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BW IBLF: सीरियस टॉपिक को स्टोरी टेलिंग फॉर्म में पेश करती है Vaibhav Dange की ये किताब
इन्फ्रास्ट्रक्चर और गवर्नेंस पर इंडिपेंडेंट एक्सपर्ट Vaibhav Dange ने BW IBLF में अपनी किताब के बारे में बताया.
बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 3 years ago
ब्रिज गिरने की घटना, उसके बाद के प्रयास और तमाम चुनौतियों के बीच एक नई प्रक्रिया का अमल में आना. यह सबकुछ आपको Building Bridges: Shaping the Future में पढ़ने को मिलेगा, लेकिन बात यहीं खत्म नहीं होती. Vaibhav Dange की किताब यह भी बताती है कि कैसे 'ये नहीं हो सकता' कि आदत से पार जाते हुए बड़े से बड़े बदलाव किए जा सकते हैं. BW BusinessWorld द्वारा आयोजित Non Fiction Book Festival-IBLF में वैभव ने अपनी किताब और उससे जुड़े अनुभव सबके साथ साझा किए.
अनुभवों पर केंद्रित है किताब
इन्फ्रास्ट्रक्चर और गवर्नेंस पर इंडिपेंडेंट एक्सपर्ट Vaibhav Dange ने बताया कि Building Bridges: Shaping the Future भारत के डिलीवरी सिस्टम में बदलाव लाने के हमारे अनुभव पर केंद्रित है. उन्होंने कहा, 'हमें खुद पर यह विश्वास रखना चाहिए कि हर बदलाव संभव है. हम सभी ने हाल ही में गुजरात में पुल गिरने की घटना के बारे में सुना होगा, अब तक ऐसी कई घटनाएं हुई हैं. कुछ साल पहले गोवा-मुंबई हाईवे पर भी एक पुल नदी में बह गया था. उस वक्त मैं मिनिस्ट्री ऑफ रोड ट्रांसपोर्ट एंड हाईवे से जुड़ा हुआ था. मैं हमारे मिनिस्टर का निजी सचिव था. उस घटना से मिनिस्टर काफी दुखी थे. वह हादसे के लिए खुद को जिम्मेदार मान रहे थे. उन्होंने छह महीने में ब्रिज फिर से खड़ा करने की घोषणा की थी, लेकिन हमने 165 दिनों में उसे बना दिया'.
तैयार हुआ दुनिया का पहला सिस्टम
Vaibhav Dange ने आगे कहा, 'हालांकि, हम इतने भर से संतुष्ट नहीं थे. हमने सोचा कि ऐसा क्या किया जाए कि इस तरह की घटनाएं फिर न हों. जब हमने नेशनल हाईवे पर मौजूद पुलों का डेटा एकत्र करना शुरू किया, तो यह जानकर हैरान रह गए कि ऐसा कोई डेटा मौजूद ही नहीं है. इसके बाद हमने कई कदम उठाए. हमने गवर्नेंस और डिलीवरी में सिल्पलिसिटी लाने के लिए चीजों को एक साथ रखा. पहले से मौजूद टेक्नोलॉजी की मदद से इंडियन ब्रिज मैनेजमेंट सिस्टम तैयार किया. ये सिस्टम हाईवे पर मौजूद स्ट्रक्चर्स के बारे में जानकारी देता है. हमारा डेटा ऑनलाइन और रियल टाइम है. यह दुनिया में अपनी तरह का पहला सिस्टम है. इसी सब को मैंने किताब में शामिल करने का प्रयास किया है, लेकिन कुछ अलग ढंग से'.
इस तरह मिली प्रेरणा
कार्यक्रम में मॉडरेटर के तौर पर मौजूद Blue Star Limited के MD बी त्यागराजन ने इस दौरान Vaibhav Dange से पूछा - आपने बहुत सीरियस सब्जेक्ट चुना, लेकिन स्टोरी टेलिंग फॉर्म में उसे लोगों तक पहुंचाया, आपको ये प्रेरणा कहां से मिली? इसके जवाब में वैभव ने कहा, 'जब मैं और मेरा को-ऑथर अपने विचारों पर बात कर रहे थे, तो हमने सोचा कि किसी को यह पढ़ने में दिलचस्पी क्यों होगी कि हमने क्या किया. फिर हमने इसे रोचक बनाने पर काम किया. दरअसल, मेरे स्कूली शिक्षा मराठी में हुई, जब मैं MBA करने गया तो मेरे डायरेक्टर ने कहा कि मुझे अपनी स्किल्स में सुधार करना चाहिए. उन्होंने किताबे पढ़ने का सुझाव. उन्होंने मुझसे कहा कि मैं ब्रिटिश लेखक Arthur Hailey की किताब पढूं, वो संदेशों को बहुत रोचक तरीके से व्यक्त करते थे. उसी को ध्यान में रखते ही मैंने अपनी किताब को आकार दिया, ताकि आम आदमी भी उसे दिलचस्पी से पढ़े सके.
डिस्कवरी पर दिखेगी सीरीज
क्या आपने अपनी किताबों को ऑडियो-विजुअल मीडियम या टीवी चैनल जैसे दूसरे प्लेटफ़ॉर्म पर ले जाने का प्रयास किया? इस सवाल पर Vaibhav Dange ने कहा, 'किताब के बारे में तो नहीं, लेकिन लोगों तक कुछ नया और ज़रूरी पहुंचाने के लिए मैंने प्रयास किए हैं. मैंने डिस्कवरी चैनल से बात की कि उन्हें भारत पर भी फोकस करना चाहिए. उन्हें दिखाना चाहिए कि कैसे भारत ग्लोबल मार्केट में खुद को स्थापित कर रहा है. मैंने डिस्कवरी के साथ एक सीरीज भी डेवलप की है, जो भारत के मॉडर्न इंफ्रास्ट्रक्चर मोनुमेंट्स की कहानी बताती है. 'बिल्ड इंडिया' के नाम से यह सीरीज जल्द डिस्कवरी चैनल पर आएगी'. Vaibhav भारत की इन्फ्रास्ट्रक्चर ग्रोथ से काफी प्रभावित हैं. उनका कहना है कि पिछले 7-8 सालों में इस दिशा में काफी काम हुआ है.
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