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दिल्ली के प्रतिष्ठित ‘ललित होटल’ पर खतरा: 1,063 करोड़ की मांग बहाल, लाइसेंस रद्द करने का आदेश बरकरार

अदालत ने माना कि NDMC द्वारा उठाई गई 1,063 करोड़ रुपये से अधिक की लाइसेंस फीस की मांग वैध है. यह राशि लंबे समय से लंबित बकाया के रूप में मानी जा रही थी, जिसे पहले निचली अदालत ने खारिज कर दिया था.

बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 4 months ago

दिल्ली के सबसे प्रतिष्ठित होटलों में से एक और स्वर्गीय उद्योगपति ललित सूरी द्वारा स्थापित नई दिल्ली स्थित द ललित अब गंभीर कानूनी संकट में फंस गया है. दिल्ली हाई कोर्ट ने न्यू दिल्ली म्युनिसिपल काउंसिल (NDMC) की 1,063 करोड़ रुपये से अधिक की बकाया लाइसेंस फीस की मांग को बहाल करते हुए होटल के संचालन से जुड़े लाइसेंस को रद्द करने के फैसले को भी सही ठहराया है, जिससे इसके भविष्य पर बड़ा सवाल खड़ा हो गया है.

हाई कोर्ट का अहम फैसला

मुख्य न्यायाधीश देवेंद्र कुमार उपाध्याय और न्यायमूर्ति तुषार राव गेडेला वाली दिल्ली हाई कोर्ट की डिवीजन बेंच ने NDMC की अपील स्वीकार कर ली. अदालत ने 2023 के सिंगल जज के उस फैसले को खारिज कर दिया, जिसमें लाइसेंस रद्द करने और भारी बकाया मांग को रद्द किया गया था.

1,063 करोड़ की मांग फिर से लागू

अदालत ने माना कि NDMC द्वारा उठाई गई 1,063 करोड़ रुपये से अधिक की लाइसेंस फीस की मांग वैध है. यह राशि लंबे समय से लंबित बकाया के रूप में मानी जा रही थी, जिसे पहले निचली अदालत ने खारिज कर दिया था.

लाइसेंस शर्तों के उल्लंघन का आरोप

कोर्ट ने पाया कि भारत होटल्स लिमिटिड ने लाइसेंस समझौते का उल्लंघन किया है. आरोप है कि कंपनी ने वर्ल्ड ट्रेड सेंटर में वाणिज्यिक स्पेस की बिक्री/हस्तांतरण से जुड़े दस्तावेज तैयार किए, जो नियमों के खिलाफ थे. अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि कंपनी ने इन ट्रांजेक्शंस की जानकारी से इनकार किया था, जिसे स्वीकार नहीं किया गया.

ट्रांसफर डील्स पर भी कोर्ट की टिप्पणी

बेंच ने 26 जून 2018 के कलेक्टर स्टैम्प्स के आदेश का हवाला देते हुए कहा कि इसमें स्पष्ट रूप से दर्ज है कि कुछ संपत्तियों का ट्रांसफर कंपनी की जानकारी और सहमति से किया गया था. इससे NDMC के दावे को और मजबूती मिली.

संचालन पर अनिश्चितता

लाइसेंस रद्द किए जाने और भारी बकाया राशि की मांग बहाल होने के बाद द ललित नई दिल्ली के संचालन पर गंभीर संकट खड़ा हो गया है. अब सवाल यह है कि क्या NDMC आगे किसी तरह की कार्रवाई, टेकओवर या संचालन पर रोक की दिशा में कदम उठाएगा.

इस फैसले के बाद होटल प्रबंधन के सामने कानूनी विकल्प सीमित नजर आ रहे हैं. विशेषज्ञों के अनुसार, आने वाले समय में यह मामला अपील या समझौते की दिशा में जा सकता है, लेकिन फिलहाल स्थिति अनिश्चित बनी हुई है.
 


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