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राहु-केतु गोचर 18 मई 2025: 12 राशियों पर प्रभाव और ज्योतिषीय विश्लेषण
संजय चौधरी लिखते हैं हालाँकि राहु और केतु चुनौतियाँ ला सकते हैं, लेकिन इनके प्रभाव को समझने से व्यक्ति इन परिवर्तनों को अधिक जागरूकता के साथ झेल सकता है.
बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 11 months ago
हर 18 महीने में आने वाला बहुप्रतीक्षित राहु-केतु गोचर, इस अब 18 मई 2025 को होने जा रहा है. इस खगोलीय घटना के दौरान, कर्म संबंधी ग्रह राहु मीन से कुम्भ में और केतु कन्या से सिंह में प्रवेश करेंगे. ये ग्रह परिवर्तन 5 दिसंबर 2026 तक प्रभावी रहेंगे.
यह गोचर विशेष रूप से महत्वपूर्ण है क्योंकि यह दो अन्य प्रमुख ज्योतिषीय परिवर्तनों के बाद हो रहा है: शनि का 29 मार्च को मीन में प्रवेश और गुरु का 14 मई 2025 को मिथुन में आगमन, इन चार धीमी गति से चलने वाले ग्रहों की संगति से आने वाले हफ्तों में लोगों के जीवन में बड़े बदलाव आने की उम्मीद है.
राहु और केतु को समझना
राहु और केतु, जिन्हें छाया ग्रह या नोडल ग्रह कहा जाता है, भौतिक अस्तित्व न होने के बावजूद ज्योतिष में अत्यधिक प्रभावशाली माने जाते हैं. ये ग्रह सूर्य और चंद्रमा की कक्षाओं के परस्पर छेदन बिंदु को दर्शाते हैं और सदा वक्री गति में चलते हैं. जहाँ राहु सामान्यतः भौतिक संपत्ति और सांसारिक सुखों की इच्छा को उत्तेजित करता है, वहीं केतु आध्यात्मिक विकास और आत्मज्ञान को प्रेरित करता है.
नाड़ी ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, इस गोचर का विश्लेषण चंद्र राशि की बजाय लग्न से किया जाता है. प्रत्येक राशि पर प्रभाव निम्नानुसार है:
राशिफल
मेष: राहु का 11वें भाव से गोचर वित्तीय समस्याएं ला सकता है, जबकि केतु का पांचवें भाव से गोचर बच्चों से संबंधित अचानक चुनौतियाँ उत्पन्न कर सकता है. आंतरिक शांति की खोज व्यक्ति को आध्यात्मिक यात्राओं की ओर ले जा सकती है.
वृषभ: राहु का दशम भाव में स्थित होना कार्यस्थल पर बाधाएं उत्पन्न कर सकता है, जबकि केतु का चतुर्थ भाव से गोचर अचानक आवासीय परिवर्तन का संकेत देता है. व्यापार के नए अवसर और पैतृक संपत्ति मिलने की संभावना बन सकती है.
मिथुन: राहु का नवम भाव पर प्रभाव बुजुर्गों को प्रभावित कर सकता है, जबकि तृतीय भाव में केतु अचानक विदेश यात्रा करा सकता है. संबंधों और विवाह में सकारात्मक प्रगति संभावित है.
कर्क: राहु का अष्टम भाव में गोचर आर्थिक तनाव ला सकता है, जबकि द्वितीय भाव में केतु भोजन की आदतों में बदलाव ला सकता है, नौकरी में परिवर्तन संभव है.
सिंह: सप्तम भाव में राहु का गोचर वैवाहिक समस्याएं उत्पन्न कर सकता है, जबकि लग्न में केतु आत्मचिंतन को बढ़ा सकता है. आध्यात्मिक विकास और संतान से आशीर्वाद की संभावना है.
कन्या: षष्ठ भाव में राहु के प्रवेश से स्वास्थ्य संबंधी चिंताएं उभर सकती हैं. द्वादश भाव में केतु की स्थिति नींद में बाधा पहुंचा सकती है. हालांकि, तीर्थयात्राएं नकारात्मक प्रभावों को कम कर सकती हैं.
तुला: पंचम भाव में राहु का गोचर शिक्षा में व्यवधान डाल सकता है, जबकि एकादश भाव में केतु अचानक लाभ ला सकता है. सामाजिक कल्याण गतिविधियाँ नकारात्मक प्रभावों को संतुलित कर सकती हैं.
वृश्चिक: राहु के चतुर्थ भाव में होने से कार्यस्थल पर चुनौतियाँ आ सकती हैं, जबकि दशम भाव में केतु अप्रत्याशित पेशेवर परिवर्तन का संकेत दे सकता है. संबंधों के अवसर उभर सकते हैं.
धनु: तृतीय भाव में राहु की उपस्थिति यात्रा योजनाओं में देरी करा सकती है, जबकि नवम भाव में केतु की उपस्थिति आध्यात्मिक खोज को प्रोत्साहित कर सकती है. पारिवारिक संबंधों में सुधार हो सकता है.
मकर: द्वितीय भाव में राहु पारिवारिक विवाद को जन्म दे सकता है, जबकि अष्टम भाव में केतु शारीरिक असुविधा का कारण बन सकता है. वित्तीय मामलों में सावधानी बरतने की सलाह है.
कुंभ: राहु का लग्न में गोचर व्यवहार में बदलाव ला सकता है, जबकि सप्तम भाव में केतु संबंधों को प्रभावित कर सकता है, वित्तीय लाभ संभव हैं.
मीन: द्वादश भाव में राहु अप्रत्याशित खर्चों को जन्म दे सकता है, जबकि षष्ठ भाव में केतु कानूनी मामलों में अनुकूल परिणाम का संकेत देता है. करियर में बदलाव भी हो सकते हैं.
अंतिम विचार
बृहस्पति और शनि के संयुक्त प्रभाव, साथ ही व्यक्तिगत दशा अनुक्रम, प्रत्येक राशि पर गोचर के प्रभाव को गहराई से प्रभावित करेंगे. यद्यपि राहु और केतु चुनौतियाँ ला सकते हैं, उनके प्रभाव को समझकर व्यक्ति इन परिवर्तनों का अधिक सजगता से सामना कर सकते हैं.
(डिस्क्लेमर : इस लेख में व्यक्त किए गए विचार लेखक के व्यक्तिगत हैं और आवश्यक नहीं कि यह प्रकाशन के विचारों को प्रतिबिंबित करते हों. यह लेख ज्योतिषीय शोध और व्याख्याओं पर आधारित है. प्रस्तुत की गई भविष्यवाणियाँ सामान्य प्रकृति की हैं और व्यक्तिगत जन्म कुंडली के आधार पर भिन्न हो सकती हैं. लेखक और प्रकाशन किसी भी वित्तीय या व्यक्तिगत निर्णय के लिए उत्तरदायी नहीं हैं जो इन पूर्वानुमानों के आधार पर लिए जाएं.)
संजय चौधरी, अतिथि लेखक
(लेखक कर्म ध्यान एस्ट्रोलॉजी के प्रमुख सलाहकार हैं.)
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