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अमिताभ बच्चन के दिल्ली वाले बंगले का क्या हुआ? जानिए अभी किस हाल में है?

अमिताभ बच्चन 1959 से लेकर 1962 तक डीयू के किरोड़ीमल कॉलेज हॉस्टल के कमरा नंबर 65 में रहे. वे तब यहां पर बीएससी के विद्यार्थी थे. वे तीन सालों तक एक ही कमरे में रहे थे.

बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 3 years ago

विवेक शुक्ला
(नवभारत टाइम्स)

नई दिल्ली: गुलमोहर पार्क का वो सबसे खास बंगला जमींदोंज होने के बाद अब नए सिरे से खड़ा हो रहा है. पहले वाले बंगले के अवशेष अब भी दायें-बायें बिखरे हुए हैं. उम्मीद है कि ये भी आने वाले कुछ महीनों के बाद हटा दिए जाएंगे. जाहिर है, वह वक्त भी आ जाएगा, जब यहां के लोग यह नहीं कहेंगे कि बी-8 अमिताभ बच्चन का घर है.

अब बच्चन परिवार का नहीं रहा बंगला
जब अमिताभ बच्चन के माता-पिता का बनवाया हुआ बंगला ही नहीं रहा तो यादें कैसी. आज बिग बी के चाहने वाले उनका 80वां जन्म दिन मना रहे हैं. अमिताभ बच्चन ने गुलमोहर पार्क के अपने घर को कुछ समय पहले असम के एक बिस्कुट बनाने वाली कंपनी के चेयरमैन अवनी बदर को बेच दिया था.

तेजी बच्चन को मिला था प्लॉट
दरअसल, इस घर के लिए प्लॉट उनकी मां तेजी बच्चन को मिला था. हालांकि वह पत्रकार नहीं थीं, इसलिए उनको गुलमोहर पार्क ग्रुप हाउसिंग सोसायटी का मेंबर बनाए जाने का विरोध भी हुआ था. तेजी जी आकाशवाणी में काम करती थीं. गुलमोहर पार्क में रहने वाले वरिष्ठ पत्रकार श्री के.एन.गुप्ता को याद है, जब हरिवंश राय बच्चन और तेजी बच्चन ने खड़े होकर अपना आशियाना सोपान बनवाया था. ये 1970 के शुरुआती साल थे. तब तक उनके दोनों पुत्र अमिताभ और अजिताभ अपने करियर बनाने के लिए दिल्ली को छोड़ चुके थे.

जब अमिताभ ने बेच दिया सोपान
बहरहाल, गुलमोहर पार्क वालों को हैरानी इस बात की है कि तेजी बच्चन की मृत्यु के कई सालों तक सोपान के स्वामित्व पर कोई कार्रवाई नहीं हुई. पर इस साल सोपान को बेचने से पहले अमिताभ बच्चन ने इसका स्वामित्व अपने नाम करवाते ही इसे बेच दिया. गुलमोहर पार्क के बड़े बुजुर्गों को याद हैं वे समय भी जब डॉ. हरिवंश राय बच्चन शाम को गुलमोहर पार्क क्लब में मित्रों के साथ मिलने के लिए पहुंचते थे.

बच्चन जी और तेजी जी गुलमोहर में रहते रहे
अमिताभ बच्चन के सफल और स्थापित होने पर भी बच्चन जी और तेजी जी गुलमोहर में रहते रहे, पर डॉन फिल्म की अपार सफलता के बाद अमिताभ बच्चन उन्हें अपने साथ मुंबई ले गए थे. उसके बाद वे मुंबई में ही बस गए. फिर सोपान में अमिताभ और उनके परिवार के किसी अन्य सदस्य का आना-जाना लगातार घटता गया. हालांकि बच्चन दंपति कभी-कभार किसी कार्यक्रम में दिल्ली आते तो सोपान में ही ठहरते.

सोपान की दिवाली सारे गुलमोहर पार्क में मशहूर
सोपान की दिवाली सारे गुलमोहर पार्क में मशहूर हुआ करती थी. उसमें सारा बच्चन कुनबा शामिल रहता था. गुलमोहर पार्क में पिछली आधी सदी से रह रहे डॉ. सुभाष वशिष्ठ ने बताया कि एक बार दिवाली पर अनार जलाते हुए अमिताभ बच्चन के हाथ जल गए थे.

के.एम. कॉलेज में अमिताभ बच्चन का कमरा
अमिताभ बच्चन 1959 से लेकर 1962 तक डीयू के किरोड़ीमल कॉलेज हॉस्टल के कमरा नंबर 65 में रहे. वे तब यहां पर बीएससी के विद्यार्थी थे. वे तीन सालों तक एक ही कमरे में रहे थे. जाहिर है कि अब वह कमरा यहां का अति महत्वपूर्ण हॉस्टल रूम का दर्जा हासिल कर चुका है. इसकी दीवार पर लगी है उस अमिताभ बच्चन की फोटो जो लगातार आधी सदी से भी अधिक समय से बॉलीवुड पर अपनी श्रेष्ठ अदाकारी और गरिमामय शख्सियत के चलते खास बना हुआ है. उन्होंने नैनीताल के शेरवुड स्कूल के बाद यहां दाखिला लिया था. जिस कमरे में अमिताभ बच्चन रहे, वहां पर आजकल हिमाचल प्रदेश का एक युवक रहता है. वह कॉलेज की क्रिकेट टीम में भी है. अमिताभ बच्चन जब किरोड़ीमल कॉलेज में पढ़ रहे थे, तब तक उनके पिता डॉ. हरिवंश राय बच्चन विदेश मंत्रालय में हिन्दी अधिकारी के रूप में काम कर रहे थे. वे विदेश मंत्रालय से 1955 में जुड़ गए थे.

अमिताभ बच्चन के गुरु फ्रेंक ठाकुर दास
किरोड़ीमल कॉलेज (केएम कॉलेज) में फ्रेंक ठाकुर दास के नाम पर सभागार है. इसका कुछ साल पहले निर्माण हो रहा था, तब अमिताभ बच्चन ने 51 लाख रुपये की सहयोग राशि दी थी. दरअसल फ्रेंक ठाकुर दास ने अमिताभ बच्चन को केएम कॉलेज की ड्रामा सोसायटी से जोड़ा था. अमिताभ बच्चन यहां रहे. उन्होंने अमिताभ बच्चन को रंगमंच की बारीकियों से साक्षात्कार करवाया था. वे अंग्रेजी तथा पॉलिटिकल साइंस के विद्वान थे. उन्हें रंगमंच की दुनिया की भी गहरी समझ थी. फ्रेंक ठाकुर दास पंजाबी ईसाई थे. उनकी पत्नी भी डीयू के एक कॉलेज की प्रिंसिपल थी.

छात्रों के बीच ही रहते थे फ्रेंक ठाकुर
फ्रेंक ठाकुर दास ने अपने कॉलेज में ड्रामा सोसायटी की स्थापना की थी. वे केएम कॉलेज से लगभग 40 सालों तक जुड़े रहे. फ्रेंक ठाकुर दास अपनी कक्षाएं समाप्त करने के बाद अपने ड्रामा क्लब की गतिविधियों में व्यस्त हो जाते थे. सुबह से देर शाम तक छात्रों के बीच में रहा करते. फ्रेंक ठाकुर दास के खास शार्गिदों में सतीश कौशिक, कुलभूषण खरबंदा, शक्ति कपूर, दिनेश ठाकुर, रवि वासवानी जैसे बॉलीवुड के बड़े नाम भी रहे. ये सब भी केएम कॉलेज में ही थे. उन्होंने इन सबको भी अभिनय, निर्देशन, मंच सज्जा आदि की जानकारी दी. फ्रेंक ठाकुर दास की शख्सियत बहुआयामी थी.
 


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