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पत्नी के फोन से फंसा केतन पारेख, चप्पे-चप्पे पर SEBI ने बिछाया था जाल...जानिए कैसे?

केतन पारेख कई नंबरों का इस्तेमाल फ्रंट-रनर (FR) संस्थाओं को ट्रेडिंग निर्देश देने के लिए कर रहा था, लेकिन वही नंबर सेबी के लिए ट्रंप कार्ड साबित हो गए.

बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 1 year ago

भारत के सबसे बदनाम स्टॉक मार्केट मैनिपुलेटर केतन पारेख को पहली बार 2003 में सेबी (SEBI) ने 14 साल के लिए बैन कर दिया था. लेकिन लगभग दो दशकों तक यह चर्चा थी कि पारेख छुपकर काम कर रहे हैं. वह हवाला एजेंटों के जरिए पैसे का लेन-देन करते थे और अपने नाम से नहीं, बल्कि अन्य नामों से फ्रंट कंपनियों के जरिए बाजार में निवेश करते थे.

SEBI ने उनके मोबाइल नंबरों का पता लगाकर उनकी साजिश का भंडाफोड़ किया. ये नंबर अलग-अलग नामों पर रजिस्टर्ड थे, लेकिन सब पारेख के मुंबई के घर से जुड़े थे. जहां-जहां पारेख जाते, ये मोबाइल नंबर भी वहीं एक्टिव मिलते. इन नंबरों का इस्तेमाल पारेख ने सिंगापुर के एक ट्रेडर से गोपनीय जानकारी (NPI) लेने के लिए किया, फिर उन्होंने इस जानकारी को अपने नेटवर्क में मौजूद लोगों को शेयर किया, ताकि उनके लिए ट्रेडिंग करवाई जा सके.

SEBI ने कैसे पकड़ा नेटवर्क  

केतन पारेख ने 15 मार्च 2023 को सेबी के ऑफिस में एक अन्य कंपनी (NH सिक्योरिटीज) के मामले में अपनी पहचान साबित करने के लिए आधार कार्ड की कॉपी दी। इस आधार कार्ड में उनका मोबाइल नंबर "XXX0308243" था. इसके अलावा, सेबी की विज़िटर स्लिप पर एक और नंबर "XXX6562996" लिखा हुआ था. सेबी के स्मार्ट जांचकर्ताओं ने इन दो नंबरों की मदद से पारेख के नेटवर्क का पता लगाया. SEBI ने इन नंबरों की जानकारी जुटाई और पाया कि इनमें से एक नंबर पारेख की पत्नी, ममता पारेख के नाम पर रजिस्टर्ड था. यह नंबर 28 मई 2001 से एक्टिव था. ममता का पता वही था, जो केतन पारेख के आधार कार्ड पर लिखा था. इस तरह साबित हुआ कि केतन पारेख अपनी पत्नी के नाम वाले नंबर "XXX0308243" का इस्तेमाल कर रहे थे.

लोकेशन और डेटा का मिलान

सेबी ने ममता पारेख के नंबर की लोकेशन को अन्य नंबरों की लोकेशन से मिलाया. ये नंबर (जो छापों के दौरान मिले थे) गोपनीय जानकारी (NPI) शेयर कर रहे थे और फ्रंट कंपनियों को ट्रेडिंग के आदेश दे रहे थे. लोकेशन डेटा, व्हाट्सएप चैट और आरोपियों के बयानों ने पूरी साजिश का पर्दाफाश किया. सेबी ने इन नंबरों के साथ इस्तेमाल किए गए मोबाइल डिवाइस के IMEI नंबर की जांच की. IMEI नंबर एक यूनिक पहचान कोड होता है. जांच में पाया गया कि कई अलग-अलग नंबर एक ही मोबाइल फोन में इस्तेमाल किए गए थे.

कॉल रिकॉर्ड और लोकेशन जांच

सेबी ने इन नंबरों की कॉल रिकॉर्ड डेटा (CDR) का विश्लेषण किया. रात के समय (रात 9 बजे से सुबह 6 बजे तक) सभी नंबरों की लोकेशन केतन पारेख के घर (ज़वेरी महल, मरीन ड्राइव, मुंबई) की पाई गई. जांच में पता चला कि पारेख ने कई बार अपने नंबर बदले और ये नंबर उनके नाम पर रजिस्टर्ड नहीं थे. ट्रैकिंग से यह भी पता चला कि पारेख ने 27 नवंबर 2022 को मुंबई से जयपुर की फ्लाइट ली और जयपुर, आगरा, मुरैना, और ग्वालियर घूमने के बाद 1 दिसंबर 2022 को ग्वालियर से मुंबई लौटे.

गोपनीय जानकारी और ट्रेडिंग आदेश
 
जांच से पता चला कि संदिग्ध ट्रेड से पहले "जैक/जैक न्यू/जैक लेटेस्ट न्यू/बॉस" नाम से सेव नंबरों से व्हाट्सएप या कॉल के जरिए ट्रेडिंग आदेश मिल रहे थे। इन नंबरों की जांच में यह नंबर केतन पारेख के निकले। केतन पारेख को ये गोपनीय जानकारी सिंगापुर के रोहित सालगांवकर से मिल रही थी. इन निर्देशों के आधार पर, फ्रंट कंपनियों ने ट्रेडिंग की और अनुचित लाभ कमाया.

WhatsApp मैसेज जिसमें केतन पारेख को जन्मदिन की बधाई दी गई

सेबी को एक आरोपी संजय तापड़िया (जो पारेख के लिए फ्रंट रनिंग में शामिल था) के मोबाइल से व्हाट्सएप चैट मिली। इसमें उसने 15 फरवरी 2023 को "जैक लेटेस्ट" (जिसका मोबाइल नंबर XXX5555484 था) को जन्मदिन की बधाई दी. "जैक लेटेस्ट" ने धन्यवाद देते हुए जवाब दिया.  

सेबी ने पाया कि केतन पारेख की जन्मतिथि, जो उनके पैन कार्ड पर दर्ज है, 15 फरवरी 1962 है. इससे यह साबित हुआ कि "जैक लेटेस्ट" कोई और नहीं बल्कि केतन पारेख ही थे, और नंबर XXX5555484 का इस्तेमाल वही कर रहे थे. जब यह साफ हो गया कि केतन पारेख इन नंबरों का उपयोग कर रहे थे, सेबी ने फ्रंट रनर्स के अकाउंट्स में ट्रेडिंग गतिविधियों की जांच की. इसका उद्देश्य यह समझना था कि केतन पारेख गोपनीय जानकारी (NPI) के आधार पर फ्रंट रनर्स को ट्रेडिंग के निर्देश कैसे दे रहे थे.

मोबाइल ट्रेल ने बड़े फ्रंट-रनिंग ऑपरेशन का खुलासा किया 

हाल ही के सेबी आदेश के अनुसार, केतन पारेख ने सिंगापुर के ट्रेडर रोहित सालगांवकर के साथ मिलकर एक असामान्य फ्रंट-रनिंग ऑपरेशन चलाया. सेबी की जांच 20 से अधिक स्थानों तक फैली और इसमें लगभग 65.77 करोड़ रुपये के अवैध लाभ जब्त किए गए. सेबी ने पारेख से जुड़े 22 संस्थाओं के खिलाफ आदेश जारी किया.

जांच में पता चला कि पारेख ने "अंगड़िया" का इस्तेमाल नकदी भेजने के लिए किया, जिसे ब्रोकर उनकी ओर से ट्रेडिंग में इस्तेमाल करते थे. अंगड़िया भारत की पारंपरिक प्रणाली है जिसमें लोग नकदी, गहने और दस्तावेज़ बहुत कम शुल्क पर ले जाते हैं. इस नेटवर्क में विश्वास पर काम होता है और यह बैंकिंग प्रणाली के बाहर चलता है. पारेख के साथ मिलीभगत करने वाले ब्रोकरों में GRD सिक्योरिटीज, सालासार स्टॉक ब्रोकिंग, अनिरुद्ध दमानी, अशोक कुमार दमानी और अन्य शामिल थे, इन संस्थाओं ने पारेख के इशारों पर काम किया.  

SEBI ने कई संस्थाओं के खिलाफ छापेमारी की, जिनमें से अधिकतर पश्चिम बंगाल के कोलकाता में स्थित थे. जांच में यह संदेह हुआ कि पारंपरिक फ्रंट-रनिंग के अलावा, फ्रंट-रनर्स ने जटिल ट्रेडिंग रणनीतियों का उपयोग किया ताकि "बिग क्लाइंट" (एक बड़ा विदेशी फंड) के संभावित ट्रेड्स की जानकारी का लाभ उठाया जा सके. सेबी के अनुसार, सिंगापुर के ट्रेडर रोहित सालगांवकर, जो स्ट्रेट क्रॉसिंग प्राइवेट लिमिटेड के डायरेक्टर हैं, ने मोटिलाल ओसवाल फाइनेंशियल सर्विसेज और नुवामा वेल्थ मैनेजमेंट के साथ एक समझौता किया. इसके तहत उन्होंने "बिग क्लाइंट" के ट्रेड्स को रेफर करने का काम किया.

बिग क्लाइंट के ट्रेडर्स, भारतीय बाजार में ऑर्डर देने से पहले रोहित सालगांवकर से सलाह लेते थे. इस कारण रोहित को बड़े लेन-देन की गोपनीय जानकारी (NPI) मिलती थी, जिसे वह केतन पारेख को देते थे. केतन पारेख ने यह गोपनीय जानकारी प्राप्त कर अपने नेटवर्क को ट्रेडिंग के निर्देश दिए. GRD सिक्योरिटीज के प्रॉपरेटरी ट्रेडिंग अकाउंट को संजय तापड़िया (पारेख के सहयोगी) ने इस्तेमाल किया, इस अकाउंट से NPI के आधार पर ट्रेडिंग की गई.  

सेबी ने पाया कि पारेख से मिली जानकारी के आधार पर फ्रंट-रनर्स ने ट्रेडिंग की. यह जानकारी "बिग क्लाइंट" नामक अमेरिकी फंड हाउस की थी, जो विदेशी पोर्टफोलियो निवेशक (FPI) के रूप में भारत में निवेश करता है. बिग क्लाइंट के नुवामा और मोटिलाल के जरिए किए गए ट्रेड्स, फ्रंट-रनर्स के ट्रेड्स से मेल खाते थे. सेबी ने अपनी जांच में ट्रेडिंग डेटा, इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस से मिली जानकारी, बैंक खाता विवरण, ट्रेडिंग के लिए उपयोग किए गए IP पते, आरोपियों के बयान, केवाईसी (KYC), कॉल डेटा रिकॉर्ड (CDR) आदि को सबूत के रूप में पेश किया.

काम करने का तरीका

जांच में पता चला कि "बिग क्लाइंट" अपने ऑर्डर (जिनमें शेयर का नाम, खरीदने/बेचने की मात्रा और कीमत होती थी) एक ऑर्डर मैसेजिंग सिस्टम FIX के जरिए भेजता था. मोटिलाल और नुवामा के माध्यम से भेजे गए ऑर्डर्स को उनके ट्रेडर्स पूरा करते थे. हालांकि, इन ऑर्डर्स को कब, कितनी मात्रा में और किस कीमत पर पूरा करना है, इसका निर्देश रोहित सालगांवकर देते थे. जांच में यह भी पाया गया कि रोहित सालगांवकर की कंपनी SCPL ने नुवामा और मोटिलाल के साथ एक रेफरल एग्रीमेंट किया था. इस एग्रीमेंट के तहत, SCPL द्वारा "बिग क्लाइंट" के ट्रेड्स से होने वाले ब्रोकरेज के राजस्व का हिस्सा साझा किया जाता था.

रोहित सालगांवकर और केतन पारेख का कनेक्शन 

रोहित सालगांवकर ने 7 मार्च 2024 और 22 जुलाई 2024 को दिए गए अपने बयान में कहा कि "बिग क्लाइंट" के ट्रेड्स को पूरा करने के लिए वह विभिन्न बाजार प्रतिभागियों जैसे विदेशी फंड, भारतीय फंड, शेयर धारकों और केतन पारेख (KP) के साथ संपर्क करते थे. हालांकि, सालगांवकर के अनुसार, "बिग क्लाइंट" के लगभग 90% ट्रेड्स केवल केतन पारेख द्वारा पूरे किए गए. सालगांवकर ने यह भी कहा कि "बिग क्लाइंट" के लिए केतन पारेख के साथ काम करने से पहले उनकी जांच सिर्फ यह सुनिश्चित करने तक सीमित थी कि KP पर भारतीय शेयर बाजार में ट्रेडिंग करने का प्रतिबंध न हो.

उन्होंने सेबी को बताया कि बिग क्लाइंट का डीलर मुझे उस स्टॉक का नाम बताता था जिसमें वे रुचि रखते हैं. मैं विदेशी फंड, भारतीय फंड, अन्य शेयर धारकों और आखिर में केतन पारेख से संपर्क करके शेयर की उपलब्धता चेक करता था. काउंटरपार्टी से पुष्टि मिलने के बाद, मैं बिग क्लाइंट के डीलर को ऑफर की गई मात्रा और कीमत की जानकारी देता था. डीलर की पुष्टि मिलने के बाद डील पूरा होता था, बिग क्लाइंट का डीलर भारतीय ब्रोकर को डील टिकट भेजता था. ट्रेड्स के पूरे होने के बाद, भारतीय ब्रोकर मुझे ब्लूमबर्ग चैट पर पुष्टि भेजता था. कभी-कभी, मुझे बिग क्लाइंट के डीलर से भी पुष्टि मिलती थी. इस प्रक्रिया में, केतन पारेख ने गोपनीय जानकारी (NPI) का उपयोग करते हुए "बिग क्लाइंट" के लिए अधिकतर ट्रेड्स पूरे किए. 

पैटर्न से खुला घोटाले का राज

सेबी ने शेयरों की खरीद-फरोख्त में एक विशेष पैटर्न का पता लगाकर बड़े फ्रंट-रनिंग घोटाले का खुलासा किया. इसे संक्षेप में समझाया जा सकता है:  
खरीद (Buy-Buy-Sell) पैटर्न- जब "बिग क्लाइंट" शेयर खरीदने वाला होता, तो फ्रंट-रनर पहले अपने खाते में शेयर खरीदता (पहला Buy), फिर "बिग क्लाइंट" अपने खाते में शेयर खरीदता (दूसरा Buy), जिससे शेयर का दाम ऊपर चला जाता. इसके बाद फ्रंट-रनर अपने खाते में शेयर बेचकर (Sell) स्थिति समाप्त कर देता और लाभ कमाता.

बेचने (Sell-Sell-Buy) पैटर्न-  जब "बिग क्लाइंट" शेयर बेचने वाला होता, तो फ्रंट-रनर पहले शेयर को शॉर्ट सेल करता (पहला Sell), फिर "बिग क्लाइंट" के बेचने के बाद शेयर खरीदकर (Buy) लाभ कमाता. 

सेबी की जांच से यह सामने आया कि रोहित सालगांवकर और केतन पारेख ने एक साजिश रची थी. इसमें रोहित सालगांवकर ने "बिग क्लाइंट" के संभावित ऑर्डर की गोपनीय जानकारी (NPI) केतन पारेख को दी. केतन पारेख ने इस जानकारी के आधार पर फ्रंट-रनर्स को सीधे या अन्य माध्यमों से ट्रेडिंग के निर्देश दिए. फ्रंट-रनर्स ने "बिग क्लाइंट" के ऑर्डर से पहले संबंधित शेयरों में पोजिशन लेकर अवैध लाभ कमाया.

(लेखक- पलक शाह, BW रिपोर्टर. पलक शाह ने "द मार्केट माफिया-क्रॉनिकल ऑफ इंडिया हाई-टेक स्टॉक मार्केट स्कैंडल एंड द कबाल दैट वेंट स्कॉट-फ्री" नामक पुस्तक लिखी है. पलक लगभग दो दशकों से मुंबई में पत्रकारिता कर रहे हैं, उन्होंने द इकोनॉमिक टाइम्स, बिजनेस स्टैंडर्ड, द फाइनेंशियल एक्सप्रेस और द हिंदू बिजनेस लाइन जैसी प्रमुख वित्तीय अखबारों के लिए काम किया है).


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