होम / एक्सपर्ट ओपिनियन / अमूल: सोढ़ी ने खुद को कुरियन का सच्चा शिष्य साबित किया

अमूल: सोढ़ी ने खुद को कुरियन का सच्चा शिष्य साबित किया

आरएएस सोढ़ी को जून 2010 में अमूल का एमडी बनाया गया था, जिसके बाद से वह बतौर एमडी कंपनी की कमान संभाले रहे थे.

बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 3 years ago

  • विवेक शुक्ला, वरिष्ठ पत्रकार

भारत को तिरंगा और क्रिकेट के अलावा अमूल बटर का स्वाद भी जोड़ता है. इसलिए ही अमूल के उत्पादों के लिए कहा जाता है – ‘दि टेस्ट आफ इंडिया.’ हरेक हिन्दुस्तानी के दिल में बसने वाली इस कंपनी के मैनेजिंग डायरेक्टर के पद से आरएएस सोढ़ी की विदाई अपने आप में कतई सामान्य घटना नहीं मानी जा सकती. अगर सोढ़ी के गुरु वर्गीज कुरियन ने गुजरात को-ऑपरेटिव मिल्क मार्केटिंग फेडरेशन लिमिटेड को खड़ा किया तो उसे आगे लकेर जाने में आरएस सोढ़ी के योगदान को कतई कम करके नहीं देखना चाहिए. जीसीएमएमएफ को आमतौर पर लोग इसके ब्रांड अमूल के नाम से जानते हैं.

40 साल तक किया काम
अब जबकि ना तो पेशेवर और न ही संस्थान एक दूसरे को लेकर निष्ठा का भाव रखते हैं, तब सोढ़ी ने चालीस सालों तक एक कंपनी में काम किया. सोढ़ी साल 1982 से कंपनी के साथ जुड़े हुए थे. उन्होंने कंपनी में बतौर सीनियर सेल्स मैनेजर अपने करियर की शुरुआत की थी. इसके बाद वह साल 2000 से 2004 तक कंपनी के जनरल मैनेजर (मार्केटिंग) के पद पर भी रहे. जून 2010 से उन्हें अमूल का एमडी बनाया गया, जिसके बाद पिछले 13 सालों से वह बतौर एमडी कंपनी की कमान संभाले हुए थे. मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, सोढ़ी को एमडी पद से हटाने का फैसला गुजरात कोऑपरेटिव मिल्क मार्केटिंग फेडरेशन की बोर्ड बैठक में लिया गया. सोढ़ी को साल 2017 में 5 साल का सेवा विस्तार दिया गया था. हालांकि सोढ़ी कह रहे हैं कि वे एक्सटेंशन पर चल रहे थे. उन्हें तो अपना पद किसी भी वक्त छोड़ना ही था.

उत्तराधिकारी तैयार करना जरूरी
यह समझना होगा कि शिखर पर आसीन व्यक्ति को अपने पद को एक दिन तो छोड़ना ही होगा. इसलिए उन्हें अपने संभावित उत्तराधिकारियों को तैयार कर लेना चाहिए. आखिर हरेक व्यक्ति के सक्रिय करियर की एक सीमा होती है. उसके बाद तो उसे अपने पद से जाना ही होता है. इसलिए बेहतर होगा कि किसी कंपनी का प्रमोटर, चेयरमैन या किसी संस्थान का जिम्मेदार पद पर आसीन शख्स अपना एक या एक से अधिक उत्तराधिकारी तैयार कर ले. बेहतर उत्तराधिकारी मिलने से किसी कंपनी या संस्थान की ग्रोथ प्रभावित नहीं होती. सत्ता का हस्तांतरण बिना किसी संकट या व्यवधान के हो जाता है. आप कंपनी को मेंटर या संरक्षक के रूप में शिखर या कहें कि चेयरमैन के पद से हटने के बाद भी सलाह दे सकते हैं.

अनुभव का उठाए लाभ
रतन टाटा ने 2017 में टाटा समूह के चेयरमैन पद को छोड़ दिया था. वे तब से टाटा समूह के चेयरमैन एमिरटस हैं. वे रोजमर्रा के कामकाज से तो अपने को अलग कर चुके हैं, पर अभी टाटा समूह अपने अहम फैसले लेते हुए उनके अनुभव का लाभ उठाता है. जीसीएमएमएफ को आगे भी सोढ़ी के लंबे अनुभव का लाभ उठाना चाहिए. हां,जिस संस्थान में लगातार नए चेहरे नहीं आएंगे या नहीं आने दिए जाएंगे,वह खत्म हो जाएगा. इस बारे में कोई बहस हो ही नहीं सकती है. बैंकिंग की दुनिया पर नजर रखने वालों को आदित्य पुरी का नाम बहुत अच्छे से पता है. उन्होंने एचडीएफसी बैंक को बनाया और खड़ा किया. उसकी गिनती देश के सर्वश्रेष्ठ बैंकों में होती है. लंबे समय तक एचडीएफसी बैंक का नेतृत्व करने के बाद पुरी रिटायर हो गए. लेकिन, उन्होंने अपने कई योग्य उत्तराधिकारी तैयार कर लिए. उन्हें नेतृत्व के गुण समझाए-सिखाए. इसलिए वहां सत्ता का हस्तातंरण मजे से हो गया. पुरी के जाने के बाद भी एचडीएफसी बैंक आगे बढ़ रहा है. 

मुखिया से होती है पहचान
दरअसल किसी परिवार से लेकर संस्थान की पहचान उसके मुखिया से होती है. अब अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) को ले लीजिए. करीब छह सालों तक डॉ रणदीप गुलेरिया एम्स के निदेशक रहे. डॉ गुलेरिया ने अपने पद पर रहते हुए शानदार काम किया. उन्हें सारा देश जानता है क्योंकि सारे देश को एम्स की क्षमताओं पर भरोसा है. पर क्या आप जानते हैं कि एम्स को एक श्रेष्ठ संस्थान के रूप में किसने खड़ा किया? उस महान डाक्टर, शिक्षक और प्रशासक का नाम था डॉ.बी.बी.दीक्षित (1902-1977). एम्स 1956 में बना तो सरकार ने डॉ दीक्षित को इसके पहले निदेशक का पदभार संभालने की पेशकश की. उन्होंने इसे स्वीकार किया. वे इससे पहले पुणे के बी.जे. मेडिकल कॉलेज के प्रिंसिपल रह चुके थे. वे फिज़ीआलजी (शरीर विज्ञान) विषय के प्रफेसर भी थे. एम्स से जुड़े पुराने लोग बताते हैं कि डॉ दीक्षित ने सरकार से साफ कह दिया था कि वे तब ही एम्स में आएंगे जब उन्हें काम करने का फ्री हैंड मिलेगा. डॉ दीक्षित ने एम्स में चोटी के प्रोफेसरों/ डाक्टरों को जोड़ा. वे हरेक नियुक्ति मेरिट पर करते थे. वे लगातार एम्स में रिसर्च करने वालों को प्रोत्साहित करते थे. उनकी प्रशासन पर पूरी पकड़ रहा करती थी. डॉ दीक्षित सत्य और न्याय का साथ देने वाले इंसान थे. उन्होंने देश को एम्स के रूप में एक विश्व स्तरीय संस्थान दिया और यहां रहते हुए अपने कुशल उत्तराधिकारी भी तैयार किए. 

नहीं लगा कोई आरोप
तो लब्बो- लुआब यह है कि बिना कुशल नेतृत्व के कोई संस्थान बुलंदियों को नहीं छू सकती. हरेक संस्थान को लगातार न्यायप्रिय और मेहनती नेतृत्व मिलते रहना चाहिए. अंत में फिर सोढ़ी जी की बात करेंगे. सोढ़ी अपने जीवन के हर पल को सार्थक बनाने में जुटे रहे. बेशक मानव जीवन क्षण भंगुर हो, फिर भी उसे इंसान को अपने सतकर्मों से ही सार्थक बनाने का अवसर ईश्वर प्रदान करते हैं. अंधकार का साम्राज्य चाहे कितना भी बड़ा हो पर एक कोने में पड़ा हुआ छोटा सा दीपक अपने अंत समय तक अंधेरे से मुकाबला तो करता ही रहता है. अब देखिए कि फूलों का जीवन कितना छोटा सा होता है पर वो अपने सुगंध देने के धर्म का निर्वाह तो करते ही हैं. सोढ़ी ने अपने जीवन को फूलों और दीपक जैसा जाने-अनजाने में बना ही लिया है. वे सदैव बेहतर कर्म करते रहना चाहते हैं. अपने पद से मुक्त होने के बाद भी वे शांत हैं. उनके रहते उनकी कंपनी पर किसी तरह का कोई आरोप नहीं लगा है. उन पर कभी किसी बैंक या अन्य वित्तीय संस्थान से धन लेने के बाद उसे वापस न करने का भी कोई आरोप नहीं लगा है. उन्होंने अपने को वर्गीज कुरियन का सच्चा शिष्य साबित किया.


टैग्स
सम्बंधित खबरें

दुनिया ने बनाया युवा संस्कृति का संग्रहालय, भारत को चाहिए ऐसे दर्जनों संग्रहालय

इस संग्रहालय को अलग बनाने वाली बात इसकी वस्तुओं को संग्रहित करने की सोच है. टीम अपने दृष्टिकोण को "बॉटम-अप क्यूरेशन" कहती है, जिसे जानबूझकर हस्तनिर्मित रखा गया है.

11 hours ago

3C फ्रेमवर्क से बंगाल की आर्थिक पुनर्बहाली को मिलेगी नई दिशा

बंगाल की चुनौती संसाधनों की कमी नहीं है. वास्तविक समस्या यह है कि राज्य अपनी मौजूदा संपत्तियों को एक प्रभावी आर्थिक रणनीति में बदलने में विफल रहा है.

18 hours ago

भारत-जापान साझेदारी और मानव-केंद्रित एआई का भविष्य

प्रोफेसर सी. राज कुमार लिखते हैं, 'भारत और जापान एक ऐसे मोड़ पर खड़े हैं जहां वे AI के लिए चौथा और मौलिक मार्ग विकसित कर सकते हैं.

5 days ago

ईरान को ‘अनफ्रीज’ करना: असली चुनौती अब शुरू होगी

सिद्धार्थ अरोड़ा लिखते हैं, 'अमेरिका-ईरान शांति समझौता अंतिम चरण की ओर बढ़ रहा है और रिपोर्टों के अनुसार 60 दिनों की अवधि में लगभग 24 अरब डॉलर जारी किए जा सकते हैं. ऐसे में सबसे महत्वपूर्ण सवाल यह है कि यह पैसा जब ईरान पहुंचेगा, तब उसका क्या होगा?'

6 days ago

2026 की तीसरी तिमाही का ज्योतिष: एआई, संघर्ष और वैश्विक परिवर्तन

ज्योतिषाचार्य विक्रम चन्दीरमानी लिखते हैं कि 2026 के पहले छह महीनों के दौरान इनमें से कई विषय पहले ही उभरने लगे हैं. प्रौद्योगिकी कंपनियों के मूल्यांकन को लेकर चिंताएँ लगातार अधिक स्पष्ट होती जा रही हैं. यह चिंता केवल AI से जुड़ी कंपनियों तक सीमित नहीं है, बल्कि दुनिया की कुछ सबसे मूल्यवान निजी कंपनियों, जैसे स्पेसएक्स, के उच्च मूल्यांकन को लेकर भी देखी जा रही है.

1 week ago


बड़ी खबरें

₹860 करोड़ का कोहिनूर सौदा, राज ठाकरे की चुप्पी

एक राजनेता एक रियल एस्टेट सौदे में प्रवेश करता है. एक सरकारी संस्था से जुड़ी वित्तीय कंपनी ₹225 करोड़ का निवेश करती है. फिर वही संस्था ₹135 करोड़ के नुकसान के साथ उस सौदे से बाहर निकलती है.

11 hours ago

मिडिल ईस्ट प्रैक्टिस के लिए प्राइमस पार्टनर्स ने मोहन दोईफोडे को बनाया MD

पूर्व डेलॉइट कंसल्टिंग लीडर GCC क्षेत्र में कंपनी के विस्तार और क्लाइंट संबंधों को देंगे नई दिशा

10 hours ago

GDP से आगे: क्यों भारत की प्रगति का पैमाना सिर्फ आर्थिक वृद्धि नहीं, बल्कि खुशहाली और जीवन गुणवत्ता भी होना चाहिए

पूर्व उत्तर प्रदेश मुख्य सचिव और लेखक आलोक रंजन का मानना है कि भारत की विकास यात्रा को केवल आर्थिक उत्पादन तक सीमित नहीं रहना चाहिए. उनके अनुसार, खुशहाली, जीवन की गुणवत्ता, शिक्षा, स्वास्थ्य और समावेशी विकास को भी प्रगति का महत्वपूर्ण पैमाना बनाया जाना चाहिए.

15 hours ago

Truhome Finance को 3,000 करोड़ रुपये के आईपीओ के लिए सेबी की मंजूरी

कंपनी के कुल एयूएम में 57.37 प्रतिशत हिस्सा हाउसिंग लोन का है, जबकि 39.22 प्रतिशत हिस्सा लोन अगेंस्ट प्रॉपर्टी का है. अन्य ऋण उत्पादों की हिस्सेदारी 3.41 प्रतिशत है.

11 hours ago

दुनिया ने बनाया युवा संस्कृति का संग्रहालय, भारत को चाहिए ऐसे दर्जनों संग्रहालय

इस संग्रहालय को अलग बनाने वाली बात इसकी वस्तुओं को संग्रहित करने की सोच है. टीम अपने दृष्टिकोण को "बॉटम-अप क्यूरेशन" कहती है, जिसे जानबूझकर हस्तनिर्मित रखा गया है.

11 hours ago