होम / एक्सपर्ट ओपिनियन / साइरस मिस्त्री का निधन, जानिए क्या थी रतन टाटा से विवाद की असली वजह?

साइरस मिस्त्री का निधन, जानिए क्या थी रतन टाटा से विवाद की असली वजह?

साइरस मिस्त्री के टाटा सन्स के बोर्ड में 2006 में शामिल होने के बाद से ही रतन टाटा के साथ विवाद शुरू हो गया था.

बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 3 years ago

विवेक शुक्ला
(वरिष्ठ स्तंभकार)

नई दिल्ली: साइरस मिस्त्री की एक सड़क हादसे में अकाल मौत से भारत का कॉर्पोरेट संसार हिल गया है. 3 जून को ही उनके वयोवृद्ध पिता शापुरजी पलंजी मिस्त्री का भी निधन हुआ था. मीडिया की सुर्खियों से दूरी बनाए रहने में यकीन रखने वाले साइरस मिस्त्री को तब कायदे से भारत ने जाना था, जब उन्हें रतन टाटा के बाद टाटा ग्रुप की चेयरमैनशिप मिली थी. वे टाटा ग्रुप के मुख्यालय बॉम्बे हाउस में बैठने लगे थे.

क्यों बने टाटा ग्रुप के चेयरमैन
यह साल 2012 की बात है. वे टाटा ग्रुप के चेयरमैन इसलिए बने थे, क्योंकि उनके परिवार के स्वामित्व वाले ग्रुप शापुरजी पलंजी की टाटा सन्स में सर्वाधिक शेयरहोल्डिंग थी. उन्हें टाटा ग्रुप का चेयरमैन बनवाने और फिर उस पद से हटवाने में रतन टाटा की अहम भूमिका थी. उनके बाद एन. चंद्रशेखरन टाटा ग्रुप के चेयरमैन बने. वे टाटा ग्रुप के पहले गैर-पारसी चेयरमैन हैं.

रतन टाटा और मिस्त्री के बीच क्या था विवाद
कहते हैं कि साइरस मिस्त्री के टाटा सन्स के बोर्ड में 2006 में शामिल होने के बाद से ही रतन टाटा के साथ विवाद शुरू हो गया था. विवाद के मूल में कारण यह था कि साइरस मिस्त्री चाहते थे कि टाटा सन्स अपने लाभ का जो हिस्सा परोपकारी कार्यों में लगाता है, उस पर लगाम लगाए. रतन टाटा इस राय को नहीं मानते थे. उनका मानना था कि टाटा ग्रुप अपने मूल उद्देश्यों से भटक नहीं सकता. वह राष्ट्र निर्माण में अपनी अहम भूमिका निभाता रहेगा. इस मसले पर मिस्त्री और रतन टाटा के रास्ते अलग-अलग थे.

साइरस मिस्त्री भी जिद्दी स्वभाव के थे
मुंबई के जॉन कैनॉन स्कूल और फिर लंदन बिजनेस स्कूल के छात्र रहे साइरस मिस्त्री भी जिद्दी स्वभाव के थे. वे रतन टाटा के सामने झुकने को तैयार नहीं थे. उन्हें कहीं न कहीं लगता था कि टाटा संस में सर्वाधिक शेयरहोल्डिंग तो उन्हीं के परिवार की है, इसलिये उनकी राय को तरजीह और तवज्जो मिलनी चाहिए, पर रतन टाटा के कद के सामने वे अपनी राय को मनवाने में सफल नहीं हुए. उनके परिवार के टाटा समूह में 16.4 फीसदी शेयर हैं.

साइरस मिस्त्री में नेतृत्व के पर्याप्त गुण थे
अगर रतन टाटा से उनके विवाद को छोड़ दिया जाए तो जानने वाले जानते हैं कि साइरस मिस्त्री में नेतृत्व के पर्याप्त गुण थे. उन्हीं की सरपरस्ती में शापुरजी पलंनजी मिस्त्री ग्रुप इंफ्रास्ट्रक्टर क्षेत्र के अनेक बड़े प्रोजेक्ट देश और देश से बाहर पूरे कर रहा था. राजधानी में प्रगति मैदान को भी उन्हीं की कंपनी विकसित कर रही है. उन्होंने लंदन से सिविल इंजीनियरिंग की ड्रिगी भी ली थी. इसका उन्हें अपने बिजनेस को गति देने में भरपूर लाभ मिलता था.

यह कम लोग जानते हैं कि साइरस मिस्त्री के दादा ने ही मुगले आजम जैसी बड़ी पिक्चर को प्रोड्यूस किया था. उन्होंने उसके निर्माण में भरपूर इनवेस्ट किया था, पर ना तो साइरस ने और ना ही उनके पिता ने फिल्म निर्माण में दिलचस्पी दिखाई.

साइरस मिस्त्री की लाइफ स्टाइल
अरबों की चल-चल संपत्ति होने पर भी साइरस मिस्त्री की लाइफ स्टाइल काफी सादगी से भरी थी. वे अपने घर के निर्माण में अरबों रुपये खर्च नहीं करते थे. वे मूल तौर पर काम से काम का मतलब रखते थे, वे बेवजह हस्तक्षेप नहीं करते थे. वे बाकी उद्योगपतियों की तरह उद्योगपतियों के संगठन सीआईआई या फिक्की से भी सक्रिय रूप से नहीं जुड़े थे. उनका किसी सियासी दल से भी कोई सीधा संबंध नहीं था. वे अपने पीछे पत्नी और दो बच्चे छोड़ गए हैं.


टैग्स
सम्बंधित खबरें

भारत के आर्थिक आत्मविश्वास का दशक

भारत जब अपना 80वां स्वतंत्रता दिवस मना रहा है, तो आत्मविश्वास के लिए एक मजबूत आधार मौजूद है. यह न तो आत्मसंतुष्टि है और न ही अति-उत्साह, बल्कि तथ्यों और साक्ष्यों पर आधारित आत्मविश्वास है.

21 hours ago

भारत @ 80: उपलब्धियों की लंबी छलांग, अधूरी चुनौतियां और विकसित भारत 2047 की राह

लेखक डॉ. ब्रजेश कुमार तिवारी कहते हैं, अब भारत के सामने सवाल बदल चुका है. सवाल केवल यह नहीं रह गया है कि देश विकास कर सकता है या नहीं, बल्कि यह है कि क्या विकास संतुलित, उत्पादक, समावेशी और मानवीय बन सकता है.

1 day ago

भारत की सबसे युवा पीढ़ी के प्रति हमारी सामाजिक जिम्मेदारी

पहली नौकरी के विरोधाभास से लेकर AI साक्षरता और लोकतांत्रिक असहमति की सेहत तक, Gen Z को भारत के भविष्य में भागीदार के रूप में देखने का तर्क, न कि एक ऐसी समस्या के रूप में जिसे संभालने की जरूरत है

4 days ago

बुढ़ापे की रफ्तार धीमी करने का विज्ञान

बेहतर नींद और पर्याप्त पानी से लेकर संतुलित आहार और नियमित व्यायाम तक, जीवनशैली की नौ आदतें सूजन (इन्फ्लेमेशन) को कम कर सकती हैं, बुढ़ापे की रफ्तार धीमी कर सकती हैं और बीमारियों के खतरे को घटा सकती हैं.

1 week ago

अगला केरल मॉडल: गरिमा के साथ बढ़ती उम्र

डॉ. प्रो. सुधा चंद्रशेखर के अनुसार, जैसे-जैसे केरल भारत के सबसे अधिक दीर्घायु समाजों में से एक बनता गया, वैसे-वैसे यह उन शुरुआती राज्यों में भी शामिल हो गया, जिन्हें उस सवाल का सामना करना पड़ा जिसका सामना आने वाले वर्षों में कई अन्य राज्यों को भी करना होगा: जब हर 5 में से 1 व्यक्ति की उम्र 60 वर्ष से अधिक हो, तो ऐसा समाज कैसा होना चाहिए?

1 week ago


बड़ी खबरें

भारत के आर्थिक आत्मविश्वास का दशक

भारत जब अपना 80वां स्वतंत्रता दिवस मना रहा है, तो आत्मविश्वास के लिए एक मजबूत आधार मौजूद है. यह न तो आत्मसंतुष्टि है और न ही अति-उत्साह, बल्कि तथ्यों और साक्ष्यों पर आधारित आत्मविश्वास है.

21 hours ago

विकसित भारत की ‘सप्तधारा’: मैन्युफैक्चरिंग से AI तक, पीएम मोदी ने बताया 2047 का रोडमैप

लाल किले से पीएम मोदी ने देश की 7 बड़ी ताकतों पर रखा फोकस. 1 करोड़ युवाओं को AI ट्रेनिंग देने का ऐलान, मैन्युफैक्चरिंग, किसान, टेक्नोलॉजी, डिफेंस, ग्रीन एनर्जी और सॉफ्ट पावर को बताया विकसित भारत की बुनियाद

1 day ago

भारत @ 80: उपलब्धियों की लंबी छलांग, अधूरी चुनौतियां और विकसित भारत 2047 की राह

लेखक डॉ. ब्रजेश कुमार तिवारी कहते हैं, अब भारत के सामने सवाल बदल चुका है. सवाल केवल यह नहीं रह गया है कि देश विकास कर सकता है या नहीं, बल्कि यह है कि क्या विकास संतुलित, उत्पादक, समावेशी और मानवीय बन सकता है.

1 day ago

जी के 3,100 करोड़ रुपये के फंड जुटाने पर रोक क्यों? सैट ने सेबी के फैसले पर उठाए सवाल

प्रतिभूति अपीलीय न्यायाधिकरण ने कहा कि जब दो महीने की रोक खत्म होने के बाद निवेश की अनुमति है, तो अभी इस पर रोक लगाने का आधार क्या है. सार्वजनिक शेयरधारकों के भारी समर्थन को भी न्यायाधिकरण ने अहम माना.

2 days ago

स्टेशनरी बेचने से IIGJ के CEO तक... देबाशीष बिस्वास की 30 साल की प्रेरक यात्रा

बैंकिंग से शिक्षा जगत तक 30 साल का सफर, 60 हजार से ज्यादा छात्रों को दे चुके हैं मार्गदर्शन देवाशीष बिस्वास

1 day ago