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अब ये मर्ज बहुत बढ़ गया है:दवा से काम नहीं चलेगा, इसलिए अब सर्जरी जरूरी!

सरकार और समाज को इस बात पर ध्यान देना होगा कि आबादी का संतुलन न बिगड़े, वरना स्थिति भयावह हो सकती है.

बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 3 years ago

  • पूरन डावर, चिंतक और विश्लेषक

हर व्यक्ति की अपनी पीड़ा होती है और उसे व्यक्त करने का तरीका भी अलग-अलग हो सकता है. आजादी के 75 वर्ष बाद भी हम जाति-धर्म में उलझे हैं, यह इस देश की सबसे बड़ी विडम्बना है. हालांकि, मौजूदा सरकार के नेतृत्व में सबको साथ लेकर चलने की दिशा में कई कदम उठाए गए हैं. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने स्थानीय और अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर 'सबके साथ' की परिकल्पना पर काम किया है. अपने शपथ ग्रहण समारोह में मुस्लिम देशों को निमंत्रण देना हो या फिर उन मुल्कों की यात्रा, PM मोदी ने सबको साथ लेकर चलने की इच्छा दर्शाई है.

उम्मीद अनुरूप परिणाम नहीं
उन्होंने पाकिस्तान सरकार को स्पष्ट संदेश दिया है कि हमें आपस में नहीं, बल्कि गरीबी और आतंकवाद जैसी समस्याओं से लड़ना है. PM मोदी ने दोनों देशों के बीच तनाव दूर करके शांति स्थापित करने के तमाम प्रयास किए. हालांकि, उसके परिणाम उम्मीद अनुरूप नहीं आए, इसकी बड़ी वजह है आतंक के चंगुल में फंसी पाकिस्तान की राजनीति. इसी तरह, देश के हाल पर नजर डालें, तो सरकार सभी धर्म-समुदायों को साथ लेकर चलने की कोशिश कर रही है. लेकिन उसके परिणाम क्या हैं और किस वजह से बात अटकी हुई है, इसके लिए शोध की ज़रूरत नहीं है.

वास्तविकता है कि बंटवारा हुआ
आजादी की लड़ाई सभी ने मिलकर लड़ी थी, मुस्लिमों का भी उसमें योगदान था. भले ही ऐसे गिने-चुने मुस्लिम हों, जिन्होंने बंटवारे की कल्पना की हो, लेकिन वास्तविकता है कि बंटवारा हुआ. पूरी दुनिया आज मुस्लिम आतंकवाद से ग्रस्त है. कश्मीर में जहां मुस्लिम आबादी अधिक थी, वहां हिन्दुओं के साथ बर्बर सलूक हुआ. उनके खिलाफ फतवे जारी किए गए. आवाज उठाने वालों को मौत का डर दिखाया गया. अभी भी जब-तब कोई उठकर माहौल गर्माने की कोशिश करता रहता है. देश के बाकी हिस्सों में भी इस पीड़ा को महसूस किया गया है.

...तो भयावह होगी स्थिति
अभी चेतने का समय है, क्योंकि आबादी का संतुलन बिगड़ता गया तो स्थिति वास्तव में भयावह हो सकती और ऐसी परिस्थितियों को दुरुस्त करने में पीड़ा तो होती है. हर मानव को होती है. होनी भी चाहिए. आपकी पीड़ा वाजिब है, लेकिन रोग का इलाज आवश्यक है. आप कब तक दर्द की गोली खाकर जीते रहेंगे? पूरे वाइटल ऑर्गन काम करना बंद कर दें या समय रहते सर्जरी...दोनों में क्या उचित होगा?


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