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भारत में डेटा सेंटर का भविष्य है उज्ज्वल, इन कारणों से 2025 में और होगी वृद्धि

भारत का डेटा सेंटर भविष्य न केवल देश की जरूरतों को पूरा करेगा, बल्कि वैश्विक डिजिटल अर्थव्यवस्था में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा.

बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 1 year ago

भारत एक डिजिटल क्रांति के मुहाने पर है, और डेटा सेंटर इस बदलाव के केंद्र में हैं. 2025 तक, भारत डेटा स्टोरेज और प्रोसेसिंग का एक ग्लोबल हब बनने की ओर अग्रसर है. यह सब पॉलिसी सपोर्ट, तकनीकी प्रगति, और बढ़ती डिजिटल अर्थव्यवस्था के कारण हो रहा है, आइए जानें भारत में डेटा सेंटर से जुड़े मुख्य रुझान:

1. भारत बनेगा डेटा सेंटर का हब
भारत का डेटा सेंटर बाजार तेजी से बढ़ रहा है. अनुमान है कि 2025 तक यह $10 बिलियन का हो सकता है. इंटरनेट का बढ़ता इस्तेमाल, 5G की शुरुआत, और क्लाउड सेवाओं की जरूरत इस ग्रोथ को बढ़ा रही है. मुंबई, चेन्नई, हैदराबाद और बेंगलुरु जैसे शहर डेटा सेंटर के लिए सबसे उपयुक्त जगह बन रहे हैं क्योंकि यहां अच्छी इंफ्रास्ट्रक्चर, कुशल लोग, और समुद्र के केबल स्टेशन पास में हैं. 

2. डेटा लोकलाइजेशन कानूनों का असर
भारत सरकार के डेटा लोकलाइजेशन नियमों, जैसे डिजिटल पर्सनल डेटा प्रोटेक्शन एक्ट, ने डेटा सेंटर बनाने की रफ्तार तेज कर दी है. AWS, Microsoft, और Google जैसे अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ी भारत में बड़ा निवेश कर रहे हैं. वहीं, Jio और Yotta Infrastructure जैसी भारतीय कंपनियां भी अपनी क्षमता बढ़ा रही हैं. इससे न केवल डेटा भारत में सुरक्षित रहेगा, बल्कि आर्थिक विकास भी होगा. 

3. ग्रीन डेटा सेंटर का बढ़ता चलन
2025 तक, भारत में डेटा सेंटर पर्यावरण के अनुकूल हो रहे हैं. सोलर और विंड एनर्जी जैसे नवीकरणीय स्रोतों का उपयोग किया जा रहा है. राजस्थान और गुजरात जैसे राज्य इसमें अग्रणी हैं. साथ ही, लिक्विड कूलिंग और प्राकृतिक संसाधनों से तापमान नियंत्रित करने जैसी तकनीकें ऊर्जा की बचत में मदद कर रही हैं.

4. एज कंप्यूटिंग और छोटे शहरों की ओर बढ़ता फोकस  
एज कंप्यूटिंग के बढ़ते चलन से डेटा सेंटर का ढांचा बदल रहा है. 5G और IoT डिवाइस की बढ़ती संख्या के कारण छोटे डेटा सेंटर अब छोटे शहरों (टियर 2 और टियर 3) में बनाए जा रहे हैं. इससे लेटेंसी कम होती है और स्मार्ट सिटी व ऑटोनॉमस गाड़ियों जैसे कामों के लिए बेहतर अनुभव मिलता है, यह छोटे शहरों में आर्थिक विकास को भी बढ़ावा दे रहा है. 

5. कोलोकेशन और हाइपरस्केल डेटा सेंटर का विस्तार  
2025 तक, भारत में कोलोकेशन और हाइपरस्केल डेटा सेंटर का दबदबा रहेगा. कोलोकेशन सेंटर कई कंपनियों को एक ही इंफ्रास्ट्रक्चर शेयर करने का मौका देते हैं, जो छोटे व्यवसायों के लिए किफायती है. वहीं, हाइपरस्केल सेंटर बड़े पैमाने पर डेटा प्रोसेस करने के लिए बनाए जाते हैं और Amazon व Google जैसी कंपनियों की जरूरतों को पूरा करते हैं. 

6. सुरक्षा और ऑटोमेशन में प्रगति
साइबर खतरों को देखते हुए, डेटा सेंटर उन्नत सुरक्षा उपाय अपना रहे हैं, जैसे जीरो ट्रस्ट आर्किटेक्चर, AI आधारित खतरा पहचानना, और बायोमेट्रिक एक्सेस,  ऑटोमेशन भी ऑपरेशंस को बेहतर बना रहा है. AI सिस्टम ऊर्जा की खपत, मेंटेनेंस की जरूरतों की भविष्यवाणी, और लगातार कामकाज में मदद कर रहे हैं. 

7. सरकार का समर्थन और नीतियां
भारत सरकार की नेशनल पॉलिसी ऑन सॉफ्टवेयर प्रोडक्ट्स और राज्य स्तर की योजनाएं डेटा सेंटर के विकास को बढ़ावा दे रही हैं. कई राज्य सस्ती जमीन, बिजली और टैक्स में छूट दे रहे हैं, 5G और डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर की प्रगति भी डेटा सेंटर की मांग बढ़ा रही है.

8. छोटे शहरों में निवेश के अवसर  
डेटा की खपत अब बड़े शहरों तक सीमित नहीं है. डेटा सेंटर ऑपरेटर टियर 2 और टियर 3 शहरों की ओर बढ़ रहे हैं, जहां कम लागत, जमीन की उपलब्धता और डिजिटल सेवाओं की बढ़ती मांग है.

निष्कर्ष (Conclusion):
2025 तक भारत दुनिया के सबसे सक्रिय डेटा सेंटर बाजारों में से एक होगा. पॉलिसी सपोर्ट, तकनीकी नवाचार, और विशाल डिजिटल इकोसिस्टम इस विकास को बढ़ावा दे रहे हैं. एज कंप्यूटिंग से लेकर ग्रीन एनर्जी तक, भारत का डेटा सेंटर भविष्य न केवल देश की जरूरतों को पूरा करेगा, बल्कि वैश्विक डिजिटल अर्थव्यवस्था में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा. 

(लेखक- श्रीकांत नवलकर, डायरेक्टर, Clover Infotech)
 


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