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बजट सिर्फ माहौल बना सकता है, नौकरियों के लिए उद्यम करना होगा

एक सौ चालीस करोड़ लोगों के देश में कुछ हजार शिक्षकों की भर्ती की योजना बजट में गिनवाना वित्त मंत्री को शोभा नहीं देता, लेकिन ऐसा नहीं है कि रोजगार का कोई इंतजाम नहीं किया गया.

बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 3 years ago

  • मेहराज दुबे, वरिष्ठ TV पत्रकार, DGM एबीपी नेटवर्क  

बातों बातों में निर्मला सीतारमन बड़े सुधार कर गईं हैं और इसके लिए वो बधाई की पात्र हैं. सरकारों को नौकरियों का वादा करना है तो उन्हें अर्थव्यवस्था को मजबूत करना होगा और छोटे उद्योगों को कारगर बनाना होगा और नए साल का मोदी सरकार का ये बजट दोनों काम करता दिखाई देता है.

टैक्स की छूट से राहत
हालांकि युवा जनसंख्या और टैक्स देने वाले मिडिल क्लास को अगर अब भी शिकायत है तो वो भी गलत नहीं हैं क्योंकि साल में बीस लाख रुपये कमाने वाले, अपनी आय के प्रतिशत के तौर पर उतना ही टैक्स दे रहे हैं जितना एक करोड़ रुपये तक कमाने वाला देगा. एक करोड़ से ज्यादा कमाने वाले नागरिकों को ज्यादा टैक्स देना पड़ता है, लेकिन पंद्रह लाख से एक करोड़ रुपये तक की आय के बीच एक और स्लैब की मांग थी जो पूरी नहीं हुई है. फिर भी ये एक बड़ा कदम है कि दस लाख का स्लैब अब पंद्रह लाख का हो गया यानी दस लाख से ऊपर की आय पर तीस फीसदी टैक्स लग रहा था जो अब पंद्रह लाख से ऊपर की आय पर ही लगेगा.

साढ़े सात लाख रुपये तक की सालाना आय वाले करीब एक करोड़ करदाता अब करमुक्त हो गए हैं. इन लोगों को तमाम इंश्योरेंस और टैक्स बचाने वाले होमलोन के झांसे से भी मुक्ति मिल गयी है. टैक्स बचाने वाले किसी भी तरह के निवेश से आपको छुटकारा मिल गया है लेकिन अगर कोई ऐसे निवेश से फायदा लेना चाहता है तो उसे पुरानी टैक्स स्कीम का विकल्प चुनना होगा वरना वो नई टैक्स स्कीम में ही करदाता के तौर पर गिना जाएगा. ये भी एक तरह का बड़ा आर्थिक सुधार वाला कदम है. कुल मिलाकर टैक्स में थोड़ी राहत देकर जो छोटी मोटी छूट मिलती थी उसे हटा लिया गया है लेकिन इंश्योरेंस और म्यूचुअल फंड कंपनियों को ये बिलकुल पंसद नहीं आया और ना ही एलटीए और एचआरए पर टैक्स की छूट लेने वालों को ये भा रहा है. 

नौकरी बनाम रोजगार
युवाओँ के लिए बजट में सीधे नौकरीयां बढ़ाने की घोषणा नहीं के बराबर है. एक सौ चालीस करोड़ लोगों के देश में कुछ हजार शिक्षकों की भर्ती की योजना बजट में गिनवाना वित्त मंत्री को शोभा नहीं देता लेकिन ऐसा नहीं है कि रोजगार का कोई इंतजाम नहीं किया गया. छोटे उद्योगों के लिए कम से कम तीन बड़ी घोषणाएं की गई हैं, जिनका अच्छा असर नौकरियों पर पड़ेगा. स्किल ट्रेनिंग को बढ़ावा दिया गया है. छोटी कंपनियों को सस्ते लोन देने के लिए दो लाख करोड़ रुपये रखे गए हैं और इस तरह के उद्योंगो को अब तमाम सरकारी फॉर्म भरते वक्त सिर्फ एक पैन नंबर भरकर काम चलाने की आसानी दी गयी है. जब एमएसएमई यानी छोटे और मझौले उद्योग आसानी से काम कर सकेंगे और बंद होने से बच जाएंगे तो नौकरिया जरूर मिलेंगी.
इसी तरह दस लाख करोड़ की पूंजी को नए कामों में लगाने का ऐलान यानी कैपेक्स की घोषणा नई नौकरियां बनाने में मदद करेगी. जब इतना पैसा काम पर लगाया जाएगा तो लाखों लोगों को काम मिलेगा. जब दुनिया भर में मंदी हो और ऐसे समय में भारत में साढ़े छह – सात फीसदी की विकास दर नौकरियां पैदा करने का भरोसा दिलाती है लेकिन ये नौकरियां सिर्फ सड़क और रेल सेक्टर में ही मिलेंगी तो फिर सारे किए पर पानी फिर जाएगा.

छोटा काम आसान
छोटी कंपनियां करोना के वक्त से ही अधर में हैं. कई कारखाने खत्म हो गए और शोर भी नहीं हुआ. ऐसी कंपनियों को बचाने के लिए उन्हें सस्ता कर्ज तो देना ही है उनके सिर पर से कागजी बोझ कम करना भी जरूरी है. एक पैन नंबर का इस्तेमाल सब जगह करके नियम पूरे करने की आजादी इसी लिए दी गयी है. साथ ही सीतारमन ने दावा किया है कि करीब उनचालीस हजार अनिवार्यताएं हटा दी गई हैं और चौतीस सौ तरह की गलतियों को अपराध के दर्जे से हटा दिया गया है, ये सब इसलिए कि छोटा उद्यमी अपने काम पर फोकस कर सके और अधिकारियों और वकीलों से दूर होकर जी सके.

अपनी कंपनी आप
पहले ही 44 डी नाम की टैक्स स्कीम के तहत जो कंपनियां दो करोड़ से कम का कारोबर करती हैं उन पर टैक्स बहुत कम लगता है और अब इस सीमा को बढ़ाकर तीन करोड़ कर दिया गया है. इस धारा में अगर आपका 95 फीसदी पैसा डिजिटल आ रहा हो तो सिर्फ छह फीसदी पैसे को आपकी आय मान कर उस पर टैक्स लगाया जाएगा.
यही नियम खुद अपना कारोबार करने वाले लोगों के लिए भी काफी आसान है. इन्हें टैक्स कानूनों में प्रोफेशनल का काम दिया जाता है इनके लिए ये सीमा पहले पचास लाख थी अब पचहत्तर लाख हो गयी है. जब नौकरियां जा रही हों और आप खुद थोड़ा-थोड़ा काम कई कंपनियों के लिए अकेले कर रहे हों तो ये नियम एक सौगात है.

स्टार्ट अप को सहारा जारी
निर्मला सीतारमन ने स्टार्ट अप की बढ़ती लोकप्रियता को अपने भाषण में खूब भुनाया. भाषण के शुरुआत में ही एग्री स्टार्ट अप की बात करके सबका ध्यान खींच लिया. खेती को डिजिटल से जोड़ने की गहन आवश्यकता है इसके लिए युवाओँ को स्टार्ट अप शुरू करने की प्रेरणा दी गयी है. खेती किसानी से जुड़ी स्टार्ट अप में निवेश के लिए एक विशेष स्टार्ट अप फंड की घोषणा की गयी है.
दरअसल भारत में दुनिया की सबसे ज्यादा कृषि योग्य भूमि है, लेकिन या तो खेती की लागत ज़्यादा है या कई कारणों फसल बर्बाद हो जाती है और पूरा पैसा वसूल नहीं हो पाता. अगर खेती को डिजिटल बनाने के लिए कुछ काम किया जाए और उस पर स्टार्ट अप में निवेश भी मिलने लगे तो संभावनाएं अपार हैं.


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