होम / एक्सपर्ट ओपिनियन / कैसे भूल सकता हूं वो हर बात पर मां का नजर उतारना...

कैसे भूल सकता हूं वो हर बात पर मां का नजर उतारना...

जब भी मैं हार कर घर आता था तो मेरी मां मेरी नजर उतार देती थी, बोलती थी किसी की नजर लगी थी, अब सब ठीक होगा.

बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 3 years ago

बचपन से लेकर आज तक मेरी मां से मेरी डिमांड कम ही नहीं हो पाई है. मेरी पसंद का खाना, आलू के पराठे, मां के हाथ से बना शर्बत, कभी शिकंजी, कभी गोभी के पकौड़े, बेसन का हलवा, आज भी नहीं समझ पाया हूं - मां तू कौन है, अन्नपूर्णा, बावर्ची या मेरी मां सिर्फ मां. मैं जीत जाता था जब भी तुम मेरे साथ लूडो खेलती थीं, मैं और तुम छुपम-छिपाई खेलते थे. मैं तुम्हे हर बार ढूंढ लेता, लेकिन तुम मुझे नहीं ढूंढ पाती थीं. क्यों कभी तुमने मेरी आंखों पर पट्टी बांधकर मुझे आगे-पीछे से नहीं धकेला, क्यों कभी तुम्हारी कोई Housie नहीं निकली. हां अब जब अपने बच्चों से हारता हूं तो तुम्हारे हारने का कारण समझ जाता हूं. तुम्हारा जो विश्वास मुझमें था और आज भी है.

इसे करने दो, मैं हूं न
साइंस का ब्राइट स्टूडेंट होने के बाद भी तुम्हें मेरे पेंटर बनने को बिना किसी वाद-विवाद के मान लिया. तुम्हारी मर्जी के बिना शर्मा जी की लड़की के बजाय साधारण से नैन नक्श वाली मेरी पसंद की पंजाबी लड़की तुम्हें पहली नजर में भा गई. अच्छी-खासी जमी-जमाई दुकान को छोड़कर, शहर को छोड़कर तुम यहां 2 कमरों की माचिस की डिबिया, साबुनदानी जैसे घर में मेरे साथ चली आईं. मुझे अब तक शक है कि तुम्हें मुझ पर विश्वास था कि खुद पर, कि चलो जो करता है इसे करने दो, मैं हूं न. 

तुम सब ठीक कर दोगी  
मां तुम हो तो मैं हूं, घर जल्दी लौटूं या देर से, खाकर आऊं या खाली पेट, बरसात की बारिश में भीग कर आऊं या कड़कड़ाती सर्द रातों में, बॉस से झिड़की खाकर आऊं या रिश्तों में हार कर, बस जब घर आ जाता हूं ना, तो जानता हूं कि तुम सब ठीक दर दोगी. जब भी मैं हार कर घर आता था तो मेरी मां मेरी नजर उतार देती थी, बोलती थी किसी की नजर लगी थी, अब सब ठीक होगा. इसी तरह जब जीत कर आता था तो फिर से नजर उतारती थी, बोलती थी कही तुझे नजर न लग जाए. जब भी कहीं बाहर जाता था, तो मां नजर उतारकर भेजती थी, जब भी कहीं बाहर से आता था तो मां फिर से नजर उतारती थी, कभी-कभी मां के इस काम पर गुस्सा भी आ जाता था. 

ये भी पढ़ें - अपनी किस्मत, अपने हाथ: जो चाहेंगे वही मिलेगा बस करना है ये काम

फिर एक अनजान सफर पर जाना है
जानते हो मां कैसे नजर उतारती थी, मेरी आंखें बंद, मां की आंखें खुली, एक हाथ में एक सुखी लाल मिर्च, 2 दाने काली मिर्च के, चुटकी भर नमक, चुटकी भर शक्कर और जो दो-तीन चीजें और भी, जो मैं कभी समझ नहीं पाया और सबको लेकर एक मंत्र सा - अपने की, पराये की, काले की, सफेद की, सच्चे की, झूठे की, जाने की, अनजाने की, और भी न जाने क्या-क्या, मन मन में मां बुदबुदाती रहती थी. लेकिन सुबह उठता था तो सब ठीक हो जाता था, मां तुम्हारा ये नजर उतारना काम तो करता है. आज जब मैं अपने जीवन के आखिरी लम्हों में जी रहा हूं और हॉस्पिटल के ICU मे सभी डॉक्टर्स और नर्स के चेहरे मुझे साफ- साफ बता रहे हैं कि इस जन्म का सफर यहीं तक है, तो एक बात मेरे मन मस्तिष्क मे बार-बार आ रही है कि मेरे मरने के बाद मुझे जलाने से पहले मेरी मां से कहना, मेरी नजर उतार देगी, आखिर में मैं भी तो एक नए से सफर में एक अनजानी से मंजिल पर जा रहा हूं.


टैग्स
सम्बंधित खबरें

दुनिया ने बनाया युवा संस्कृति का संग्रहालय, भारत को चाहिए ऐसे दर्जनों संग्रहालय

इस संग्रहालय को अलग बनाने वाली बात इसकी वस्तुओं को संग्रहित करने की सोच है. टीम अपने दृष्टिकोण को "बॉटम-अप क्यूरेशन" कहती है, जिसे जानबूझकर हस्तनिर्मित रखा गया है.

5 hours ago

3C फ्रेमवर्क से बंगाल की आर्थिक पुनर्बहाली को मिलेगी नई दिशा

बंगाल की चुनौती संसाधनों की कमी नहीं है. वास्तविक समस्या यह है कि राज्य अपनी मौजूदा संपत्तियों को एक प्रभावी आर्थिक रणनीति में बदलने में विफल रहा है.

11 hours ago

भारत-जापान साझेदारी और मानव-केंद्रित एआई का भविष्य

प्रोफेसर सी. राज कुमार लिखते हैं, 'भारत और जापान एक ऐसे मोड़ पर खड़े हैं जहां वे AI के लिए चौथा और मौलिक मार्ग विकसित कर सकते हैं.

5 days ago

ईरान को ‘अनफ्रीज’ करना: असली चुनौती अब शुरू होगी

सिद्धार्थ अरोड़ा लिखते हैं, 'अमेरिका-ईरान शांति समझौता अंतिम चरण की ओर बढ़ रहा है और रिपोर्टों के अनुसार 60 दिनों की अवधि में लगभग 24 अरब डॉलर जारी किए जा सकते हैं. ऐसे में सबसे महत्वपूर्ण सवाल यह है कि यह पैसा जब ईरान पहुंचेगा, तब उसका क्या होगा?'

6 days ago

2026 की तीसरी तिमाही का ज्योतिष: एआई, संघर्ष और वैश्विक परिवर्तन

ज्योतिषाचार्य विक्रम चन्दीरमानी लिखते हैं कि 2026 के पहले छह महीनों के दौरान इनमें से कई विषय पहले ही उभरने लगे हैं. प्रौद्योगिकी कंपनियों के मूल्यांकन को लेकर चिंताएँ लगातार अधिक स्पष्ट होती जा रही हैं. यह चिंता केवल AI से जुड़ी कंपनियों तक सीमित नहीं है, बल्कि दुनिया की कुछ सबसे मूल्यवान निजी कंपनियों, जैसे स्पेसएक्स, के उच्च मूल्यांकन को लेकर भी देखी जा रही है.

1 week ago


बड़ी खबरें

₹860 करोड़ का कोहिनूर सौदा, राज ठाकरे की चुप्पी

एक राजनेता एक रियल एस्टेट सौदे में प्रवेश करता है. एक सरकारी संस्था से जुड़ी वित्तीय कंपनी ₹225 करोड़ का निवेश करती है. फिर वही संस्था ₹135 करोड़ के नुकसान के साथ उस सौदे से बाहर निकलती है.

4 hours ago

मिडिल ईस्ट प्रैक्टिस के लिए प्राइमस पार्टनर्स ने मोहन दोईफोडे को बनाया MD

पूर्व डेलॉइट कंसल्टिंग लीडर GCC क्षेत्र में कंपनी के विस्तार और क्लाइंट संबंधों को देंगे नई दिशा

4 hours ago

GDP से आगे: क्यों भारत की प्रगति का पैमाना सिर्फ आर्थिक वृद्धि नहीं, बल्कि खुशहाली और जीवन गुणवत्ता भी होना चाहिए

पूर्व उत्तर प्रदेश मुख्य सचिव और लेखक आलोक रंजन का मानना है कि भारत की विकास यात्रा को केवल आर्थिक उत्पादन तक सीमित नहीं रहना चाहिए. उनके अनुसार, खुशहाली, जीवन की गुणवत्ता, शिक्षा, स्वास्थ्य और समावेशी विकास को भी प्रगति का महत्वपूर्ण पैमाना बनाया जाना चाहिए.

9 hours ago

Truhome Finance को 3,000 करोड़ रुपये के आईपीओ के लिए सेबी की मंजूरी

कंपनी के कुल एयूएम में 57.37 प्रतिशत हिस्सा हाउसिंग लोन का है, जबकि 39.22 प्रतिशत हिस्सा लोन अगेंस्ट प्रॉपर्टी का है. अन्य ऋण उत्पादों की हिस्सेदारी 3.41 प्रतिशत है.

5 hours ago

दुनिया ने बनाया युवा संस्कृति का संग्रहालय, भारत को चाहिए ऐसे दर्जनों संग्रहालय

इस संग्रहालय को अलग बनाने वाली बात इसकी वस्तुओं को संग्रहित करने की सोच है. टीम अपने दृष्टिकोण को "बॉटम-अप क्यूरेशन" कहती है, जिसे जानबूझकर हस्तनिर्मित रखा गया है.

5 hours ago