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उम्मीदों की फसल : PM मोदी के तीसरे कार्यकाल में हुई कृषि परिवर्तन की शुरुआत

लेखिका रेखा शर्मा कहना है कि प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि जैसी प्रमुख योजनाएं गेम-चेंजर्स साबित हुई हैं. अब तक 11 करोड़ से अधिक किसानों को इसका लाभ मिल चुका है.

बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 1 year ago

जून 2024 में, जैसे ही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने तीसरे कार्यकाल की शुरुआत की, वैसे ही उन्होंने सबसे पहले पीएम किसान निधि (PM KisanNidhi) की 17वीं किस्त को मंजूरी देने का फैसला किया. उनका यह पहला कदम किसान कल्याण पर एक नवीनीकरण और मजबूत ध्यान केंद्रित करने की दिशा में था. इस प्रतिबद्धता को 2025 की पहली कैबिनेट बैठक में और भी मजबूती से रेखांकित किया गया, जहां कृषि समृद्धि को बढ़ावा देने के लिए परिवर्तनकारी निर्णय लिए गए.

कृषि क्षेत्र में प्रगति: नीति की सफलता का प्रमाण

भारत का कृषि क्षेत्र असाधारण प्रगति देख रहा है, और कृषि तथा संबद्ध क्षेत्रों में इस वर्ष 3.5 से 4 प्रतिशत की वृद्धि की उम्मीद जताई गई है. यह प्रगति सरकार की छह-सूत्रीय रणनीति की पुष्टि करती है, जो किसान कल्याण और सतत कृषि विकास पर केंद्रित है.

इस रणनीति के मुख्य बिंदु में उत्पादन बढ़ाने पर जोर दिया गया है. भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR) के माध्यम से, सरकार उन्नत बीज किस्मों को जारी करती है और सूक्ष्म सिंचाई, यांत्रिकीकरण और उन्नत प्रौद्योगिकियों जैसी आधुनिक कृषि प्रथाओं को बढ़ावा देती है. इन प्रयासों का उद्देश्य न केवल प्रति हेक्टेयर उपज बढ़ाना है, बल्कि उत्पादन लागत को कम करना भी है, ताकि किसानों की आय में वृद्धि हो सके.

किसानों को सशक्त बनाना: परिवर्तनकारी प्रमुख योजनाएं

प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि जैसी प्रमुख योजनाएं गेम-चेंजर्स साबित हुई हैं. अब तक 11 करोड़ से अधिक किसानों को 18 किस्तों में 3.46 लाख करोड़ से अधिक रुपये वितरित किए जा चुके हैं, और प्रधानमंत्री मोदी के तीसरे कार्यकाल के पहले 100 दिनों में 25 लाख नए लाभार्थी भी इस योजना से जुड़े हैं. इसी तरह, पीएम फसल बीमा योजना-जो विश्व में अपनी तरह की सबसे बड़ी योजना है, इसमें 602 लाख हेक्टेयर कृषि भूमि को बीमित किया है और अब तक 17,000 करोड़ रुपये के दावों का भुगतान किया गया है.

इसके अतिरिक्त, सरकार ने 1.95 लाख करोड़ रुपये की उर्वरक सब्सिडी की प्रतिबद्धता जताई है, ताकि DAP जैसी आवश्यक सामग्रियों की कीमतें सस्ती रहें न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) व्यवस्था किसानों को उचित मूल्य दिलाने में मदद करती है, जिसके तहत गेहूं, चावल, दाल और तिलहन की व्यापक खरीद की जाती है. पिछले दशक में, किसानों को 6 लाख करोड़ रुपये से अधिक MSP के रूप में दिए गए हैं, जिससे उनकी आजीविका को सुरक्षा मिली और कृषि उत्पादन को बढ़ावा मिला.

इंफ्रास्ट्रक्चर और इनोवेशन को बढ़ावा देना

एग्री इंफ्रा फंड के तहत 51,783 करोड़ रुपये के लोन को मंजूरी दी है, जो 85,314 करोड़ रुपये के प्रोजेक्ट्स में निवेश को बढ़ावा देता है और पूरे क्षेत्र में इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट को प्रोत्साहित करता है. इसी तरह, नेशनल एडिबल ऑयल मिशन के तहत 1.38 लाख हेक्टेयर में ताड़ तेल की खेती का विस्तार करने के लिए 993 करोड़ रुपये आवंटित किए हैं, जिससे घरेलू उत्पादन बढ़ेगा और आयात पर निर्भरता कम होगी.

भारत का खाद्यान्न उत्पादन 2013-14 में 265.05 मिलियन टन से बढ़कर 2023-24 में 328.85 मिलियन टन हो गया है. बागवानी उत्पादन भी बढ़कर 352.23 मिलियन टन हो गया है, जिससे भारत की कृषि शक्ति के रूप में स्थिति मजबूत हुई है.

सस्टेनेबिलिटी पर ध्यान केंद्रित

रासायनिक उर्वरकों के प्रतिकूल प्रभावों को पहचानते हुए, सरकार ने प्राकृतिक खेती मिशन की शुरुआत की है, जिससे पर्यावरणीय रूप से सतत प्रथाओं (Sustainable Practices) को बढ़ावा मिलता है. राज्यों को तेलबीजों के लिए मूल्य घाटा भुगतान योजना जैसी नवाचारी दृष्टिकोण अपनाने के लिए प्रेरित किया जा रहा है, ताकि किसानों को उचित मुआवजा मिल सके और बाजार में उतार-चढ़ाव को संबोधित किया जा सके.

ग्रामीण गरीबी में गिरावट: प्रगति की एक मिसाल

ग्रामीण गरीबी दर में गिरावट इन पहलों की सफलता का प्रमाण है. हाल ही में एसबीआई की रिपोर्ट के अनुसार, ग्रामीण गरीबी 2024 में 4.86 प्रतिशत से घटकर 2023 में 7.2 प्रतिशत से कम हो गई है, जो 2012 में 25.7 प्रतिशत थी. शहरी गरीबी में भी काफी गिरावट आई है, जो समग्र सामाजिक-आर्थिक सुधारों का संकेत है. प्रधानमंत्री मोदी ने यह बताया कि पिछले दशक में 23 करोड़ से अधिक लोग गरीबी से बाहर निकले हैं, जो इन नीतियों के परिवर्तनकारी प्रभाव को दर्शाता है.

2025 कैबिनेट निर्णय: कृषि की मजबूती की ओर एक बड़ा कदम

2025 की पहली कैबिनेट बैठक में सरकार ने कई ऐतिहासिक निर्णयों के माध्यम से कृषि के प्रति अपनी प्रतिबद्धता को फिर से प्रकट किया. प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना (PMFBY) और पुनर्गठित मौसम आधारित फसल बीमा योजना को 2025-26 तक बढ़ाने का निर्णय लिया गया, जिसमें 69,515.71 करोड़ रुपये का बजट रखा गया है, ताकि किसानों को प्राकृतिक आपदाओं से जोखिम कवरेज प्रदान किया जा सके. नवाचार और प्रौद्योगिकी के लिए 824.77 करोड़ रुपये की राशि वाले फंड (FIAT) की स्थापना की गई, जो फसल बीमा में प्रौद्योगिकी को शामिल करता है. "Yield Estimation System using Technology (YES-TECH)" और "Weather Information and Network Data Systems (WINDS)" जैसे पहल किसानों को अप्रत्याशित जलवायु चुनौतियों से निपटने के लिए फसल अनुमान और मौसम पूर्वानुमान में क्रांतिकारी बदलाव लाने के लिए तैयार हैं.

सरकार ने "न्यूट्रिएंट बेस्ड सब्सिडी (NBS)" नीति के तहत डाइअमोनियम फास्फेट (DAP) उर्वरकों पर एक विशेष पैकेज को दिसंबर 2025 तक बढ़ा दिया है. 3,850 करोड़ रुपये के अतिरिक्त आवंटन के साथ, यह उपाय किसानों के लिए सस्ती कीमतों की सुनिश्चितता के साथ-साथ सतत प्रथाओं को बढ़ावा देता है.

अंतर्राष्ट्रीय व्यापार को सशक्त करते हुए, सरकार ने इंडोनेशिया के साथ एक समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर किए हैं, जिसके तहत एक मिलियन मीट्रिक टन गैर-बासमती सफेद चावल का वार्षिक व्यापार होगा. राष्ट्रीय सहकारी निर्यात लिमिटेड (NCEL) द्वारा लागू की गई यह पहल भारत की निर्यात क्षमता को बढ़ाती है और वैश्विक साझेदारी को बढ़ावा देती है.

कृषि उत्कृष्टता के लिए दृष्टिकोण

प्रधानमंत्री मोदी की किसान हितैषी नीतियां “विकसित भारत” के लक्ष्य की ओर निरंतर प्रयासों का प्रतिबिंब हैं, जहां कृषि प्रगति की धुरी के रूप में फल-फूलती है. इनोवेशन, अफॉर्डेबिलिटी और ग्लोबल  एंगेजमेंट पर ध्यान केंद्रित करके, ये पहलें एक परिवर्तनकारी एजेंडा प्रस्तुत करती हैं, जिसका उद्देश्य भारत के किसानों के जीवन को सुधारना है. अब तक प्राप्त मील के पत्थर इस क्षेत्र की भारत की प्रगति में केंद्रीय भूमिका को पुष्टि करते हैं.

यह सहयोग हमेशा महत्वपूर्ण रहेगा. सरकार का विश्वास है कि "किसानों की सेवा पूजा है," जो उसकी दृष्टिकोण को प्रेरित करता है, यह सुनिश्चित करते हुए कि कोई भी किसान पीछे न रहे. एकता, नवाचार और निरंतर प्रयासों के साथ, एक मजबूत और समृद्ध कृषि अर्थव्यवस्था का दृष्टिकोण निश्चित रूप से वास्तविकता बनेगा.

लेखिका- रेखा शर्मा, राज्यसभा सांसद और पूर्व अध्यक्ष NCW


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