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जस्टिस दीपक मिश्रा ने कहा, 'रेगुलेटिरी अनुपालन है स्थायी व्यवसाय संचालन की नींव'
एनुअल लीगल लीडर्स कॉन्क्लेव में अपने मुख्य भाषण में, न्यायमूर्ति दीपक मिश्रा ने जोर देकर कहा कि अनुपालन स्थायी व्यवसाय संचालन की नींव है.
बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 1 year ago
BW लीगल ने वर्ल्ड एनुअल लीगल लीडर्स कॉन्क्लेव (BW Legal World Annual Legal Leaders Conclave 2024) का आयोजन किया गया. इस सम्मेलन का मुख्य आकर्षण भारत के पूर्व मुख्य न्यायाधीश, न्यायमूर्ति दीपक मिश्रा का उद्घाटन भाषण था, जिसका विषय था, "डायनेमिक कानूनी परिदृश्य में नियामक ढांचे के साथ अनुपालन." अपने भाषण में, न्यायमूर्ति मिश्रा ने अनुपालन के महत्व पर जोर दिया, जो किसी भी व्यवसाय के स्थिर संचालन के लिए आवश्यक है. उन्होंने भारत में बदलते नियामक ढांचे को रेखांकित किया और बताया कि कैसे कानून नागरिकों के हितों, आर्थिक विकास और तकनीकी प्रगति के हिसाब से बनाए जाते हैं.
न्यायमूर्ति मिश्रा ने यह भी बताया कि नियामक बदलावों के साथ जल्दी अनुकूलित होना कितना जरूरी है. उन्होंने कहा कि अनुपालन से स्टेकहोल्डर्स में विश्वास बढ़ता है और व्यवसायों के जोखिम कम होते हैं. उन्होंने यह भी कहा कि 2025 तक कई महत्वपूर्ण नियम व्यवसायिक माहौल को बदलने वाले हैं.
1. डिजिटल पर्सनल डेटा प्रोटेक्शन एक्ट, 2023 (DPDP एक्ट)- यह भारत का पहला क्रॉस-सेक्टरल कानून है जो व्यक्तिगत डेटा की सुरक्षा के लिए कंपनियों को सख्त नियमों का पालन करने का आदेश देता है. इसके नियम 2025 में लागू होंगे और यह व्यवसायों के डेटा प्रोसेसिंग तरीके को नया रूप देंगे.
2. डिजिटल इंडिया एक्ट (DIA)- यह एक्ट डिजिटल गवर्नेंस को आधुनिक बनाने के लिए है और इंटरनेट और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) को नियंत्रित करेगा. कंपनियों को कड़े साइबर सुरक्षा और डेटा गोपनीयता नियमों का पालन करना होगा, और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स और ई-कॉमर्स कंपनियों पर नई जिम्मेदारियाँ होंगी.
3. कंपीटीशन (अमेंडमेंट) एक्ट, 2023- इस एक्ट ने M&A डील्स के लिए INR 20 बिलियन से ऊपर की डील्स को भारतीय प्रतिस्पर्धा आयोग से मंजूरी प्राप्त करना अनिवार्य कर दिया है.
4. एंजेल टैक्स का हटाना और कॉर्पोरेट टैक्स में कमी- 2024-25 के संघीय बजट में विदेशी निवेश आकर्षित करने के लिए विदेशी कंपनियों पर कॉर्पोरेट टैक्स को 40% से घटाकर 35% किया गया है.
5. FDI नियमों का उदारीकरण- "मेक इन इंडिया" पहल के तहत भारत ने अंतरिक्ष क्षेत्र में 100% FDI की मंजूरी दी है.
इन-हाउस काउंसल की भूमिका:
न्यायमूर्ति मिश्रा ने इन-हाउस काउंसल की बढ़ती जिम्मेदारियों की बात की, जो कंपनी की रणनीतियों को नियामक बदलावों के साथ जोड़े रखने के लिए महत्वपूर्ण हैं. उन्होंने कहा कि अनुपालन केवल कानूनी जिम्मेदारी नहीं, बल्कि एक प्रतिस्पर्धात्मक लाभ है, "केवल एक अनुपालक संस्था ही आत्मविश्वासी होती है," यह उनके शब्द थे.
न्यायमूर्ति मिश्रा ने अपने भाषण को समाप्त करते हुए डॉ. अनुराग बत्रा और BW Legal World को कानूनी प्रतिभाओं को पहचानने और नए आर्थिक आदेश में व्यवसायों की वृद्धि पर संवाद को बढ़ावा देने के लिए सराहा.
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