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BW IBLF में हुई Inked in India पर बात, सामने आए फाउंटेन पेन से जुड़े कई राज

BW Businessworld द्वारा दिल्ली में Non Fiction Book Festival IBLF का आयोजन किया जा रहा है.

बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 3 years ago

देश का सबसे बड़ा Non Fiction Book Festival IBLF दिल्ली में शुरू हो गया है. BW Businessworld द्वारा आयोजित इस फेस्टिवल में विख्यात लेखक शिरकत कर रहे हैं. यहां पहुंचे मेहमनों को आज Inked in India के लेखक Dr. Bibek Debroy के विचारों को जानने का मौका मिला. डॉक्टर देबरॉय प्रधानमंत्री की आर्थिक सलाहकार परिषद के अध्यक्ष भी हैं. उन्होंने अपनी किताब में Pen Industry से जुड़ी कई ऐसी बातों को शामिल किया है, जिसने अधिकांश लोग अंजान होंगे. 

क्या है किताब में?
BW IBLF में डॉक्टर देबरॉय ने अपनी किताब के बारे में बताया और उससे जुड़े कई सवालों के जवाब भी दिए. Dr. Bibek Debroy ने कहा कि Inked in India कुछ हद तक एक असामान्य किताब है, जो भारत में बने फाउंटेन पेन पर केंद्रित है. उन्होंने कहा, 'आप लोग सोच रहे होंगे कि हम फाउंटेन पेन के बारे में क्यों बात कर रहे है, क्या उसका दौर खत्म हो गया है? क्या राइटिंग इंस्ट्रूमेंट खत्म हो गए हैं, जिस तरह से टेक्नोलॉजी हमारे जीवन में शामिल होती जा रही है, क्या लोग भविष्य में लिखना पूरी तरह छोड़ देंगे? दरअसल, फाउंटेन पेन का इतिहास कई किस्से-कहानियों और परेशानियों से भरा हुआ है और आपको उसके बारे में बता होना चाहिए'.  

बाजार में 10% हिस्सेदारी
डॉक्टर देबरॉय ने बताया कि राइटिंग इंस्ट्रूमेंट के बाजार में 10% हिस्सेदारी आज भी फाउंटेन पेन की है. अपनी किताब के बारे में बताते हुए उन्होंने कहा कि Inked in India आपको भारतीय फाउंटेन पेन के इतिहास में ले जाती है. साथ ही यह भी बताती है कि कैसे गलत आर्थिक नीतियों ने इस उद्योग को प्रभावित किया. जब मैं फाउंटेन पेन कहता हूं, तो मेरा मतलब केवल फाउंटेन पेन से ही नहीं है. मेरा मतलब निब और इंक से भी है. फाउंटेन पेन और डिप पेन के बीच का अंतर समझाते हुए उन्होंने कहा कि फाउंटेन पेन में अंदर इंक होती है, जबकि डिप पेन को इंक में डुबोना पड़ता है.

इन्होंने बनाया पहला फाउंटेन पेन
अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए उन्होंने कहा, 'माना जाता है कि इंक फाउंटेन पेन से पहले आ गई थी, क्योंकि उसका इस्तेमाल प्रिंटिंग आदि भी होता था. भारत में भी फाउंटेन पेन की इंक पेन के आने से काफी पहले बनाई जाने लगी थी. हालांकि, सही मायनों में भारत में फाउंटेन पेन इंक के सबसे पहले निर्माता थे पीएम बागची एंड कंपनी. कोलकाता की इस कंपनी ने 1883 में फाउंटेन पेन की इंक बनाई थी. जबकि फाउंटेन पेन को पहली बार बाजार में  राधिका नाथ शाह ने 1905 में पेश किया था. बनारस की शाह ने 'लक्ष्मी पेन' के नाम से कंपनी शुरू की थी. 

पेन इंडस्ट्री के हाल का जिक्र
डॉक्टर देबरॉय की इस किताब में आजादी के समय और उसके बाद फाउंटेन पेन इंडस्ट्री की स्थिति पर भी प्रकाश डाला गया है. कैसे आर्थिक नीतियों और अन्य कारणों के चलते Pilot पेन बनाने वाली कंपनी भारत छोड़कर चली गई. भारतीय निर्माताओं के सामने किस तरह की चुनौतियां थीं, आदि का भी जिक्र किताब में है. डॉक्टर देबरॉय के मुताबिक, फाउंटेन पेन और इस इंडस्ट्री के बारे में लोगों की समझ काफी सीमित है. ज़्यादातर लोगों को यह भी नहीं पता होगा कि दुनिया के 5 बेस्ट निब निर्माताओं में से दो भारतीय हैं. 

2500 फाउंटेन पेन का कलेक्शन
इस सेशन के दौरान, Institute for Competitiveness, India के Honorary Chairman डॉक्टर अमित कपूर ने Dr. Bibek Debroy से उनकी किताब से जुड़े कुछ सवाल पूछे. उन्होंने जानना चाहा कि डॉक्टर देबरॉय को पेन कलेक्शन का शौक कैसे लगा और उनके कलेक्शन में कितने फाउंटेन पेन हैं. इस बारे में डॉक्टर देबरॉय ने बताया कि उनके पास 2500 फाउंटेन पेन हैं, जिनमें से 30 से 35 का इस्तेमाल वह अक्सर करते हैं. Inked in India के लेखक ने कहा कि उनके लिए यह बताना मुश्किल है कि उन्होंने कब से कलेक्शन शुरू किया. इस दौरान, उन्होंने राधिका नाथ शाह की किताब और स्टाइलो पेन का भी जिक्र किया. 

इस पेन से लिखा गया था संविधान
डॉक्टर अमित कपूर के दूसरे सवाल के जवाब में उन्होंने बताया कि डॉक्टर भीमराव आंबेडकर को भी फाउंटेन पेन बहुत पसंद थे. हालांकि, जब संविधान लिखा गया तो उसके लिए फाउंटेन के बजाए डिप पेन इस्तेमाल किया गया. उन्होंने यह भी बताया कि उस समय इंक टैबलेट के रूप में आती थी. पानी में उस पैकेट को डालकर इंक बनाई जाती थी. डॉक्टर देबरॉय का कहना है कि मौजूदा वक्त में भारतीय पेन इंडस्ट्री को चीन के निर्माताओं से खतरा है. वह सस्ते और अच्छे पेन तैयार कर रहे हैं. उन्होंने कहा कि Inked in India में पेन से जुड़े कुछ रोचक किस्से भी शामिल किए गए हैं. जैसे जब पंडित जवाहरलाल नेहरु के पिता दो महंगे पेन लाए थे, तो पंडित नेहरु का क्या रिएक्शन था आदि. उन्होंने यह भी बताया कि पेन का सबसे सही हिंदी नाम कलम है और भगवान गणेश को फर्स्ट राइटर माना जाता है.


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