकारी प्रतिनिधि के रूप में, मुझे प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी का हार्दिक आभार व्यक्त करते हुए गर्व है कि उन्होंने मुझे इस महत्वपूर्ण पद पर नियुक्त किया. मेरी प्राथमिक जिम्मेदारी वित्तीय समावेशन की योजनाओं को हर घर तक पहुँचाना है, विशेषकर महिलाओं को सशक्त बनाने की दिशा में काम करना. महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त बनाना न केवल उनके व्यक्तिगत विकास के लिए आवश्यक है, बल्कि यह समग्र आर्थिक विकास और सामाजिक प्रगति के लिए भी अनिवार्य है.

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में संचालित प्रमुख योजनाएँ

2014 के बाद से कई राष्ट्रीय महत्व की योजनाओं ने भारतीय बैंकिंग क्षेत्र और वित्तीय समावेशन की दिशा को पूरी तरह से बदल दिया है. इनमें एसबीआई की भूमिका अग्रणी रही है, जो इन योजनाओं के सफल क्रियान्वयन में महत्वपूर्ण भागीदारी निभा रहा है. प्रमुख योजनाएँ निम्नलिखित हैं:

1. प्रधानमंत्री जन धन योजना (PMJDY) : इस योजना के तहत 15 करोड़ से अधिक बैंक खाते खुले हैं, जिनमें ₹64,000 करोड़ से अधिक जमा राशि सुरक्षित की गई है. इस योजना ने वित्तीय समावेशन के नए मानक स्थापित किए हैं, जिससे देश के लाखों लोग बैंकिंग प्रणाली से जुड़े हैं.

2. प्रधानमंत्री सुरक्षा बीमा योजना (PMSBY) : इस योजना के तहत 14.91 करोड़ से अधिक लोगों ने नामांकन कराया है, जिससे दुर्घटना बीमा सुरक्षा की पहुँच सामान्य जनता तक बढ़ी है.

3. प्रधानमंत्री जीवन ज्योति बीमा योजना (PMJJBY) : 7.31 करोड़ से अधिक नामांकन इस योजना के तहत हुए हैं, जो जीवन बीमा सुरक्षा को सभी के लिए सुलभ बनाती है.

4. सुकन्या समृद्धि योजना : इस योजना के अंतर्गत 32.44 लाख बालिकाओं के खाते खुले हैं, जो बालिका सशक्तिकरण और उनकी शिक्षा-स्वास्थ्य देखभाल के लिए एक महत्वपूर्ण पहल है.

5. मुद्रा योजना : इस योजना के तहत ₹50,000 करोड़ से अधिक के ऋण वितरित किए गए हैं. खासतौर पर ‘तरुण प्लस योजना’ ने युवा उद्यमियों को आर्थिक सशक्तिकरण की दिशा में विशेष सफलता दिलाई है.

6. एमएसएमई वित्तपोषण : सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों (MSME) के लिए ₹3.78 लाख करोड़ से अधिक का निवेश हुआ है, जिससे आर्थिक विकास के साथ-साथ रोजगार सृजन में भी महत्वपूर्ण योगदान मिला है.

नवीनतम पहल : प्रधानमंत्री सूर्य घर योजना और विश्वकर्मा योजना

हाल ही में शुरू की गई प्रधानमंत्री सूर्य घर योजना और प्रधानमंत्री विश्वकर्मा योजना ने भी वित्तीय समावेशन को गति प्रदान की है. ये योजनाएँ ऊर्जा क्षेत्र और कारीगरों को सशक्त बनाने के लिए बनाई गई हैं, जिनका लाभ अब तक बड़ी संख्या में लोगों तक पहुँच चुका है.

वित्तीय समावेशन संतृप्ति शिविर: प्रगति को तेज़ करने का प्रयास

जुलाई से सितंबर तक पूरे देश में वित्तीय समावेशन संतृप्ति शिविरों का आयोजन किया जा रहा है, जिनका उद्देश्य योजनाओं की पहुँच को और व्यापक बनाना और अधिक से अधिक लोगों को बैंकिंग नेटवर्क से जोड़ना है. इन शिविरों के माध्यम से ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों में बैंकिंग जागरूकता बढ़ाई जा रही है, जिससे आर्थिक समावेशन की प्रक्रिया को मजबूती मिलेगी.

(डिस्क्लेमर : इस लेख में व्यक्त की गई राय लेखक की हैं और यह आवश्यक रूप से प्रकाशन की राय को नहीं दर्शाती हैं.)

अतिथि लेखिका-स्वाति गुप्ता 

(स्वाति गु्प्ता, स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (SBI) के केंद्रीय बोर्ड में गैर-कार्यकारी स्वतंत्र निदेशक हैं. उनकी नियुक्ति केंद्रीय सरकार द्वारा SBI अधिनियम, 1955 की धारा 19(D) के तहत की गई है. उन्होंने 2012 से 2017 तक दिल्ली नगर निगम (MCD) की काउंसलर और क्षेत्रीय अध्यक्ष के रूप में कार्य किया. इसके अलावा, वह 2017 से 2022 तक MCD की शिक्षा समिति की नामित सदस्य भी रहीं. वह एक समाजसेविका और शिक्षा विशेषज्ञ हैं, जो दिल्ली में एक चैरिटेबल ट्रस्ट और प्री-स्कूल चलाती हैं. महिलाओं, कानूनी, उपभोक्ता और सामाजिक मामलों में उनका व्यापक अनुभव है. 

शिक्षा: वह दिल्ली विश्वविद्यालय से स्नातक, राजनीतिक विज्ञान में मास्टर डिग्री और एलएल.बी. की डिग्री भी प्राप्त कर चुकी हैं. इसके साथ ही उन्होंने IIM इंदौर से AMPCL प्रबंधन में डिग्री हासिल की है.)


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