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कटोरी में कद्दू की सब्जी, जीवन की समस्याएं और आपका फैसला

सच तो यही है कि कटोरी में कद्दू की सब्ज़ी हो या लाइफ में प्रॉब्लम, खत्म होने पर कोई ना कोई आकर उसे फिर भर ही देगा.

बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 3 years ago

मैं अपने दोस्त के घर खाने पर इन्वाइटेड था. रसोई घर से जो खुश्बू आ रही थी उसने मेरी भूख को और भी बढ़ा दिया था. जब खाने की प्लेट आई तो उसमें मटर पनीर और राजमा के साथ कद्दू की सब्जी भी थी, अब भला दावत में बुलाकर कद्दू की सब्जी कौन खिलाता है, लेकिन चलो अब वो थाली का हिस्सा बन ही गई थी तो मैंने सोचा इसे जैसे तैसे निपटा दिया जाए. ये सोचकर मैंने सबसे पहले अपनी प्लेट में रखी कद्दू की सब्जी खत्म कर ली. मेरा प्लान कुछ ऐसा था कि एक बार ये कद्दू की सब्जी खत्म हो जाएगी तो फिर आराम से चटखारे लेकर मटर पनीर और राजमा को धीरे-धीरे खाया जाएगा. लेकिन तभी अचानक भाभी जी ने मेरी कद्दू वाली कटोरी खाली देखकर उसे फिर भर दिया. जब मैंने सवालिया निगाहे उठाकर उनकी तरफ देखा तो उन्होंने कहा कि सबसे पहले कद्दू की कटोरी खाली देखकर मुझे लगा कि सब्ज़ी आपको बहुत पसंद आई है.

जीवन में भी आती है ऐसी स्थिति
हमारा जीवन भी वक्त-वक्त पे हमें ऐसी सिचुएशनज दिखता रहता है. जब भी किसी प्रॉब्लम को निपटा कर वापस से अपनी नॉर्मल जिंदगी का मजा लेना चाहो तो फिर कोई नई प्रॉब्लम आकार खड़ी हो जाती है. मैं ये तो नहीं कह सकता कि यह सिचुएशन सिर्फ मेरे जीवन की ही है, क्योंकि सच तो यह है कि हर इंसान के जीवन में ऐसी सिचुएशन आती-जाती रहती है. तो अब सवाल ये है कि थाली में कद्दू की सब्जी और लाइफ में प्रॉब्लम रखकर बैठे रहें, या पहले कद्दू की सब्जी खत्म करें. हम सोचते तो यही हैं कि कद्दू की सब्जी जैसी इन लाइफ की प्रॉब्लम को पहले खत्म कर लें तो राजमा और मटर पनीर का स्वाद ले सकेंगे और रोज-रोज आने वाली छोटी-छोटी खुशियों का मजा ले पाएंगे. पर इन मामलों को सुलझाते-सुलझते हमें पता भी नहीं चलता कि कब हम इनमें और उलझ जाते हैं. अब आप ऐसी सिचुएशन में क्या करते हैं ये तो आप जाने, पर मैंने तो अब कद्दू की सब्जी को भी अपनी फेवरेट सब्ज़ियों की लिस्ट में शामिल कर लिया है और बारी-बारी से सारी सब्जियों का मजा ले रहा हूं.

खत्म नहीं होतीं समस्याएं
देखिये सच तो यही है कि कटोरी में कद्दू की सब्जी हो या लाइफ में प्रॉब्लम, खत्म होने पर कोई ना कोई आकर उसे फिर भर ही देगा. ये नापसंद सब्जी, या ये कह लीजिए ये बिन बुलाई समस्याएं हमारी लाइफ का हिस्सा हैं, तो आप चाहें ना चाहें ये तो आती ही रहेंगी. अच्छी बात ये है कि ये प्रॉब्लम अगर आती हैं तो चली भी जाती हैं, कभी जल्दी तो कभी थोड़ा समय लगाकर. पर अंत में ये फैसला तो आपके हाथ में है कि आप इन समस्याओं को जल्दी-जल्दी सॉल्व करने के चक्कर में उनमें उलझे रहना चाहते हैं या फिर लाइफ के एक इंपॉर्टेंट हिस्से की तरह प्रॉब्लम को स्वीकार करके उनमे भी कुछ पॉजिटिव ढूंढ लेते हैं. तो देख लीजिए, कद्दू की सब्जी कटोरी में है और प्लेट आपके सामने रखी हुई है, अब ऐसी सिचुएशन में आप अपनी प्लेट में रखी कद्दू की सब्जी के साथ क्या करेंगे, फैसला तो आखिरकार आपको ही करना है.


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