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एक आनंदमय यात्रा: जागरण का वादा

आने वाले वर्ष में, मैं एक ऐसी यात्रा का मार्गदर्शन करूंगा, जिसे मैंने पहले कभी नहीं किया है, और उन सभी को जागरण की अवस्था तक ले जाऊंगा जो इसके लिए तैयार हैं.

बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 10 months ago

मेरा इरादा पूरे वर्ष को इसी यात्रा को समर्पित करने का है, इस आशा के साथ कि मैं एक ऐसी व्यक्तिगत विरासत छोड़ जाऊंगा, जो तब तक जीवित रहे, जब तक जागरण का संदेश अपनी प्रासंगिकता बनाए रखे.

आध्यात्मिक यात्राएं कई प्रकार की होती हैं, लेकिन जागरण अनोखा है. यह ऐसा मार्ग नहीं है जो बिंदु A से बिंदु B तक ले जाता हो. ऐसा इसलिए है क्योंकि जागना एक अवस्था का परिवर्तन है. हम यह नहीं कहते, “मैं कल रात पर्याप्त देर तक नहीं सोया, इसलिए जाग नहीं पाया.” नींद, जागने से अलग अवस्था है. इसलिए इसमें लगने वाला समय अप्रासंगिक है.

इसे दूसरे तरीके से कहें तो, कालातीत होने में कितना समय लगता है? यह प्रश्न ही निरर्थक है, क्योंकि एक बार फिर, कालातीत होना समय में बंधे रहने से अलग अवस्था है. इसी तरह, जागने का मार्ग कोई दूरी तय नहीं करता, क्योंकि जागना यहीं और अभी होता है, वर्तमान में जीने की शाश्वत पुनरावृत्ति के रूप में.

दुर्भाग्य से, ये अनोखी विशेषताएं जागरण के उद्देश्य को आगे बढ़ाने में सहायक नहीं रहीं. रोजमर्रा का जीवन समय और स्थान की सीमाओं में घिरा रहता है. हमारी गतिविधियां निश्चित लक्ष्यों की ओर केंद्रित होती हैं. हम अपने शरीर को उम्र के साथ बदलते देखते हैं, जो जन्म से मृत्यु तक एक सीधी रेखा का संकेत देता है. सदियों से मार्गदर्शकों, मनीषियों, शिक्षकों, संतों और गुरुओं ने यह कहा है कि जागरण के मामले में रोजमर्रा का जीवन भरोसेमंद नहीं है, ठीक वैसे ही जैसे बिस्तर पर सोते रहना सुबह आंखें खोलने से असंबंधित है.

यदि यह सदियों पुराना संदेश रहा है, तो उन्हीं सदियों में अनगिनत लोगों ने इस संदेश की अनदेखी भी की है. अजीब बात यह है कि एक सर्वशक्तिमान, सर्वज्ञ, अदृश्य ईश्वर में विश्वास करने वालों को मनाना कहीं आसान है, बनिस्बत उन्हें अपनी स्वयं की जागने की क्षमता पर विश्वास दिलाने के. महान सूफी कवि रूमी अत्यंत मार्मिक रूप से पूछते हैं, “जब दरवाज़ा इतना खुला है, तो तुम जेल में क्यों रहते हो?”

इस तरह की लगातार बनी रहने वाली समस्या की एक अच्छी बात यह है कि शानदार समाधान उभरने के लिए पर्याप्त समय मिला है. यही समाधान ‘द ईयर ऑफ अवेकनिंग’ का केंद्र होंगे, जो मैंने 2026 को नाम दिया है. हम जागने के 52 तरीके आजमाएंगे, 52 दृष्टिकोण अपनाएंगे, 52 ऐसे ट्रिगर खोजेंगे जो हर उस “आहा!” क्षण तक ले जाएंगे, जब जागरण संभव, व्यावहारिक और व्यक्तिगत बन जाता है.

हजारों वर्षों में प्रस्तावित सभी शानदार समाधान एक ही सत्य पर आधारित हैं: जो कुछ मानव मन ने बनाया है, उसे वह मिटा भी सकता है. सोए रहने की अवस्था वर्षों की असावधानी, पुरानी कंडीशनिंग, दूसरों से मिली मान्यताओं, कम अपेक्षाओं और अवसाद व चिंता के लगातार खतरों पर निर्भर करती है. इन स्थितियों ने चाहे जितना दर्द और पीड़ा पैदा की हो, वे जागरण की अवस्था को न तो प्रभावित करती हैं और न ही विकृत, क्योंकि जागरण इन सबसे मुक्त है.

मन की मन को ही चंगा करने की क्षमता को बौद्ध धर्म में “कांटे से कांटा निकालना” कहा गया है. इसका अर्थ यह नहीं कि यह प्रक्रिया दर्दनाक है. इस प्रतीक का शाब्दिक अर्थ चेतना की वह क्षमता है, जो अचेतनता को ठीक कर सकती है. अपने आप में, यह एक आनंददायक संभावना है. अपने मूल स्वरूप में, आप शुद्ध चेतना के गुणों से युक्त हैं, जो स्वतंत्र, असीम, कालातीत, रचनात्मक और आनंदमय है.

जागरण के एक वादे होने का अंतिम कारण, न कि केवल एक दूर की आध्यात्मिक कल्पना, यह है कि अपने वास्तविक स्वभाव में लौटना सहज है, ठीक वैसे ही जैसे सुबह जागना सहज होता है. एक नई अवस्था का उदय होता है. इस अवस्था परिवर्तन को अक्सर आनंदपूर्ण शब्दों में व्यक्त किया गया है, जैसे प्राचीन रहस्यवादी कवि कबीर लिखते हैं, “तुम्हारे भीतर एक चिंगारी है, जो ऊपर उठना चाहती है. अपने हृदय का द्वार खोलो, और उसकी अग्नि संसार में प्रवाहित होने दो.”

लेकिन वास्तविकता यह है कि जागना उतना ही भिन्न होता है जितने दो व्यक्ति एक-दूसरे से अलग होते हैं, और यह अक्सर उस सामाजिक स्व से भी आश्चर्यजनक रूप से अलग होता है, जिसे हम दुनिया के सामने प्रस्तुत करते हैं या उस “मैं” से, जिसे हम आईने में पहचानते हैं. हालांकि, हर कहानी में एक बात अपरिवर्तित रहती है. आप हमेशा यह जान जाते हैं कि आप अब सोए हुए नहीं हैं.

आने वाले वर्ष में, प्रत्येक साप्ताहिक पोस्ट और ध्यान का केंद्र मेरा यह लंबे समय से चला आ रहा विश्वास होगा कि वास्तविकता को तत्काल बचाए जाने की आवश्यकता है. मानवता के सामने बहुत सी समस्याएं हैं, जिन्हें केवल जागृत लोगों की उपस्थिति ही सुलझा सकती है. यह बचाव अभियान तभी पूर्ण होता है, जब वास्तविकता इस सत्य से मेल खाती है कि हम वास्तव में कौन हैं और यहां क्यों हैं. जागरण का मार्ग ऐसा है, जिस पर हर व्यक्ति चल सकता है, मुझे आशा है कि यह आपको आकर्षित करेगा.

दीपक चोपड़ा, अतिथि लेखक

(एमडी, FACP, FRCP, चेतना के अन्वेषक और इंटीग्रेटिव मेडिसिन व व्यक्तिगत परिवर्तन के विश्वप्रसिद्ध अग्रदूत हैं. चोपड़ा, DeepakChopra.ai के सह-संस्थापक हैं, जो उनका एआई ट्विन और वेल-बीइंग सलाहकार है. वे रॉयल कॉलेज ऑफ फिजिशियंस एंड सर्जन्स ऑफ ग्लासगो में चिकित्सा के मानद फेलो भी हैं. वह 95 से अधिक पुस्तकों के लेखक हैं, जिनका अनुवाद 43 से अधिक भाषाओं में किया गया है, जिनमें कई न्यूयॉर्क टाइम्स बेस्टसेलर शामिल हैं.)
 


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