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किसी कंपनी के कार्यकलापों पर रिपोर्ट, देश पर हमला नहीं हो सकती!

हिंडनबर्ग फाइनेंशियल रिसर्च कंपनी ने रिपोर्ट में अडानी समूह पर कई दशकों से मार्केट मैनिपुलेशन, अकाउंटिंग फ्रॉड और मनी लॉन्ड्रिंग करने का आरोप लगाया है.

बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 3 years ago

  • अजय शुक्ला, वरिष्ठ पत्रकार

हिंडनबर्ग की रिपोर्ट से पूंजी बाजार हिल गया. निवेशकों को चंद दिनों में ही तकरीबन 15 लाख करोड़ का नुकसान हुआ है. अडानी समूह की कंपनियों में निवेश करने वालों को भी पांच लाख करोड़ रुपये का नुकसान उठाना पड़ा है. अडानी समूह को भी इस रिपोर्ट से बड़ा नुकसान हुआ है. गौतम अडानी दुनिया के तीसरे सबसे अमीर शख्स थे, मगर अब वहां से गिरकर 13वें स्थान पर आ गए हैं. हालात ये हैं कि उनके पास इसका कोई समाधान नहीं है क्योंकि हिंडनबर्ग की रिपोर्ट की विश्वसनीयता दुनिया के पूंजीबाजार में बहुत अधिक है. इस वित्तीय शोध कंपनी ने अडानी समूह से 80 सवाल किये थे, मगर समूह ने जो जवाब दिये हैं, वो किसी को भी बहुत संतुष्ट नहीं कर पा रहे. समूह की कंपनियों के शेयरों की हालत पतली होती जा रही है. हिंडनबर्ग की रिपोर्ट पर अडानी समूह ने 413 पेज का जो जवाब दिया है, उसमें कहा गया है कि रिपोर्ट तथ्यहीन और भारत के विकास एवं अखंडता पर हमला है. समूह के इस जवाब पर तीखी प्रतिक्रियाएं आ रही हैं. उनका यह जवाब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सरकार को भी कटघरे में खड़ा करता है.

अडानी समूह ने उठाए हैं रिपोर्ट पर सवाल
गौतम अडानी समूह ने हिंडनबर्ग की रिपोर्ट को भारत पर साजिश और हमला बताया है. समूह ने 413 पन्नों का जो जवाब जारी किया, उसमें कहा गया है कि लगाए गए सभी आरोप झूठे हैं. जवाब में कहा है कि यह रिपोर्ट किसी खास कंपनी पर किया गया बेबुनियाद हमला नहीं है, बल्कि यह भारत पर किया गया सुनियोजित हमला है. यह भारतीय संस्थानों की आजादी, अखंडता और गुणवत्ता पर किया गया हमला है. यह भारत के विकास की कहानी और उम्मीदों पर हमला है. इस रिपोर्ट का असल मकसद अमेरिकी कंपनियों के आर्थिक फायदे के लिए नया बाजार तैयार करना है. समूह ने कहा कि यह रिपोर्ट गलत जानकारी और आधे-अधूरे तथ्यों को मिलाकर तैयार की गई है. अडानी ने जवाब में हिंडनबर्ग की विश्वसनीयता पर भी सवाल उठाए. उन्होंने कहा कि हिंडनबर्ग ने यह रिपोर्ट लोगों की भलाई के लिए नहीं, बल्कि अपने स्वार्थ के लिए जारी की है. हिंडनबर्ग ने 24 जनवरी को जारी अपनी रिपोर्ट में अडानी समूह को धोखाधड़ी और मनी लॉन्ड्रिंग के जरिए कंपनी को बढ़ाने के आरोप तथ्यों के साथ लगाए थे.

हिंडनबर्ग ने दिया है सवाल का जवाब
हिंडनबर्ग फाइनेंशियल रिसर्च कंपनी ने रिपोर्ट में अडानी समूह पर कई दशकों से मार्केट मैनिपुलेशन, अकाउंटिंग फ्रॉड और मनी लॉन्ड्रिंग करने का आरोप लगाते हुए दावा किया गया था कि समूह की सभी प्रमुख लिस्टेड कंपनियों पर काफी ज्यादा कर्ज है. उनकी सभी कंपनियों के शेयर 85 फीसदी से अधिक ओवरवैल्यूड हैं. अडानी समूह के 413 पेज के जवाब पर प्रतिक्रिया देते हुए हिंडनबर्ग ने कहा कहा कि, धोखाधड़ी पर इस तरह के कार्यकलापों के जवाब में आरोप और बचाव का यह तरीका ठीक नहीं है. आप धोखाधड़ी और मनीलांड्रिंग पर राष्ट्रवाद का पर्दा नहीं डाल सकते. अडानी समूह, हमारी रिपोर्ट को भारत पर सोचा-समझा हमला बता रहा है. ग्रुप अपनी और अपने चेयरमैन की तेजी से बढ़ती आय को भारत के विकास के साथ जोड़ने की कोशिश कर रहा है. हम इससे कतई सहमत नहीं हैं. हम मानते हैं कि भारतीय लोकतंत्र भिन्नताओं को समेटे हुए है. भारत एक उभरती हुई सुपर पावर है, जिसका शानदार भविष्य है. हम यह मानते हैं कि भारत के भविष्य को अडानी समूह ने पीछे ढकेल दिया है. जो खुद को देश के झंडे में लपेट कर लूट मचा रहा है. 

राहुल गांधी के आरोपों को मिला बल
हिंडनबर्ग ने कहा कि हम मानते हैं “धोखा... धोखा ही होता है. भले ही यह दुनिया के सबसे ज्यादा अमीरों में शामिल किसी शख्स ने ही क्यों न किया हो. हमने 88 सवाल अपनी रिपोर्ट में पूछे थे और अदानी समूह ने इनमें से 62 सवालों के सही जवाब ही नहीं दिए हैं. उसने बेजा आरोप लगाकर हमारी रिसर्च को दरकिनार करने की कोशिश की है." बहराल, हिंडनबर्ग की इस रिपोर्ट ने पूंजीबाजार में संकट खड़ा कर दिया है। नरेंद्र मोदी सरकार पर पहले ही विपक्षी नेता राहुल गांधी अडानी-अंबानी जैसे चंद पूंजीपतियों का साथ देकर उद्योग जगत की प्रतिस्पर्धा को खत्म करने का आरोप लगाते रहे हैं. इस रिपोर्ट के आने के बाद उन आरोपों को बल मिल जाता है. जनवरी के तीसरे सप्ताह में ऑक्सफैम की रिसर्च रिपोर्ट आई थी, जिसमें कहा गया था कि 2020 में कोरोना महामारी शुरू होने के बाद से नवंबर 2021 तक जहां अधिकतर भारतीयों को रोजगार संबंधी समस्याओं का सामना करना पड़ा. लोगों को बचत को किसी तरह बचाने के लिए भी संघर्ष जूझना पड़ा था, वहीं इसी दौरान भारतीय अरबपतियों की संपत्ति में 121 फीसदी का इजाफा हुआ था. 

दोनों रिपोर्ट्स पर मंथन देश के लिए जरूरी 
ऑक्सफैम ने 'सर्वाइवल ऑफ द रिचेस्ट: द इंडिया स्टोरी' शीर्षक की रिपोर्ट से यह भी खुलासा हुआ कि भारत के 21 सबसे अमीर अरबपतियों के पास मौजूदा समय में देश के 70 करोड़ लोगों से ज्यादा दौलत है. सिर्फ, पांच फीसदी लोगों का देश की कुल संपत्ति में से 62 फीसदी हिस्सा है. वहीं, देश की निचली 50 फीसदी आबादी के पास सिर्फ तीन फीसदी संपत्ति है. इससे सरकारी नीतियों के कारण दो भारत बनाने का आरोप सही लगता है. हिंडनबर्ग और ऑक्सफैम की रिपोर्ट को एक साथ देखें, तो यह तो साबित हो रहा है कि कुछ पूंजीपति तेजी से बढ़े. उनके बढ़ने को लेकर तमाम विवाद हो सकते हैं मगर एक कंपनी विशेष या वर्ग के बारे में कोई रिपोर्ट, देश की अखंडता या संप्रभुता और विकास पर हमला नहीं हो सकती है. रिपोर्ट के तथ्यों से बचाव के लिए आरोपों से काम नहीं चलेगा बल्कि उसके सवालों का वाजिब जवाब तथ्यात्मक तरीके से देना चाहिए. वैश्विक मंच पर आरोपों के जरिए जवाब देने का तरीका कभी भी सराहा नहीं जा सकता. बहराल, जो भी हो ये दोनों रिपोर्ट्स देश की अर्थनीति पर चिंता और चिंतन का इशारा करती हैं. यह मंथन पूरे देश के लिए जरूरी है.


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