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महंगाई दर को कैसे काबू किया जा सकता है, पढ़िए एक्सपर्ट ओपिनियन

केंद्र और राज्य सरकारों को अपने खर्चों में कटौती करनी चाहिए. पिछले कुछ सालों में सरकार में बैठे लोग हों या उससे जुड़े लोग, उनके खर्चों में कटौती के बजाय बढ़ोत्तरी जरूर हो गई है.

बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 3 years ago

अजय शुक्ल
(वरिष्ठ पत्रकार)

मानसून की अच्छी बारिश और वैश्विक आर्थिक स्थित की अनुकूलता से जुलाई महीने में महंगाई दर घटकर 6.71% पर आ गई है. बावजूद इसके खाद्य वस्तुओं पर महंगाई नियंत्रण में नहीं है. यह अभी भी हर घर के रसोई पर हावी है. मध्य वर्ग की आमदनी जिस औसत में घटी है, उस औसत में उसे कोई समाधान नहीं मिल सकता है.

नागरिकों की कमर क्यों टूट रही
बैंकों के कर्ज पर ब्याज दर बढ़ने से नागरिकों की कमर टूट रही है. महंगाई दर कम होने का कारण प्राकृतिक अधिक है, नीतिगत कम. ऐसे में जरूरी है कि नीति नियंता और सरकार इसके लिए स्थाई समाधान खोजें. हम जब इस पर चर्चा करते हैं तो कुछ अहम मुद्दे सामने आते हैं. केंद्र की जनकल्याणकारी योजनाओं के लिए 16.2 लाख करोड़ रुपये कर्च के मुकाबले देनदारी 23.2 लाख करोड़ रुपये है.

सरकारों को अपने खर्चों में कटौती करनी चाहिए
केंद्र और राज्य सरकारों को अपने खर्चों में कटौती करनी चाहिए. हमने पिछले कुछ सालों में देखा है कि सरकार में बैठे लोग हों या उससे जुड़े लोग, उनके खर्चों में कटौती के बजाय बढ़ोत्तरी जरूर हो गई है. सरकारी क्षेत्र में अब छोटे-छोटे अधिकारियों को भी लग्जरी गाड़ियां, वातानुकूलित दफ्तर दे दिये गये हैं, जो प्रदूषण के साथ ही खर्च और अर्थव्यवस्था पर असर डाल रहे हैं, जबकि यह बजट रोजगार सृजन पर खर्च हो तभी महंगाई-बेरोजगारी और गरीबी पर काबू पाया जा सकता है. केंद्र सरकार के बजट से स्पष्ट रूप से परिलक्षित होता है कि सरकार का खर्च बढ़ रहा है और उसकी पूर्ति के लिए उत्पादकता को नहीं बल्कि कर्ज को साधा जा रहा है.

बाजार से अंधाधुंध कर्ज उठा रही सरकार
सरकार की स्थिति यह है कि वो अपने खर्च को पूरा करने के लिए बाजार से अंधाधुंध कर्ज उठा रही है. मोदी सरकार के बजट में ही देखिये. 44% बजट कर्ज से बना है जबकि पिछले कर्ज ब्याज चुकाने में 25% खर्च हो रहा है. स्पष्ट है कि 39.45 लाख करोड़ के बजट में 17.4 लाख करोड़ कर्ज के रुपये हैं. अगर सरकार की आय और ब्याज़ का अनुपात देखें तो यह 37% है. इस गंभीर आर्थिक स्थिति में, जब सरकार आय से ज़्यादा खर्च कर रही हो, तब जनता महंगाई से राहत और रोज़गार बढ़ाने की उम्मीद कैसे कर सकती है?

क्रिप्टो करेंसी से पड़ेगा असर
इन सब के बीच वैश्विक साइबर अर्थव्यवस्था पर केंद्रित अमेरिकी शोध फर्म साइबरस्पेस वेंचर्स की बुधवार को एक रिपोर्ट जारी की, जिसमें बताया गया कि क्रिप्टो करेंसी से जुड़े अपराधों के चलते 2025 तक वैश्विक अर्थव्यवस्था को 30 बिलियन डॉलर का नुकसान हो सकता है. हमारे देश में भी क्रिप्टो करेंसी का चलन काफी तेजी से बढ़ा है और उसमें लगातार इजाफा हो रहा है. इससे भी भारत की अर्थव्यवस्था पर गंभीर असर पड़ेगा क्योंकि क्रिप्टों के जरिए जो बड़ी रकम भारत से जा रही है, वो भी अर्थव्यवस्था को खराब करेगी.

साइबर क्राइम बढ़ रहा
वैश्विक स्तर पर साइबर क्राइम की वजह से होने वाला नुकसान हर साल 15 फीसदी बढ़कर 2025 तक 10.5 ट्रिलियन डॉलर तक पहुंचने की उम्मीद है, जबकि 2015 में यह 3 ट्रिलियन डॉलर था. भारत अभी अपनी अर्थव्यवस्था 5 ट्रिलियन होने की उम्मीद सजाये बैठा है. ऐसे में यह कारण भी महंगाई के लिए गंभीरता से बढ़ रहा है.

राज्यों की वित्तीय हालत काफी खराब
आपने पिछले रविवार को नीति आयोग की बैठक में देखा कि शासी परिषद में कुछ राज्य सरकारों ने मांग की कि जीएसटी लागू करने से उनके राजस्व में कमी आई  है, इसलिए उनकी क्षतिपूर्ति पांच साल और जारी रखी जाए. राजस्व में भारी गिरावट और कोरोना महामारी के कारण राज्यों की वित्तीय हालत काफी खराब है. आरबीआई की रिपोर्ट में यह भी स्पष्ट हुआ कि गैर भाजपा शासित राज्यों की आर्थिक स्थिति अधिक खराब है क्योंकि उनको उचित मदद केंद्र सरकार नहीं दे रहा है.

इन राज्यों की हालत ज्यादा खराब
रिपोर्ट के मुताबिक बिहार, केरल, पंजाब, राजस्थान और पश्चिम बंगाल वित्तीय हालत संकटग्रस्त है. पंजाब में 2017-21 में कुल खर्च में राजस्व व्यय का अनुपात सबसे ज्यादा (80-95 फीसदी के बीच) रहा था. राज्य सरकार का कहना है कि पूंजीगत खर्च कम इसलिए है क्योंकि वेतन, पेंशन, ब्याज भुगतान पर खर्च ऊंचा है. अनुमान है कि 2022-23 में पंजाब ने जिन खर्चों का वादा किया था, उन पर राजस्व का 70 फीसदी हिस्सा खर्च कर दिया गया. ऐसे में महंगाई बढ़ना स्वाभाविक है.

पेट्रोल और डीजल पर टैक्स कम करने चाहिए
अर्थ विशेषज्ञों का मानना है कि बढ़ती महंगाई पर काबू पाने के लिए ठोस उपाय के तौर पर सरकार को पेट्रोल और डीजल पर टैक्स कम करने चाहिए, क्योंकि माल भाड़ा और उत्पादन लागत इसके कारण बढ़ती है. ऐसे में ट्रांसपोर्टेशन लागत बढ़ने का खर्च व्यापारी दाम बढ़ाकर पूरा करता है, जिससे महंगाई बढ़ जाती है. सरकार को रोजगार बढ़ाने चाहिए और अपने खर्च कम करने चाहिए. फल सब्जियों सहित अन्य खाद्य वस्तुओं के उत्पादन को बढ़ाने की नीति बनाई जाए, उसकी मांग और आपूर्ति के अनुपात को सुधारा जाये, तभी अर्थव्यवस्था सकारात्मक दिशा में आगे बढ़ेगी. जब तक ऐसा नहीं होता, तो मौसमी आधार पर लोगों को कोई बढ़ी राहत नहीं दी जा सकती है.

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