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क्या भारत और सऊदी अरब मिलकर बना सकते हैं एक नया भविष्य? इस लेख में जानिए

भारत और सऊदी अरब ने पिछले दस सालों में एक मजबूत रणनीतिक साझेदारी बनाई है. दोनों देश कई अहम मुद्दों पर हमेशा एक जैसी सोच रखते हैं.

बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 1 year ago

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पहलगाम में हुए आतंकी हमले के चलते सऊदी अरब की यात्रा बीच में ही छोड़कर दिल्ली वापसी की. यह यात्रा पहले से तय थी और इसका मकसद खाड़ी देशों के साथ भारत के रिश्तों को मजबूत करना था. यह प्रधानमंत्री मोदी की सऊदी अरब की तीसरी यात्रा थी, और यह केवल एक औपचारिक दौरा नहीं था, बल्कि यह दिखाता है कि भारत अब पश्चिम एशिया में एक महत्वपूर्ण देश बनता जा रहा है.

यह दौरा सऊदी अरब के क्राउन प्रिंस और प्रधानमंत्री मोहम्मद बिन सलमान के निमंत्रण पर हुआ, जो दोनों नेताओं के बीच बढ़ते भरोसे और अच्छे रिश्तों को दिखाता है. यह दौरा हाल ही में हुई उच्च स्तरीय मुलाकातों को आगे बढ़ाएगा, जैसे कि 2023 में भारत में G20 सम्मेलन के समय क्राउन प्रिंस का दौरा.

भारत और सऊदी अरब के रिश्ते पिछले दस सालों में मजबूत हुए हैं. दोनों देश आतंकवाद के खिलाफ, क्षेत्रीय सुरक्षा, ऊर्जा और आर्थिक सहयोग जैसे मुद्दों पर एक जैसे विचार रखते हैं. प्रधानमंत्री मोदी की यह यात्रा इन रिश्तों में नई ऊर्जा और दिशा देने का काम करेगी.

यह दौरा ऐसे समय हुआ जब भारत तेजी से तकनीक, आधारभूत ढांचे और वैश्विक अर्थव्यवस्था में आगे बढ़ रहा है. वहीं, सऊदी अरब भी "विजन 2030" के तहत अपने देश में बड़े बदलाव ला रहा है. भारत और सऊदी अरब की ये योजनाएँ एक-दूसरे से मेल खाती हैं, जिससे दोनों देशों के बीच नए और बेहतर सहयोग के रास्ते खुल सकते हैं.

ऊर्जा सुरक्षा, भारत और सऊदी अरब की साझेदारी का एक मजबूत स्तंभ है. भारत, सऊदी अरब से कच्चा तेल खरीदने वाले सबसे बड़े देशों में से एक है, इसलिए इस यात्रा से लंबे समय के लिए ज्यादा स्थिर और विविध ऊर्जा समझौते हो सकते हैं. साथ ही, भारत धीरे-धीरे स्वच्छ ऊर्जा की ओर बढ़ रहा है, और इसमें सऊदी अरब की हरित ऊर्जा और ग्रीन हाइड्रोजन में की गई निवेश योजनाएं मददगार साबित हो सकती हैं.

प्रधानमंत्री की इस यात्रा से भारतीय व्यवसायों के लिए कई नए अवसर खुल सकते हैं, खासकर इंफ्रास्ट्रक्चर, डिजिटल तकनीक, दवाओं और कृषि के क्षेत्र में. भारत और सऊदी अरब के बीच संयुक्त परियोजनाएं बढ़ रही हैं, और सऊदी अरब की भारत में निवेश की रुचि भी तेजी से बढ़ रही है. यह दोनों देशों के आर्थिक रिश्तों में एक नए दौर की शुरुआत को दर्शाता है.

भारत की कुशल और मेहनती जनशक्ति भी सहयोग का एक अहम क्षेत्र है. लाखों भारतीय सऊदी अरब की अर्थव्यवस्था में बड़ा योगदान दे रहे हैं. यह यात्रा बेहतर श्रमिक समझौतों, काम की बेहतर स्थितियों और कौशल बढ़ाने की नई योजनाओं का रास्ता खोल सकती है, जिससे दोनों देशों को फायदा होगा.

रक्षा और सुरक्षा में रणनीतिक सहयोग भी तेजी से बढ़ा है. भारत और सऊदी अरब मिलकर सैन्य अभ्यास करते हैं और खुफिया जानकारी साझा करने जैसे मामलों में भी आगे बढ़ चुके हैं. प्रधानमंत्री की इस यात्रा से समुद्री सुरक्षा और आतंकवाद विरोधी सहयोग जैसे साझा मुद्दों पर यह रिश्ता और भी मजबूत होने की उम्मीद है.

इस यात्रा में शिक्षा और सांस्कृतिक आदान-प्रदान पर भी खास ध्यान दिया जाएगा. जैसे-जैसे अधिक भारतीय छात्र विदेश में पढ़ाई करने की चाह रखते हैं और सऊदी अरब भी अब अंतरराष्ट्रीय शिक्षा को अपनाने लगा है, वैसे-वैसे दोनों देशों के बीच शिक्षा और शोध में सहयोग के नए रास्ते खुल सकते हैं.

यह यात्रा लोगों के बीच रिश्तों को मजबूत करने में भी मदद करेगी. सऊदी अरब में दो मिलियन (20 लाख) से ज्यादा भारतीय रहते हैं, जो दोनों देशों के बीच दोस्ती और अच्छे संबंधों की एक मजबूत कड़ी हैं. ऐसे दौरों के दौरान प्रधानमंत्री मोदी का प्रवासी भारतीयों से मिलना इन भावनात्मक और सांस्कृतिक संबंधों को और मजबूत करता है.

इस यात्रा का एक और उद्देश्य भारत के लिए आर्थिक फायदे भी लाना है. इससे सऊदी अरब से स्थिर ऊर्जा आपूर्ति बनी रहेगी और भारतीय निर्यातकों व तकनीकी कंपनियों को खाड़ी देशों में और बेहतर पहुंच मिल सकती है. इससे भारत की छोटी कंपनियों (SMEs) और स्टार्टअप्स को भी सऊदी अरब में हो रहे डिजिटल और आर्थिक बदलावों का फायदा मिल सकता है.

रक्षा के नजरिए से देखा जाए तो सऊदी अरब से मजबूत रिश्ते बनाना हिंद महासागर क्षेत्र में भारत की सुरक्षा के लिए अच्छा होगा. इससे भारत में ‘मेक इन इंडिया’ के तहत रक्षा उपकरणों के संयुक्त निर्माण की संभावनाएं भी बढ़ सकती हैं. भारत और सऊदी अरब ने स्वास्थ्य के क्षेत्र में पहले से ही मिलकर काम किया है, और यह सहयोग आगे और भी बढ़ने की उम्मीद है. भारत दवाओं, जैव-प्रौद्योगिकी और डिजिटल स्वास्थ्य के क्षेत्र में काफी मजबूत है, और सऊदी अरब इन क्षेत्रों में साझेदारी और निवेश के लिए एक अच्छा मंच बन सकता है. इसके अलावा, अंतरिक्ष और तकनीक जैसे क्षेत्रों में भी सहयोग को काफी बढ़ाया जा सकता है.

सऊदी अरब अब अंतरिक्ष अन्वेषण और सैटेलाइट सेवाओं में अपनी रुचि बढ़ा रहा है, जो भारत की अंतरिक्ष तकनीक और सस्ते उपग्रह प्रक्षेपण में क्षमता से अच्छी तरह मेल खाता है. इसके अलावा पर्यटन और नागरिक उड्डयन (एविएशन) के क्षेत्र में भी सहयोग की संभावना है. अगर कनेक्टिविटी बढ़े और वीज़ा प्रक्रिया आसान हो, तो भारत और सऊदी अरब के बीच व्यापार, तीर्थ और घूमने-फिरने के लिए लोगों की आवाजाही बढ़ सकती है. इससे दोनों देशों के बीच आर्थिक और सांस्कृतिक संबंध और मजबूत होंगे.

इस यात्रा की राजनीतिक अहमियत भी बहुत खास है. भारत खाड़ी देशों से ऐसे समय में मजबूत संबंध बना रहा है जब दुनिया में कई भू-राजनीतिक (geopolitical) अनिश्चितताएं हैं. इससे यह भी दिखता है कि भारत संतुलित और बहुध्रुवीय (multipolar) विदेश नीति अपना रहा है. प्रधानमंत्री की यह यात्रा दिखाती है कि भारत पूरब और पश्चिम के बीच एक मजबूत सेतु बनने के लिए प्रतिबद्ध है.

यह यात्रा भारत की बढ़ती कूटनीतिक (diplomatic) क्षमता को दर्शाती है. प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में भारत अब दुनिया की बड़ी शक्तियों से बराबरी से बात कर रहा है और सहयोग, आपसी सम्मान और रणनीतिक स्वतंत्रता पर आधारित संबंध बना रहा है. भारत और सऊदी अरब की सोच कई अंतरराष्ट्रीय मंचों जैसे G20, BRICS+ और संयुक्त राष्ट्र (UN) में मिलती है. इस तरह का बहुपक्षीय सहयोग (multilateral cooperation) दुनिया को और संतुलित बनाने में मदद करेगा, खासकर जब विकासशील देशों की आवाज़ को भी महत्व दिया जाएगा.

यह यात्रा साइबर सुरक्षा, फिनटेक (वित्तीय तकनीक), और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस जैसे क्षेत्रों में भी नए सहयोग का रास्ता खोल सकती है. इन सभी क्षेत्रों में दोनों देशों के पास बड़े सपने और एक-दूसरे की पूरक ताकतें हैं. साथ ही, सऊदी अरब भारत की इंफ्रास्ट्रक्चर परियोजनाओं में निवेश बढ़ा सकता है.

यह यात्रा भारत और सऊदी अरब के बीच और भी समझौते लाने का रास्ता खोल सकती है, जिससे सऊदी अरब से भारत के सड़कों, बंदरगाहों और स्मार्ट सिटी परियोजनाओं में अधिक निवेश आ सकेगा. इससे रोजगार बढ़ेगा और आर्थिक विकास को गति मिलेगी. जलवायु सहयोग और हरित (ग्रीन) तकनीक का आदान-प्रदान भी इस साझेदारी का एक अहम हिस्सा होगा. भारत का नेट ज़ीरो उत्सर्जन (net-zero emissions) का लक्ष्य सऊदी अरब की टिकाऊ और पर्यावरण के प्रति ज़िम्मेदार कोशिशों से अच्छी तरह मेल खाता है.

भूराजनैतिक (geopolitical) दृष्टि से देखा जाए तो भारत और सऊदी अरब के रिश्तों का मजबूत होना पूरे पश्चिम एशिया क्षेत्र के लिए एक सकारात्मक संदेश है. यह दिखाता है कि आर्थिक सहयोग से शांति, समृद्धि और साझा विकास संभव है. यह यात्रा कला, साहित्य, सिनेमा और सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण जैसे क्षेत्रों में भी सहयोग बढ़ाएगी, जिससे दोनों देशों की सभ्यताओं को बेहतर समझने और सराहने का मौका मिलेगा.

यह यात्रा भारतीय व्यापार जगत को खाड़ी देशों में मौजूद बड़े अवसरों का भी संकेत देगी. सऊदी अरब के बड़े प्रोजेक्ट्स जैसे NEOM में भारतीय कंपनियों के लिए निर्माण, आईटी, सलाहकार सेवाएं और इंजीनियरिंग के क्षेत्र में काम करने के अवसर हैं. भारत-मध्य पूर्व-यूरोप आर्थिक गलियारा (IMEEC) जैसे रणनीतिक संपर्क प्रोजेक्ट्स में भारत को बड़ा फायदा हो सकता है, और सऊदी अरब इन परियोजनाओं में एक अहम कड़ी है. यह यात्रा भारत और सऊदी अरब के बीच व्यापार और विकास को जोड़ने वाले इस बड़े सपने को साकार करने की दिशा में एक मजबूत कदम है.

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की यह यात्रा भविष्य को आकार देने वाली कूटनीति है. यह साझा दृष्टिकोण, आपसी उम्मीदों और वैश्विक प्रगति की दिशा में मिलकर काम करने का उत्सव है. यह सिर्फ समझौते नहीं, बल्कि रिश्तों को गहराई देने की नींव रखने वाली यात्रा है. भारत और सऊदी अरब, जो दोनों ही प्राचीन सभ्यताओं के प्रतिनिधि हैं और नई लीडरशिप की ओर बढ़ रहे हैं — उनके पास साथ मिलकर विश्वास, सम्मान और साझा समृद्धि पर आधारित एक नया मॉडल बनाने का शानदार अवसर है. प्रधानमंत्री मोदी की यह यात्रा उसी दिशा में एक बड़ा और महत्वपूर्ण कदम है.

डिस्क्लेमर: इस लेख में व्यक्त विचार लेखक के अपने हैं और जरूरी नहीं कि ये प्रकाशन के विचारों से मेल खाते हों.

(गेस्ट लेखक- जासिम मोहम्मद, तुलनात्मक साहित्य के प्रोफेसर और नरेंद्र मोदी अध्ययन केंद्र के अध्यक्ष हैं.)
 


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