✕

होम / एक्सपर्ट ओपिनियन / SEBI का 'लाइसेंस राज' शेयर बाजार में मचा रहा है अफरा-तफरी, जानिए कैसे?

SEBI का 'लाइसेंस राज' शेयर बाजार में मचा रहा है अफरा-तफरी, जानिए कैसे?

भारतीय शेयर बाजार में मांग और आपूर्ति पर SEBI के अत्यधिक सख्त नियमों का असर पड़ रहा है.

बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 1 year ago

1950 से 1980 के दशक के बीच, भारत में 'लाइसेंस राज' नामक एक व्यवस्था थी, जहां सरकारों ने व्यवसायों पर कड़ी पकड़ बनाए रखी. व्यापारियों को कड़े लाइसेंस नियमों और कई शर्तों का पालन करना पड़ता था. इन मुश्किल शर्तों के कारण व्यवसाय अक्सर कुछ न कुछ नियम तोड़ने के लिए मजबूर हो जाते थे, जिससे सरकारी बाधाएं और लालफीताशाही बढ़ जाती थी.  आज के समय में, बाजार नियामक SEBI, जिसे माधबी पुरी बुच की अध्यक्षता में चलाया जा रहा है, फिर से एक ऐसी सख्त नीति लागू कर रहा है जिसे 'लाइसेंस राज' जैसा बताया जा रहा है. यही नीति हाल ही में बाजार में गिरावट का एक मुख्य कारण बनी.

सेबी की इस 'लाइसेंस राज' जैसी नीति का असर हाल ही में तब दिखा जब उसने म्यूचुअल फंड्स (MFs), जो भारत के सबसे बड़े निवेशक हैं, को शेयर बाजार में तेज़ी से खरीदने या बेचने पर रोक लगाने का आदेश दिया. पिछले कुछ वर्षों से, म्यूचुअल फंड्स विदेशी निवेशकों (FPIs) के विपरीत भारतीय बाजार को स्थिर बनाए रखने में मदद करते थे. लेकिन सेबी के इस नए सर्कुलर ने म्यूचुअल फंड्स को बाजार में सक्रिय रूप से खरीदारी करने से रोक दिया, जिससे उद्योग में डर का माहौल बन गया. 

अगस्त में सेबी ने घोषणा की कि म्यूचुअल फंड्स को अब 'इंसाइडर ट्रेडिंग' नियमों के तहत और सख्ती से नियंत्रित किया जाएगा. यह नियम पहले से लागू थे, लेकिन अब सेबी ने इसे और सख्त बना दिया. सेबी ने म्यूचुअल फंड्स की स्वयं-नियामक संस्था (AMFI) को दो हफ्तों के अंदर एक मानक प्रक्रिया (SOP) तैयार करने के लिए कहा. यह प्रक्रिया 2 नवंबर से लागू होनी थी, जिसका उद्देश्य बाजार में गलत गतिविधियों की पहचान और रोकथाम करना था. 

इससे पहले भी, सेबी के मार्जिन से जुड़े नियमों ने बाजार की धारणा को खराब कर दिया था. अब जब AMFI द्वारा तैयार की गई SOP लागू हुई, तो बाजार में और अधिक उथल-पुथल मच गई. निफ्टी और सेंसेक्स में गिरावट लगातार बढ़ रही है क्योंकि म्यूचुअल फंड्स खरीदारी में रुचि नहीं दिखा रहे हैं. यह स्थिति तब है जब बाकी वैश्विक बाजार स्थिर हैं और अमेरिकी बाजार नए ऊंचाई पर पहुंच रहे हैं. भारतीय बाजार का मूल्यांकन (PE रेशियो) भी अमेरिका और कई अन्य देशों के मुकाबले कम है. 

SEBI और AMFI ने ऐसा क्या किया जिससे म्यूचुअल फंड्स घबरा गए?  

सेबी के नए नियमों (SOP) के तहत, म्यूचुअल फंड्स को हर हफ्ते तीन स्तर के अलर्ट तैयार करने होंगे ताकि संदिग्ध ट्रेडिंग गतिविधियों का पता लगाया जा सके. पहला स्तर- बड़े, मिड-कैप और स्मॉल-कैप शेयरों के लिए ट्रेडिंग वॉल्यूम और वॉल्यूम-वेटेड एवरेज प्राइस (VWAP) पर आधारित होगा. दूसरा स्तर- ट्रेडिंग के दौरान कीमतों में बदलाव, ब्लॉक ट्रेड्स और ट्रेडिंग के एक घंटे के भीतर शेयरों की वॉल्यूम पर ध्यान देगा. तीसरा स्तर- सभी संदिग्ध अलर्ट की आगे जांच होगी, और अगर कुछ गलत पाया गया तो फंड मैनेजर या डीलर को जांच पूरी होने तक छुट्टी पर भेज दिया जाएगा।  

VWAP क्या है और इससे डर क्यों?  

VWAP एक तकनीकी इंडिकेटर है, जो किसी शेयर का औसत मूल्य उसकी कीमत और ट्रेडिंग वॉल्यूम के आधार पर बताता है. यह किसी भी समय अवधि या पूरे दिन के लिए हो सकता है. लेकिन SOP में VWAP के लिए कोई समय अवधि नहीं बताई गई है, जिससे व्यापारी पूरे दिन के VWAP पर ध्यान देते हैं. म्यूचुअल फंड्स के बड़े ट्रेडर्स एक दिन में 30 से 100 ऑर्डर करते हैं. लेकिन अगर उनके ऑर्डर VWAP से बहुत दूर होते हैं, तो उन्हें "फ्रंट रनिंग" (गलत तरीके से ट्रेडिंग) या लालफीताशाही के जाल में फंसने का डर है. 

इस डर के कारण, ट्रेडर्स अब केवल दिन के आखिरी 30-60 मिनट में खरीदारी या बिक्री करेंगे ताकि VWAP के करीब रह सकें. अगर किसी ट्रेडर ने गिरते बाजार में कम कीमत पर खरीदने के लिए बार-बार अपने ऑर्डर में बदलाव किया, तो उसे VWAP से दूर जाने का जोखिम होगा, जिससे उसे नियमों का उल्लंघन करने का डर रहेगा. सेबी के इन नियमों ने म्यूचुअल फंड्स को इतना डरा दिया है कि वे फ्री होकर ट्रेडिंग करने की बजाय "लाइसेंस राज" जैसे हालात महसूस कर रहे हैं.

क्यों घबराए म्यूचुअल फंड्स (MFs)?

नई SOP के तहत, VWAP (वॉल्यूम-वेटेड एवरेज प्राइस) और बाजार में भागीदारी के आधार पर एक मैट्रिक्स तैयार किया गया है, जो "अलर्ट" जनरेट कर सकता है और इसे संदिग्ध गतिविधि माना जा सकता है. व्यवहारिक रूप से, चूंकि एक सामान्य ट्रेडर एक दिन में 30 से 100 ट्रेड करता है, इसलिए बाजार की परिस्थितियां कभी-कभी FPI (विदेशी पोर्टफोलियो निवेशक) के बड़े बेचे गए ऑर्डरों से मेल नहीं खा पातीं, खासकर पहले 90 मिनट और आखिरी 90 मिनट में, जब सबसे ज्यादा ट्रेड्स होते हैं.

उदाहरण: मान लीजिए, अगर FPI सुबह के समय किसी स्टॉक की 70% वॉल्यूम बेचने का निर्णय लेते हैं और भारतीय म्यूचुअल फंड वही स्टॉक खरीदने का चाहता है, तो म्यूचुअल फंड को दिनभर खरीदारी करनी होगी और तय वॉल्यूम के प्रतिशत से ज्यादा नहीं खरीद सकता, ताकि वे VWAP या वॉल्यूम बेंचमार्क से बाहर न जाएं और संदिग्ध गतिविधि के तहत जांच में न फंसे.

क्या पहले से मुश्किलें थीं?

2019 में, सेबी ने म्यूचुअल फंड्स के निवेश के लिए स्टॉक्स को बड़े, मिड और स्मॉल-कैप में पुनः वर्गीकृत किया था. म्यूचुअल फंड्स को अब इन वर्गों के बाहर के स्टॉक्स में निवेश करने की अनुमति नहीं है. अब, हाल ही में आई सर्कुलर ने म्यूचुअल फंड्स के कामकाज पर और अधिक प्रतिबंध लगा दिए हैं, जिससे निवेशकों के लिए अच्छा रिटर्न कम हो सकता है. 

यह म्यूचुअल फंड्स के लिए एक असमान खेल का मैदान पैदा करता है, जिससे निवेशक म्यूचुअल फंड्स से दूर जा सकते हैं. यह बाजार की ईमानदारी और मूल्य निर्धारण प्रक्रिया के खिलाफ हो सकता है. म्यूचुअल फंड्स के उद्योग के लोग चुपचाप यह मानते हैं कि वे बेबस हैं, जबकि SIPs (सिस्टमेटिक इन्वेस्टमेंट प्लान) से हर महीने 25,000 करोड़ रुपये से ज्यादा आ रहे हैं. जल्द ही, जब निवेशक यह देखेंगे कि उनके निवेश से अच्छे रिटर्न नहीं मिल रहे, तो वे अपना पैसा अन्य निवेश विकल्पों में लगा सकते हैं और म्यूचुअल फंड्स को छोड़ सकते हैं.

मार्जिन फंडिंग पर कड़ी नियमावली

उपर्युक्त सख्त नियमों के अलावा, अक्टूबर में एक और नियामक सर्कुलर आया, जिसमें 1010 स्टॉक्स, ज्यादातर छोटे और मिड-कैप श्रेणी के, को 'कोलैटरल' (संपत्ति) की लिस्ट से बाहर कर दिया गया. ये स्टॉक्स अब मार्जिन ट्रेडिंग फसलिटी (MTF) के लिए पंजीकरण नहीं कर सकते थे. यह शेयर बाजारों के लिए एक और बड़ा झटका था. अक्टूबर तक, एक्सचेंजों के क्लियरिंग कॉर्पोरेशंस 1730 स्टॉक्स को मार्जिन के रूप में स्वीकार कर रहे थे, लेकिन नवम्बर से यह लिस्ट घटकर केवल 700 स्टॉक्स रह गई. अब बैंक और एनबीएफसी (नॉन-बैंकिंग फाइनेंस कंपनियां) उन स्टॉक्स को लोन के लिए स्वीकार नहीं कर सकतीं, जो लिस्ट में नहीं हैं, या फिर उन्हें ज्यादा पैसे नहीं देंगे. 

जब यह नया नियम लागू हुआ, बाजार अपने उच्चतम स्तर पर थे, और स्टॉकब्रोकरों का MTF बुक लगभग 73,500 करोड़ रुपये था. लेकिन नवंबर में नए नियम के चलते अचानक ही पैनिक सेलिंग (घबराहट में बिक्री) शुरू हो गई, क्योंकि कई निवेशक अचानक से अतिरिक्त मार्जिन (सुरक्षा राशि) नहीं ला पा रहे थे, जिससे स्टॉक्स की कीमतें गिरने लगीं और छोटे तथा मिड-कैप शेयरों में भारी नुकसान हुआ. इसके साथ ही, एक्सचेंजों ने कुछ स्टॉक्स को ग्रेडेड सर्विलांस में डाल दिया और उनके सर्किट फिल्टर्स बढ़ा दिए, जिससे इन स्टॉक्स में और भी बिक्री हुई.

संक्षेप में कहे तो नवंबर में कई नियामक कदम एक साथ आए, जिससे छोटे और मिड-कैप स्टॉक्स की डिमांड और सप्लाई में भारी गड़बड़ी हुई और बाजार में भारी गिरावट आई. यह सभी कदम नीतिगत कारणों से थे, न कि स्टॉक्स के बुनियादी तथ्यों (फंडामेंटल्स) के कारण.

चुनाव और शेयर बाजार

अगर चुनावों के पास बाजार में गिरावट आती है, तो यह मतदाताओं की भावनाओं पर बुरा असर डाल सकता है और सरकार के खिलाफ जा सकता है. मार्च में, जब राष्ट्रीय चुनावों की तिथियाँ घोषित की गईं, तो SEBI के प्रमुख माधुरी पुरी बुच ने छोटे और मिड-कैप स्टॉक्स में "अत्यधिक उत्साह", "अनियंत्रित मूल्यांकन", और "फंडामेंटल्स से समर्थन नहीं" जैसे बयान दिए. ऐसे बयान चुनावों के करीब होने पर निवेशकों के मनोबल को गिरा सकते हैं, क्योंकि विदेशी निवेशक सतर्क हो जाते हैं और घरेलू खुदरा निवेशक भी डर जाते हैं जब बाजार गिरते हैं और छोटे तथा मिड-कैप स्टॉक्स में ज्यादा नुकसान होता है. 

इस बार भी, जब SEBI के म्यूचुअल फंड्स से जुड़े सख्त नियम और मार्जिन प्लेज का आदेश लागू हुआ, तब महाराष्ट्र में चुनाव होने वाले थे, जो देश का सबसे बड़ा शेयर बाजार निवेशक राज्य है. क्या हमें SEBI द्वारा पैदा की गई इस स्थिति पर अधिक ध्यान देना चाहिए? यह एक कहानी है जिसे मैं बाद में बताऊंगा. 

(लेखक- पलक शाह, BW रिपोर्टर. पलक शाह ने "द मार्केट माफिया-क्रॉनिकल ऑफ इंडिया हाई-टेक स्टॉक मार्केट स्कैंडल एंड द कबाल दैट वेंट स्कॉट-फ्री" नामक पुस्तक लिखी है. पलक लगभग दो दशकों से मुंबई में पत्रकारिता कर रहे हैं, उन्होंने द इकोनॉमिक टाइम्स, बिजनेस स्टैंडर्ड, द फाइनेंशियल एक्सप्रेस और द हिंदू बिजनेस लाइन जैसी प्रमुख वित्तीय अखबारों के लिए काम किया है).
 


टैग्स
सम्बंधित खबरें

कविता में एक शोकगीत: मेरे मित्र और बैचमेट, हेमचंद सिरोही, IAS

केजे अल्फोंस लिखते हैं, सेवानिवृत्त आईएएस अधिकारी और बिहार के पूर्व राज्य चुनाव आयुक्त के रूप में, हेमचंद सिरोही को प्रशासनिक कुशलता, जन-केंद्रित शासन और जनसेवा में योगदान के लिए व्यापक सम्मान प्राप्त था. उनके योगदानों में महाबोधि मंदिर को यूनेस्को की विश्व धरोहर की मान्यता दिलाना और जमीनी स्तर पर विकास की पहल शामिल थीं.

5 days ago

दो दुनियाओं के बीच जिंदगी: उथल-पुथल भरे समय की चुनौती

लेखक के अनुसार, हमारे आसपास की दुनिया उतनी नहीं बदली है, जितनी हमारे दिमाग के भीतर की दुनिया बदल गई है. लगातार आती खबरों, सोशल मीडिया और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस से पैदा होने वाली चिंताओं के इस दौर में चुनौती है अपना ध्यान फिर से अपने नियंत्रण में लेना और उन चीजों पर फोकस करना, जिन्हें हम नियंत्रित कर सकते हैं.

5 days ago

कलाकार की अनंत रेखाएं: जोगेन चौधरी को श्रद्धांजलि

87 वर्ष की उम्र में दुनिया को अलविदा कहने वाले प्रख्यात कलाकार अपने पीछे ऐसी विशिष्ट कला छोड़ गए हैं, जो उनकी खास क्रॉस-हैचिंग शैली, असामान्य रेखाओं और गहराई से मानवीय चित्रों के लिए पहचानी जाती है.

5 days ago

समुद्र मंथन का अर्थशास्त्र: समृद्धि के लिए विरोधी शक्तियों की जरूरत क्यों है

लेखिका प्रियंका शर्मा कैंतुरा इस लेख में बताती हैं कि देवताओं, असुरों और लक्ष्मी के प्राकट्य की प्राचीन कथा प्रतिस्पर्धा, सहयोग और धन सृजन के बारे में क्या सीख देती है.

1 week ago

जेमी बीटन: असाधारण दिमाग और अरबों डॉलर के कारोबार के पीछे ज्योतिषीय गणना

क्रिमसन एजुकेशन के संस्थापक की शैक्षणिक महत्वाकांक्षा, उद्यमशीलता में उभार और 2027 की संभावनाओं का ज्योतिषीय विश्लेषण

1 week ago


बड़ी खबरें

शेयर बाजार में तूफानी तेजी, सेंसेक्स 1,233 अंक उछला; निवेशकों की दौलत में ₹8 लाख करोड़ का इजाफा

सोमवार, 2 नवंबर को बीएसई सेंसेक्स और एनएसई निफ्टी दोनों में जोरदार तेजी दर्ज की गई. कारोबार के दौरान सेंसेक्स 75,692 और निफ्टी 23,440 के स्तर को पार कर गए. दोनों प्रमुख सूचकांक लगातार तीसरे कारोबारी सत्र में बढ़त के साथ बंद हुए.

9 minutes ago

कैंसर की 543 दवाएं होंगी सस्ती, 9 नवंबर से लागू होंगी नई कीमतें; मरीजों को मिलेगी बड़ी राहत

इस व्यवस्था के तहत कई प्रमुख कैंसर दवाओं की कीमतों में कमी की गई है. इनमें 20 से अधिक प्रकार के कैंसर के इलाज में इस्तेमाल होने वाली इम्यूनोथेरेपी दवाएं शामिल हैं.

59 minutes ago

विदेशी और MF निवेशकों को मिल सकती है टैक्स राहत, सेबी ने सरकार को भेजा प्रस्ताव

इस प्रस्ताव का उद्देश्य निवेशकों को म्यूचुअल फंड में निवेश बनाए रखने के लिए प्रोत्साहित करना है. मौजूदा व्यवस्था में एक स्कीम से दूसरी स्कीम में स्विच करने को यूनिट्स की बिक्री माना जाता है और इस पर लागू नियमों के अनुसार कैपिटल गेन टैक्स देना पड़ता है.

3 hours ago

AAAI ने बनाई मीडिया काउंसिल, WPP, ओमनीकॉम, पब्लिसिस, हवास और मैडिसन के वरिष्ठ अधिकारी होंगे शामिल

भारतीय विज्ञापन एजेंसियों का संगठन AAAI मीडिया इंडस्ट्री के सामने उभरती चुनौतियों पर चर्चा और आपसी सहयोग बढ़ाने के लिए नई मीडिया काउंसिल बनाएगा. ओमनीकॉम मीडिया के कार्तिक शर्मा को काउंसिल का अध्यक्ष बनाया गया है.

5 hours ago

मार्च 2027 तक 6.75-7% तक आ सकती है 10 साल के सरकारी बॉन्ड की यील्ड: SBI रिसर्च

SBI रिसर्च की रिपोर्ट के अनुसार, अगर RBI रेपो रेट में 50 बेसिस पॉइंट की बढ़ोतरी कर इसे 6 फीसदी तक पहुंचा देता है, तब भी 10 साल के सरकारी बॉन्ड की यील्ड 6.75 से 7 फीसदी के दायरे में रह सकती है.

5 hours ago