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e4mDNPA: डिजिटल इंडिया और डिजिटल मीडिया की पार्टनरशिप से कैसे बदलेगा देश?
e4mDNPADigitalMedia Conference 23 में मीडिया जगत की दिग्गज हस्तियों ने शिरकत करके अपने विचार रखे.
बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 3 years ago
एक्सचेंज4मीडिया ग्रुप और डिजिटल न्यूज पब्लिशर एसोसिएशन ऑफ इंडिया (DNPA) द्वारा आयोजित e4mDNPADigitalMedia Conference 23 में मीडिया जगत की दिग्गज हस्तियों ने शिरकत की. इस दौरान, Digital India and Digital Media: A Partnership for Building a Connected Nation विषय पर पैनल डिस्कशन भी हुआ.
इन्होंने की चर्चा
इस पैनल डिस्कशन में Lallantop के फाउंडिंग एडिटर सौरभ द्विवेदी, ABP के चीफ डिजिटल एडिटर विजय जंग थापा, Deloitte India के रिस्क एडवाइज चंद्रशेखर महंता, Tech Mahindra के हेड ऑफ ग्रोथ एंड चीफ स्ट्रेटेजी ऑफिसर जगदीश मित्रा, BAG Films के MD एवं चेयरपर्सन अनुराधा प्रसाद, HT डिजिटल के चीफ कंटेंट ऑफिसर प्रसाद सन्याल, India News Partnership, Google की हेड दुर्गा रघुनाथ, School of Morden Media, UPES के डीन नलिन मेहता और बतौर सेशन चेयर Indian Express के सीईओ संजय सधवानी शामिल हुए.
ऐसे बनेगी परफेक्ट पार्टनरशिप
पैनल डिस्कशन की शुरुआत Digital India and Digital Media के सवाल के साथ हुई. अनुराधा प्रसाद ने बताया कि किस तरह डिजिटल इंडिया और डिजिटल मीडिया के कोलेब्रेशन को सकारात्मक ढंग से आगे बढ़ाया जा सकता है. उन्होंने कहा, 'डिजिटल इंडिया के लाभ से हम सब वाकिफ हैं. जानकारी का लोकतांत्रिककरण हो रहा है, हर जरूरी जानकारी प्रत्येक व्यक्ति तक पहुंच रही है. लेकिन इस कोलेब्रेशन के माध्यम से हमें न केवल लोगों को यह बताना होगा कि किस प्रकार सरकारी नीतियां और योजनाएं उन्हें प्रभावित कर रही हैं. बल्कि सरकार को भी यह बताना होगा कि उसकी योजनाएं कहां नहीं पहुंच रही हैं, उनका लाभ कहां नहीं मिल रहा है. इस तरह के फीडबैक से ही Digital India और Digital Media की पार्टनरशिप को परफेक्ट बनाया जा सकेगा.
विश्वसनीयता पर सवाल
इस सवाल के जवाब में कि न्यूज कंज्यूमिंग में आए बदलाव को ध्यान में रखते हुए आप भारतीय ईको-सिस्टम में किस तरह का बदलाव देखते हैं? ABP के चीफ डिजिटल एडिटर विजय जंग थापा ने कहा, 'काफी बदलाव आया है. पहले के दिनों में चीजें काफी सरल थीं. लोगों को पता था कि विश्सनीय मीडिया ब्रैंड कौन से हैं और न्यूज की खपत स्लॉट में होती थी, जैसे कि सुबह या शाम. लेकिन आज न्यूज की बाढ़ आ गई है. आज चौबीसों घंटे न्यूज चलती है. न्यूज राजनीति और करंट अफेयर की छोटी परिभाषा से बाहर निकलकर काफी बड़ी हो गई है. आज डेप्थ से ज्यादा क्वांटिटी यानी मात्रा को तवज्जो दी जाती है. आजकल खबरें अनगिनत प्लेटफॉर्म से आती हैं, ऐसे में उसकी विश्वसनीयता पर भी सवाल है.
अब खेल बड़ा हो गया है
लल्लनटॉप के सौरभ द्विवेदी ने कहा कि पहले और अब में काफी बदलाव आया है. अब खेल बड़ा हो गया है. पहले अंग्रेजी की खबर देखकर ऐसा लगता था कि कुछ अद्भुत बातें हो रहीं पर समझ में नहीं आ रहीं. अभी हालात कुछ बदले हैं, लेकिन व्यापक तौर पर बदलाव होना चाहिए. हिंदुस्तान की एक चिंता ये है कि बड़े और विद्वान लेखक जो भारतीय अर्थव्यवस्था के बारे में जरूरी बातें लिख रहे हैं, उन्हें हिंदी अखबार पढ़ने वालों को कैसे समझाया जाए. ज्ञान का सरलीकरण किया जाना बेहद जरूरी है. टेक्नोलॉजी पर बोलते ही सौरभ ने कहा कि तकनीक अपने साथ आजादी भी लाई है. आज आम कंटेंट क्रिएटर भी अपना कंटेंट लोगों तक पहुंचा सकता है. विद्वानों को समझ आ रहा है कि मातृभाषा में अपनी बात कहने से उनकी बात ही बड़ी होगी. उन्होंने आगे कहा कि कंटेंट का लोकतांत्रिककरण हो, भारत की भाषा में हो और भारत के लोगों को उनकी भाषा में बताया जाए.
इस पर करना होगा काम
दुर्गा रघुनाथ ने अपने विचार रखते हुए कहा कि इनफार्मेशन प्रिजेंट करने वाली संगठन जैसे कि गूगल आदि, लगातार ये सोचते रहते हैं कि इनफार्मेशन को कैसे और बेहतर ढंग से प्रिजेंट किया जाए, यूजर को कैसे उसकी सर्च के सटीक रिजल्ट दिए जाएं. उसी तरह हमें इस पर ज्यादा काम करना होगा कि लोगों, खासकर युवाओं की रुचि खबरों में किस तरह जगाई जाए. कैसे उनकी दिलचस्पी वालीं खबरें बनाई जाए. डिजिटल मीडिया की चुनौतियां और अवसर से जुड़े सवाल पर जगदीश मित्रा ने कहा कि पहले हमें यह समझना होगा कि डिजिटल इंडिया के ऑब्जेक्टिव क्या हैं? मेरी नजर में इसका प्रमुख ऑब्जेक्टिव है देश को सामाजिक और आर्थिक रूप से तेजी से विकसित होने में सक्षम बनाना. सौरभ द्विवेदी की बात का समर्थन करते हुए उन्होंने कहा कि यदि हम ऐसा भारतीय ढंग से करते हैं, तो समाधान तेजी से होगा.
ChatGPT पर हुई चर्चा
इसके बाद पैनल डिस्कशन में ChatGPT पर चर्चा हुई. जगदीश मित्रा ने कहा कि यह एक ओपन सोर्स है, इसलिए इसका कई तरीके से इस्तेमाल हो सकेगा. ये टेक्नोलॉजी इंसानों की तरह ही सीखती है, ये वही बताएगी, जो हम सिखाएंगे. इसलिए हमारे लिए एक अवसर है, ऐसा डेटाबेस को तैयार करना, जो हम चाहते हैं कि वो सीखे. सौरभ द्विवेदी ने कहा कि डेटा ड्रिवेन होना चाहिए, डेटा ठीक से कलेक्ट होना चाहिए. कंज्यूमिंग पैटर्न काफी बदल गया है. सबकुछ डेटा से ही पता चल जाता तो इंसानों की जरूरत नहीं होती. ChatGTP सबकुछ नहीं करेगा, वो हमसे ही सीख रहा है. उन्होंने कहा कि आज डिजिटल की सबसे बड़ी समस्या ये है कि यदि किसी को इंटरनेट पर स्टोरी लिखने को कहा जाए तो वो इंटरनेट पर सर्च करके इंटरनेट के बारे में स्टोरी लिख देगा. Orginal के लिए कुछ नहीं करेगा. आज जरूरत है ज्ञान के लोकतांत्रिककरण की. इसका पहला चरण है भाषा, दूसरा टेक्नोलॉजी और तीसरा है इंटेंट. हमें ये फैसला करना होगा कि हम कैसा ब्रैंड चाहते हैं, जिसे सबसे ज्यादा नंबर मिलें, सबसे ज्यादा TRP हो या ऐसा ब्रैंड जिसे लोगों ने सबसे ज्यादा प्यार किया, भरोसा किया.
क्या डिजिटल मीडिया का फ्यूचर एडवरटाइजमेंट ड्रिवन होना चाहिए? इस पर नलिन मेहता ने कहा कि सब्सक्रिप्शन और विज्ञापन मॉडल दोनों ही चाहिए, किसी एक से काम नहीं चलेगा. वहीं, सौरभ ने कहा कि हाइब्रिड मॉडल होना चाहिए.
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