✕

होम / एक्सपर्ट ओपिनियन / बजट 2026-27: सततता, संसाधन सुरक्षा और डीकार्बोनाइजेशन के साथ भारत की औद्योगिक प्रतिस्पर्धा का नया अध्याय

बजट 2026-27: सततता, संसाधन सुरक्षा और डीकार्बोनाइजेशन के साथ भारत की औद्योगिक प्रतिस्पर्धा का नया अध्याय

अब संसाधन सुरक्षा, डीकार्बोनाइजेशन और सर्कुलर अर्थव्यवस्था केवल पर्यावरणीय अनुपालन नहीं, बल्कि आर्थिक रणनीति का मुख्य हिस्सा बन गए हैं. बजट ने भारी उद्योग, स्वच्छ ऊर्जा और सर्कुलर इकॉनमी के लिए स्पष्ट अवसर और दिशा निर्धारित की है.

बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 8 months ago

दशकों से भारत में सततता को एक तरह की नियामक औपचारिकता के रूप में देखा जाता रहा है. इसे सिद्धांत रूप में तो स्वीकार किया गया, लेकिन न तो इसके लिए पर्याप्त संसाधन दिए गए और न ही इसे देश की मुख्य आर्थिक रणनीति का हिस्सा बनाया गया. 1 फरवरी 2026 को वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण द्वारा पेश किया गया, केंद्रीय बजट 2026-27 इस सोच में एक स्पष्ट और महत्वपूर्ण बदलाव दिखाता है. यह बजट संकेत देता है कि अब संसाधन सुरक्षा, डीकार्बोनाइजेशन और सर्कुलर अर्थव्यवस्था को भारत की औद्योगिक प्रतिस्पर्धा का जरूरी आधार माना जा रहा है, न कि सिर्फ पर्यावरणीय अनुपालन तक सीमित विषय.

CCUS: रणनीतिक औद्योगिक डीकार्बोनाइजेशन

बजट में सततता से जुड़ी सबसे साहसिक प्रतिबद्धता कार्बन कैप्चर, यूटिलाइजेशन एंड स्टोरेज (CCUS) के लिए अगले पांच वर्षों में 20,000 करोड़ रुपये का आवंटन है, यह प्रावधान भारत को अनुप्रयुक्त डीकार्बोनाइजेशन नीति में वैश्विक अग्रणी देशों की पंक्ति में खड़ा करता है.

यह जलवायु सद्गुण प्रदर्शन नहीं है, बल्कि प्रतिस्पर्धी वास्तविकताओं के अनुरूप तैयार की गई औद्योगिक रणनीति है. स्टील, सीमेंट, बिजली और पेट्रोकेमिकल्स जैसे कठिन-से-कम होने वाले उत्सर्जन वाले क्षेत्र, जो मिलकर महत्वपूर्ण आर्थिक मूल्य और अंतर्निहित उत्सर्जन में योगदान करते हैं. अब बड़े पैमाने पर कार्बन हटाने के समाधानों के व्यावसायीकरण के लिए कुछ वित्तीय समर्थन से लैस हैं. जैसा कि कई अन्य उद्योग विशेषज्ञों ने भी उल्लेख किया है, यह आवंटन भारी उद्योगों को कार्बन तीव्रता कम करने का एक व्यवहार्य मार्ग देता है, जिससे भारत के औद्योगिक निर्यात उभरते वैश्विक व्यापार मानकों, जिनमें यूरोपीय संघ का कार्बन बॉर्डर एडजस्टमेंट मैकेनिज्म (CBAM) शामिल है, के अनुरूप हो सकें.

CCUS नवीकरणीय ऊर्जा के विकास का पूरक है, क्योंकि यह उन प्रक्रिया-जनित उत्सर्जनों को संबोधित करता है जिन्हें केवल नवीकरणीय ऊर्जा की तैनाती से समाप्त नहीं किया जा सकता. प्रौद्योगिकी परिपक्वता, अवसंरचना और उपयोग मार्गों में विश्वसनीय संसाधन समर्पित करके, बजट भारत को केवल लागत के आधार पर नहीं, बल्कि कार्बन प्रदर्शन के आधार पर प्रतिस्पर्धा करने की स्थिति में रखता है, जो भविष्य के वैश्विक बाजारों में एक निर्णायक कारक होगा.

क्रिटिकल मिनरल्स और अर्बन माइनिंग: आपूर्ति शृंखलाओं को सुरक्षित करना

संसाधन सुरक्षा, स्वच्छ ऊर्जा, रक्षा, इलेक्ट्रॉनिक्स और मोबिलिटी जैसे क्षेत्रों में वैश्विक वैल्यू चेन में ऊपर उठने की भारत की आकांक्षाओं के केंद्र में है. बजट में क्रिटिकल मिनरल्स के प्रसंस्करण में उपयोग होने वाले कैपिटल गुड्स पर बेसिक कस्टम ड्यूटी में छूट, साथ ही ओडिशा, आंध्र प्रदेश, केरल और तमिलनाडु में समर्पित रेयर-अर्थ कॉरिडोर के विकास, घरेलू क्षमताओं के निर्माण की तात्कालिकता को रेखांकित करते हैं.

रेयर अर्थ एलिमेंट्स, लिथियम, कोबाल्ट और अन्य रणनीतिक खनिज इलेक्ट्रिक वाहनों से लेकर सेमीकंडक्टर तक उन्नत विनिर्माण की रीढ़ हैं. ये छूट न केवल पूंजी लागत को कम करती हैं, बल्कि अर्बन माइनिंग अवसंरचना के लिए भी परिस्थितियां बनाती हैं, यानी जीवन-समाप्त उत्पादों के पुनर्चक्रण के माध्यम से मूल्यवान सामग्रियों की पुनर्प्राप्ति. बजट अप्रत्यक्ष रूप से “सेकेंडरी रिसोर्सेज” को रणनीतिक परिसंपत्तियों के रूप में पुनर्परिभाषित करता है, और नीति व निवेश प्रोत्साहनों को सर्कुलर इकॉनमी की बुनियाद के अनुरूप करता है.

यह फोकस ऐसे समय पर आया है जब वैश्विक घटनाक्रम, जिनमें प्रमुख खनिजों पर चीन के निर्यात नियंत्रण शामिल हैं, ने आपूर्ति शृंखला की कमजोरियों को और बढ़ा दिया है. रणनीतिक घरेलू प्रसंस्करण क्षमता आयात पर निर्भरता कम करेगी, रोजगार सृजन को प्रोत्साहित करेगी और विनिर्माण पारिस्थितिकी तंत्र को भविष्य के लिए सुरक्षित बनाएगी.

स्वच्छ ऊर्जा और सर्कुलर ईंधन: नवीकरणीय से आगे

स्वच्छ ऊर्जा के प्रति भारत की प्रतिबद्धता लक्षित शुल्क छूट के साथ जारी है. लिथियम-आयन सेल निर्माण के लिए कैपिटल गुड्स पर कस्टम ड्यूटी राहत को बैटरी एनर्जी स्टोरेज सिस्टम्स (BESS) तक बढ़ाने से भंडारण लागत कम होगी, जो ग्रिड स्थिरता और नवीकरणीय एकीकरण के लिए एक महत्वपूर्ण कारक है. बजट में सोलर ग्लास निर्माण में उपयोग होने वाले सोडियम एंटिमोनेट पर भी ड्यूटी से छूट दी गई है, जिससे सौर परियोजनाओं की लागत और कम होगी.

ये उपाय भंडारण-समर्थित नवीकरणीय ऊर्जा तैनाती के लिए मांग की दृश्यता और लागत प्रतिस्पर्धात्मकता बनाते हैं, जो भारत के लो-कार्बन ग्रिड में संक्रमण का एक अहम हिस्सा है.

एक उल्लेखनीय प्रावधान बायोगैस-मिश्रित CNG पर केंद्रीय उत्पाद शुल्क की गणना करते समय बायोगैस के पूर्ण मूल्य को बाहर करना है. ऐतिहासिक रूप से, मिश्रित CNG पर जीवाश्म और जैव दोनों घटकों पर उत्पाद शुल्क लगता था, जिससे इसकी व्यावसायिक व्यवहार्यता प्रभावित होती थी. यह सुधार उस विकृति को दूर करता है और बायोगैस तथा कंप्रेस्ड बायोगैस (CBG) को अपनाने में तेजी लाता है, जो स्वदेशी, अपशिष्ट-आधारित ईंधन हैं और ऊर्जा संक्रमण को अपशिष्ट प्रबंधन तथा ग्रामीण आर्थिक अवसरों से जोड़ते हैं.

बायोगैस सर्कुलर अर्थव्यवस्था के सिद्धांत को जमीन पर उतारता है. इसमें जैविक कचरे को ईंधन में बदला जाता है और प्रक्रिया के बाद बचा पोषक तत्वों से भरपूर डाइजेस्टेट खेती में वापस उपयोग किया जाता है. बायोगैस को अधिक प्रतिस्पर्धी बनाकर बजट कई क्षेत्रों पर एक साथ असर डालता है, वेस्ट-टू-एनर्जी को बढ़ावा देता है, परिवहन क्षेत्र में डीकार्बोनाइजेशन को तेज करता है और ग्रामीण आजीविका के नए अवसर पैदा करता है. 

कार्यान्वयन: असली परीक्षा

बजटीय संकेत आवश्यक हैं, लेकिन पर्याप्त नहीं. CCUS की क्षमता को साकार करने के लिए कार्बन परिवहन और भंडारण के लिए नियामक ढांचे, स्पष्ट उपयोग बाजार और बहु-एजेंसी समन्वय की आवश्यकता होगी. क्रिटिकल मिनरल्स के प्रसंस्करण में त्वरित मंजूरी के साथ पर्यावरणीय सुरक्षा का संतुलन बनाना होगा. अर्बन माइनिंग और रीसाइक्लिंग अवसंरचना के लिए मजबूत एक्सटेंडेड प्रोड्यूसर रिस्पॉन्सिबिलिटी (EPR) प्रवर्तन और सुनिश्चित फीडस्टॉक की जरूरत होगी.

इन कार्यान्वयन चुनौतियों का समाधान केवल वित्तीय प्रोत्साहनों से नहीं हो सकता. उद्योग को नीति भागीदार के रूप में जुड़ना होगा, ढांचे सह-डिज़ाइन करने होंगे, पायलट परियोजनाओं का विस्तार करना होगा और पूंजी तैनाती के जोखिम को कम करना होगा.

औद्योगिक लचीलापन की नींव

केंद्रीय बजट 2026-27 नीति परिपक्वता को दर्शाता है. यह सर्कुलैरिटी, संसाधन सुरक्षा और डीकार्बोनाइजेशन को भारत की आर्थिक रणनीति के केंद्र में स्थापित करता है. ऐसा करके यह केवल पर्यावरणीय अनुपालन नहीं, बल्कि प्रतिस्पर्धात्मक बढ़त पैदा करता है.

आगे का अवसर परिवर्तनकारी है, भारी उद्योग के लिए, स्वच्छ ऊर्जा पारिस्थितिकी तंत्र के लिए और सर्कुलर इकॉनमी के लिए. समान रूप से, बड़े पैमाने पर परिणाम देने की जिम्मेदारी भी गहरी है. जैसे-जैसे नीति निर्माता, उद्योग और निवेशक इस दृष्टि के पीछे एकजुट होते हैं, भारत 21वीं सदी में सतत प्रतिस्पर्धात्मकता की परिभाषा को नए सिरे से गढ़ने के लिए तैयार है.

अतिथि लेखक: मसूद मलिक, चेयरमैन, CII नेशनल कमेटी ऑन वेस्ट टू वर्थ टेक्नोलॉजीज और मैनेजिंग डायरेक्टर एवं ग्रुप CEO, री सस्टेनेबिलिटी लिमिटेड


टैग्स
सम्बंधित खबरें

कविता में एक शोकगीत: मेरे मित्र और बैचमेट, हेमचंद सिरोही, IAS

केजे अल्फोंस लिखते हैं, सेवानिवृत्त आईएएस अधिकारी और बिहार के पूर्व राज्य चुनाव आयुक्त के रूप में, हेमचंद सिरोही को प्रशासनिक कुशलता, जन-केंद्रित शासन और जनसेवा में योगदान के लिए व्यापक सम्मान प्राप्त था. उनके योगदानों में महाबोधि मंदिर को यूनेस्को की विश्व धरोहर की मान्यता दिलाना और जमीनी स्तर पर विकास की पहल शामिल थीं.

4 days ago

दो दुनियाओं के बीच जिंदगी: उथल-पुथल भरे समय की चुनौती

लेखक के अनुसार, हमारे आसपास की दुनिया उतनी नहीं बदली है, जितनी हमारे दिमाग के भीतर की दुनिया बदल गई है. लगातार आती खबरों, सोशल मीडिया और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस से पैदा होने वाली चिंताओं के इस दौर में चुनौती है अपना ध्यान फिर से अपने नियंत्रण में लेना और उन चीजों पर फोकस करना, जिन्हें हम नियंत्रित कर सकते हैं.

4 days ago

कलाकार की अनंत रेखाएं: जोगेन चौधरी को श्रद्धांजलि

87 वर्ष की उम्र में दुनिया को अलविदा कहने वाले प्रख्यात कलाकार अपने पीछे ऐसी विशिष्ट कला छोड़ गए हैं, जो उनकी खास क्रॉस-हैचिंग शैली, असामान्य रेखाओं और गहराई से मानवीय चित्रों के लिए पहचानी जाती है.

5 days ago

समुद्र मंथन का अर्थशास्त्र: समृद्धि के लिए विरोधी शक्तियों की जरूरत क्यों है

लेखिका प्रियंका शर्मा कैंतुरा इस लेख में बताती हैं कि देवताओं, असुरों और लक्ष्मी के प्राकट्य की प्राचीन कथा प्रतिस्पर्धा, सहयोग और धन सृजन के बारे में क्या सीख देती है.

1 week ago

जेमी बीटन: असाधारण दिमाग और अरबों डॉलर के कारोबार के पीछे ज्योतिषीय गणना

क्रिमसन एजुकेशन के संस्थापक की शैक्षणिक महत्वाकांक्षा, उद्यमशीलता में उभार और 2027 की संभावनाओं का ज्योतिषीय विश्लेषण

1 week ago


बड़ी खबरें

दिल्ली में 1 नवंबर से BS-6 से पुराने वाहनों की नो एंट्री, जानें किन गाड़ियों को मिलेगी छूट

इस फैसले का असर दिल्ली से सटे हरियाणा के शहरों से आने वाले वाहनों पर भी पड़ेगा. खासतौर पर गुरुग्राम और फरीदाबाद से दिल्ली आने वाले वाहन चालकों को इस नियम का ध्यान रखना होगा.

1 day ago

सरदार पटेल के विचारों पर आगे बढ़ रहा भारत, रक्षा उत्पादन 1.80 लाख करोड़ रुपये के पार: राजनाथ सिंह

सरदार पटेल की 151वीं जयंती पर भारत-भारती ने दिल्ली में आयोजित किया राष्ट्रीय समारोह, रक्षा मंत्री ने कहा- राष्ट्रीय एकता और अखंडता को चुनौती देने वाली ताकतों के खिलाफ देश एकजुट रहेगा

18 hours ago

तमिलनाडु में 5 लाख से अधिक ग्रामीण घरों को मिलेगा ब्रॉडबैंड कनेक्शन, केंद्र ने दी सब्सिडी को मंजूरी

संशोधित भारतनेट कार्यक्रम के तहत तमिलनाडु के 4,767 गांवों तक मांग के आधार पर ब्रॉडबैंड कनेक्टिविटी पहुंचाई जाएगी. केंद्र की वित्तीय सहायता से ग्रामीण इलाकों में इंटरनेट नेटवर्क का विस्तार और डिजिटल सेवाओं तक पहुंच आसान होगी.

1 day ago

सोना 4,200 रुपये और चांदी 10 हजार रुपये टूटी, एक साल के निचले स्तर पर पहुंचे भाव; जानें गिरावट की वजह

MCX पर चांदी करीब 5 फीसदी और सोना 3 फीसदी तक टूट गया. अंतरराष्ट्रीय बाजार में भी दोनों कीमती धातुओं की कीमतों में बड़ी गिरावट दर्ज की गई.

1 day ago

IDBI बेच रही थी LIC, उसी दौरान Fairfax की कंपनी के बोर्ड में भी रहे LIC के निदेशक

पूर्व नीति आयोग प्रमुख, RBI के डिप्टी गवर्नर, SEBI बोर्ड के सदस्य, रक्षा सचिव और LIC के चेयरमैन जैसे सार्वजनिक पदों पर रह चुके लोगों को Fairfax की भारतीय कंपनियों ने अपने साथ जोड़ा.

1 day ago