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मानसून में बाढ़, गर्मियों में जल संकट – वर्षा जल संचयन की विफलता का प्रतिबिंब

भारत का जल संकट जल की कमी की समस्या नहीं है - यह मूलतः भंडारण और वितरण की चुनौती है. केवल 8% वर्षा जल का ही कुशलता से संग्रहण होता है, इसलिए वर्षा जल संचयन अभी भी एक कम आंका गया समाधान बना हुआ है.

बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 1 year ago

उत्तर भारत में अत्यधिक मानसूनी वर्षा हो रही है, जिससे बाढ़ जैसी स्थिति उत्पन्न हो रही है, सामान्य जीवन बाधित हो गया है, और कुछ राज्यों में एक ही दिन में 1,272 प्रतिशत अधिक वर्षा दर्ज की गई है. यह क्षेत्र 2013 के बाद से अब तक का सबसे अधिक वर्षा वाला मानसून देख रहा है और स्थिति अगले कुछ दिनों तक बनी रह सकती है, भारतीय मौसम विभाग (IMD) के अनुसार कई स्थानों पर रेड और ऑरेंज अलर्ट जारी किए गए हैं.

लगभग 3.5 ट्रिलियन अमेरिकी डॉलर की अर्थव्यवस्था की जीवनरेखा, वार्षिक मानसून भारत की 70 प्रतिशत वर्षा लेकर आता है, जिससे खेतों की सिंचाई होती है और जलाशय व जलभृत (एक्विफर) पुनः भरते हैं. भारी वर्षा के बावजूद, भारत जल संकट से जूझता रहता है.

भारत का जल संकट जल की कमी की समस्या नहीं है - यह मूलतः भंडारण और वितरण की चुनौती है. मानसून में अचानक बाढ़ से लेकर गर्मियों में गंभीर जल संकट तक, भारत चरम सीमाओं के बीच झूलता रहता है. यह विरोधाभास एक मौलिक संरचनात्मक दोष की ओर संकेत करता है - वर्षा जल को प्रभावी ढंग से संग्रहित करने में हमारी अक्षमता.

हालांकि भारत को प्रतिवर्ष औसतन लगभग 3880 से 4000 बिलियन क्यूबिक मीटर (BCM) वर्षा प्राप्त होती है, उसमें से केवल 8 प्रतिशत जल ही कुशलतापूर्वक संग्रहित हो पाता है और भूजल भृतों तक पहुंच पाता है. अधिकांश वर्षा जल सतही बहाव के रूप में बर्बाद हो जाता है. पर्याप्त वर्षा के बावजूद, जल प्रबंधन की खराब प्रणालियों के कारण जल संकट उत्पन्न होता है, क्योंकि देश इस जल को प्रभावी रूप से संग्रहीत और उपयोग करने में असमर्थ है. जल की बर्बादी, सीमित भंडारण अवसंरचना, और प्रभावी पुनर्चक्रण प्रणालियों की कमी ने भारत के जल संकट को और भी गंभीर बना दिया है.

रिपोर्टों के अनुसार, भारत विश्व में सबसे अधिक भूजल निकालने वाला देश है, जो प्रति वर्ष लगभग 240 BCM भूजल निकालता है, जो कि चीन और अमेरिका की संयुक्त मात्रा से भी अधिक है. यह वैश्विक स्तर पर निकाले गए भूजल का 25 प्रतिशत है. भारत एक अत्यंत शुष्क भविष्य की ओर बढ़ रहा है, जिसमें न केवल जल स्रोतों को पुनः भरने की आवश्यकता है, बल्कि जल के स्रोत और उपयोग की प्रणाली को भी बदलने की आवश्यकता है.

जहाँ वर्षा जल संचयन दशकों से भारत में एक लोकप्रिय नारा रहा है, वहीं वास्तविक स्थिति चिंताजनक है. विभिन्न सरकारी योजनाएँ, स्थानीय पहलें, निजी योजनाएँ और व्यक्तिगत प्रयास वर्षा जल के संग्रहण और पुन: उपयोग को बढ़ावा दे रहे हैं, लेकिन वास्तविक प्रयास बहुत ही कम और बिखरे हुए हैं.

वर्षा जल संचयन एक कम आंका गया जल समाधान है. विशेषज्ञों का मानना है कि यह वास्तव में जल प्रबंधन में एक गेम-चेंजर हो सकता है. वर्षा जल को एकत्रित कर और संग्रहित कर, समुदाय पारंपरिक जल स्रोतों पर अपनी निर्भरता कम कर सकते हैं. यह विधि न केवल जल को संरक्षित करती है, बल्कि भूजल स्तर को पुनः भरने में भी सहायक होती है. बारिश के पानी के संचयन की जरूरत आज पहले से कहीं ज्यादा महसूस की जा रही है. वर्ल्ड वाइड फंड फॉर नेचर के वाटर रिस्क फ़िल्टर ने दिखाया कि 100 शहरों में जिनमें पानी के जोखिम में सबसे तेज बढ़ोतरी होने की संभावना है, उनमें से 30 भारत में हैं, जिनमें दिल्ली, बेंगलुरु और मुंबई शामिल हैं. संयुक्त राष्ट्र और WWF के अनुसार 2030 तक वैश्विक आबादी का आधा हिस्सा गंभीर जल संकट का सामना करेगा.

बारिश का पानी संचयन साफ पानी तक पहुंच में सुधार कर सकता है. वायु प्रदूषण बारिश के पानी को प्रभावित करता है, लेकिन इसे दूषित भूजल को साफ करने की तुलना में अपेक्षाकृत सरल प्रक्रियाओं से उपचारित किया जा सकता है. छतें और खाली तालाब कचरा और प्रदूषक लेकर आते हैं, लेकिन अगर जल संचयन अवसंरचना में कार्यात्मकता और डिजाइन फीचर्स हों तो इन्हें साफ और प्रबंधित किया जा सकता है, ऐसा शहरी जल विशेषज्ञ कहते हैं.

बारिश के पानी को संग्रहित करने और संग्रहीत करने के कई तरीके हैं. एक सस्ती वर्षा जल संचयन प्रणाली आसानी से घरों द्वारा स्थापित की जा सकती है, जिसमें एक सामान्य छत संग्रहण विधि और वर्षा बैरल या बड़े संग्रह टैंक शामिल हैं. छत प्राथमिक जल संचयन क्षेत्र के रूप में कार्य करती है. सबसे सरल प्रणाली में छत के पानी को डाउनस्पाउट या छत की नाली पाइपों के माध्यम से नीचे रखे गए संग्रह कंटेनर या बैरल में निर्देशित करना शामिल है. संग्रह टैंक के प्रवेश द्वार पर एक साधारण फिल्टर या बेसिक फ़िल्टर कपड़ा मलबा हटा सकता है. संचयित वर्षा जल नॉन-ड्रिंकिंग प्रयोजनों के लिए सबसे उपयुक्त है जैसे बागवानी, कार धोना या अन्य गैर-पेय प्रयोजनों के लिए. जाहिर है, बड़े पैमाने पर संचयन के लिए अधिक परिष्कृत प्रणालियाँ मौजूद हैं.

केंद्र का जल शक्ति अभियान जल संरक्षण और जल सुरक्षा को बढ़ावा देता है. आवास और शहरी मामलों के मंत्रालय (MoHUA) वर्षा जल संचयन और जल संरक्षण उपायों की आवश्यकता पर ध्यान केंद्रित करता है. यह कहता है कि 100 वर्ग मीटर या उससे बड़े भूखंड वाली सभी इमारतों में वर्षा जल संचयन अवसंरचना शामिल होनी चाहिए. यह मौजूदा प्रणालियों और प्रक्रियाओं के त्वरित पुनर्गठन की मांग करता है क्योंकि समाजों के लिए वर्षा जल संचयन अब विकल्प नहीं रह गया है. यह एक अनिवार्य नैतिक जिम्मेदारी है. किफायती वर्षा जल संचयन मॉडल विकसित करना इसका लक्ष्य है.

कोई भी प्रयास वर्षा जल संचयन में लगे व्यक्तियों और समाजों के लिए मजबूत प्रोत्साहन प्रदान करने से शुरू होना चाहिए. कई स्थानीय निकाय ऐसे प्रोत्साहन और छूट प्रदान करते हैं. उदाहरण के लिए, ब्रिहन्मुम्बई नगर निगम (BMC) उन आवासीय समाजों को संपत्ति कर में 3 प्रतिशत की छूट देता है जो वर्षा जल संचयन करते हैं. सार्वजनिक जागरूकता और सकारात्मक प्रोत्साहन की आवश्यकता है ताकि व्यक्तिगत और सामुदायिक कार्रवाई को बढ़ावा दिया जा सके. वर्षा जल संचयन को शहरी नियोजन और स्मार्ट सिटी विकास डिज़ाइन का एक मौलिक तत्व बनाना महत्वपूर्ण है.

वर्षा जल संचयन जल आपूर्ति को प्रभावी ढंग से बढ़ाता है और भूजल को रिचार्ज करता है, खासकर जब इसे अन्य जल प्रबंधन उपायों के साथ मिलाकर लागू किया जाता है. यद्यपि केवल वर्षा जल संचयन भारत की जल समस्याओं का समाधान नहीं कर सकता, एक स्थायी भविष्य की ओर आवश्यक कदम के रूप मेम यह समाधान का एक महत्वपूर्ण हिस्सा हो सकता है.

(डिस्क्लेमर : इस लेख में व्यक्त विचार लेखक के हैं और जरूरी नहीं कि प्रकाशन के विचारों को प्रतिबिंबित करें.)

डॉ फेजा तबस्सुम आजमी, अतिथि लेखक

लेखक प्रफेसर हैं, विभाग व्यवसाय प्रशासन, फैकल्टी ऑफ मैनेजमेंट स्टडीज एंड रिसर्च, अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय


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