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'अजनबियों पर न करें भरोसा' याद रहेगा ये मंत्र, तो नहीं होंगे साइबर फ्रॉड के शिकार
लोगों को इस संबंध में जागरुक होना चाहिए कि सरकारी एजेंसियां भुगतान के लिए किसी को फोन नहीं करतीं और न ही बैंक कॉल करके ओटीपी मांगते हैं.
बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 3 years ago
- एस रवि
'राजू और 40 चोर'
टेक्नोलॉजी की प्रगति के साथ, जालसाज ग्राहकों को धोखा देने के नए-नए तरीके आजमा रहे हैं. पिछले साल आरबीआई ने एक दिलचस्प और ग्राहक जागरुकता पुस्तिका 'राजू और 40 चोर' को प्रकाशित किया था, जिसमें ग्राहकों को धोखा देने के लिए इस्तेमाल किए जा रहे धोखाधड़ी के विभिन्न तौर-तरीकों के साथ-साथ लेनदेन करने से पहले की जाने वाली जांच का विवरण दिया गया है. वेब सीरीज Jamtara भी ऑनलाइन धोखाधड़ी पर ही केंद्रित है. इसमें दिखाया गया है कि किस तरह जल्दी और आसानी से पैसा कमाने की चाह में युवा फिशिंग रैकेट चलाकर मासूम लोगों का पैसा लूट रहे हैं.
ऐसे भी हो रही ठगी
लोगों को कई तरह से ठगा जा रहा है. जैसे, लेन-देन के लिए ओटीपी मांगने वाले टेलीफोन कॉल, सिम क्लोनिंग, जहां जालसाज खुद को टेलीकॉम कंपनी का प्रतिनिधि बताता है और सिम कार्ड अपग्रेड के आईडिया को बेचता है, जिसके लिए आधार कार्ड विवरण और यूनिक सिम कार्ड नंबर शेयर करना होता है. इसके अलावा, एडवांस फीस के भुगतान पर आसान लोन पेमेंट, ATM में स्कीमिंग डिवाइस इस्तेमाल करके होने वाले एटीएम फ्रॉड की खबरें भी आती रहती हैं.
ईमेल से स्कैम
लोगों को धोखा देने के तरीकों में यह भी शामिल है - सोशल मीडिया/ ईमेल के माध्यम से वित्तीय सहायता वाले संदेश, विभिन्न व्यक्तिगत फॉर्म में भरे गए डेटा का उपयोग, सर्कुलेटेड गूगल फॉर्म, ऐसे ईमेल या टेक्स्ट संदेश, जो किसी वैध साइट से प्रतीत होते हैं, लेकिन वास्तव में स्कैम का हिस्सा होते हैं, जिसका उद्देश्य किसी के खाते या व्यक्तिगत जानकारी और तीसरे पक्ष के साथ साझा किए गए केवाईसी विवरण तक पहुंच प्राप्त करना होता है.
बैंक नहीं मांगते OTP
ग्राहकों का इस संबंध में जागरुक होना जरूरी है कि सरकारी एजेंसियां भुगतान के लिए किसी को फोन नहीं करतीं और न ही बैंक कॉल करके ओटीपी मांगते हैं. एहतियात के तौर पर, सभी अवांछित दस्तावेजों, कैंसिल चेक या व्यक्तिगत या वित्तीय जानकारी वाले आवेदनों को हटा देना/नष्ट कर देना चाहिए. सभी को मोबाइल/ईमेल पर संदेश देखते समय, प्रयुक्त छोटे URL, स्पेलिंग और ग्रामर (व्याकरण) संबंधी गलतियों के बारे में पता होना चाहिए और इसी तरह कॉल रिसीव करते समय रिलेशनशिप मैनेजर का विवरण याद रखें.
ये काम करना याद रखें
हमेशा ध्यान रखें कि डिस्काउंट/ऑफर/स्कीम्स की घोषणा करने वालीं सभी प्रमुख कंपनियां इन महत्वपूर्ण सूचनाओं को अपनी आधिकारिक वेबसाइट पर प्रदर्शित करती हैं. कभी भी SMS और ईमेल पर आने वाले संदिग्ध लिंक पर क्लिक न करें. ग्राहकों को अपना मोबाइल नंबर/ID प्रूफ/एड्रेस प्रूफ कभी भी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म या वेबसाइट पर नहीं छोड़ना चाहिए, क्योंकि इनका गलत इस्तेमाल किया जा सकता है. जागरुक होने के अलावा, आपको अपनी सुरक्षा के लिए अपनी डिवाइस को बार-बार अपडेट करना चाहिए, पासकोड/पिन के साथ सुरक्षा प्रश्नों का उपयोग कर के बहु-कारक प्रमाणीकरण इस्तेमाल करना चाहिए, डेटा का बैकअप लेना चाहिए और इंटरनेट कनेक्शन की सुरक्षा के लिए सॉफ्टवेयर इनस्टॉल करने चाहिए. इस तरह आप नए सुरक्षा खतरों से निपटने के लिए अपनी डिवाइस को तैयार कर सकते हैं.
शिकायत जरूर करें
हमेशा सुरक्षित वेबसाइटों और सुरक्षित वाईफाई नेटवर्क से खरीदारी करनी चाहिए. साथ ही यदि आप किसी धोखाधड़ी का शिकार बनते हैं, तो उसकी रिपोर्ट बैंक/वित्तीय संस्थान/कंपनी को करने में बिल्कुल भी झिझक या शर्मिंदगी महसूस न करें. साइबर क्राइम की शिकायत https://cybercrime.gov.in/ वेबसाइट पर या हेल्पलाइन नंबर 1930 पर जरूर करें. जालसाज इसलिए सफल होते हैं, क्योंकि वह लोगों की रिवॉर्ड या बेहतर रिटर्न पाने की लालसा, बढ़ी हुई खर्च सीमा, खर्च करते समय बचत जैसी आवश्यकताओं और लापरवाह रवैये को अच्छे समझते हैं. आजकल हम बुजुर्गों द्वारा दी गई सीख को भूल गए हैं - कभी भी अजनबियों पर भरोसा न करें और लालच बड़ी आपदा का कारण बनता है. यदि हमें साइबर क्राइम से खुद को बचाना है, तो इस सीख को हमेशा न केवल याद रखना होगा बल्कि आत्मसात भी करना होगा.
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