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निरंतरता, संतुलन और परिवर्तन, मोदी 3.0 सरकार का होना चाहिए मूलमंत्र, जानिए कैसे?
प्रधानमंत्री मोदी को ‘बीजेपी और अर्थव्यवस्था’ पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए और सभी क्षेत्रों में ठोस और महत्वपूर्ण सुधार करने चाहिए.
बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 2 years ago
मोदी सरकार का तीसरा कार्यकाल देखने लायक होगा और उम्मीद है कि यह सबसे परिवर्तनकारी भी होगा. पीएम मोदी से उम्मीद की जाएगी कि वे सरकार और राष्ट्र को बदलें और पिछले दो कार्यकालों में किए गए अच्छे काम को जारी रखें. पिछले दो कार्यकालों में सरकार ने बड़े सुधारों की बजाय छोटे-छोटे बदलावों और सामाजिक योजनाओं से लोगों को खुश करने पर जोर दिया. लेकिन वर्तमान चुनावी परिणाम स्पष्ट रूप से दिखाते हैं कि बड़े आर्थिक सुधारों की कमी और नौकरशाही, न्यायपालिका और पुलिस में सुधारों की कमी का मतलब है कि सरकार के पास रणनीतिक बदलाव के दृष्टिकोण से दिखाने के लिए बहुत कुछ नहीं है. विपक्षी दलों ने एकजुट होकर वोट हासिल किए, जबकि पार्टी के मुख्य समर्थकों ने शायद हल्का नाराजगी जताने के लिए संदेश दिया है.
तीसरी बार जीतना एक बड़ी उपलब्धि
हालांकि, यह सरकार के लिए इस चुनाव में जीत खास है. ‘400 पार’ का नारा कुछ लोगों को मजाक लग सकता है, लेकिन जीत के लिए प्रयास करना कभी भी बेकार नहीं होता. 1989 से देश ने ज्यादातर कमजोर गठबंधनों को देखा है, ऐसे में किसी प्रधानमंत्री का लगातार तीसरी बार जीतना एक बड़ी उपलब्धि है, चाहे कोई कुछ भी कहे. 400 के लक्ष्य को हासिल न कर पाना सरकार के लिए आत्मनिरीक्षण का विषय है, ना कि विपक्ष के लिए खुशी की बात. अब पीएम नरेंद्र मोदी के लिए चुनौती है कि वे TDP और JDU जैसे संभावित अस्थिर सहयोगियों को संभालें और उन्हें लंबे समय से लंबित पड़े फैसलों को लागू करने में समर्थन देने के लिए मनाएं. मेरे विचार में पीएम को ‘बीजेपी और अर्थव्यवस्था’ के मंत्र पर ध्यान देना चाहिए और इस दिशा में ठोस और महत्वपूर्ण सुधार दिखाने चाहिए.
नौकरशाही: भारत की धीमी और पुराने जमाने की नौकरशाही सुधार की मांग कर रही है और यह कुछ ऐसा था जिसकी उम्मीद देश ने मोदी को पहली बार पूर्ण बहुमत देकर की थी. लेकिन ऐसा नहीं हुआ, बल्कि नौकरशाही के कुछ हिस्सों को ऐसे बड़े-बड़े अधिकार दिए गए हैं जिन्होंने आम आदमी और छोटे व मझोले व्यवसायों को बहुत नुकसान पहुंचाया है. निस्संदेह, यह मोदी 3.0 की पहली प्राथमिकता होनी चाहिए. भारतीय नौकरशाही का नागरिकों पर हावी रहना, खुद की पीठ थपथपाते हुए आगे बढ़ना और वैश्विक मानकों से बहुत पीछे रहना अब खत्म होना चाहिए.
न्यायपालिका: एक ऐसे देश में जहां बहुत सारी मुकदमेबाजी होती है और कुछ मामलों में दशकों से लंबित हैं, न्यायपालिका में मजबूत सुधार की आवश्यकता है. न्यायपालिका बिना सोचे-समझे पुलिस और सार्वजनिक अभियोजन के आरोपपत्र स्वीकार कर लेती है और जेल को नियम और जमानत को अपवाद बनाती है, जबकि इसका उल्टा होना चाहिए, इससे आम आदमी को बहुत नुकसान होता है. NJAC एक ऐसा बहुत जरूरी सुधार जिसे एक बार के विरोध ने इसे दशकों के लिए ठंडे बस्ते में डाल दिया. जब नए आपराधिक कानूनों पर काम हो रहा था तो लोगों के लिए थोड़ी उम्मीद जगी थी, लेकिन जो नया कानून आया है वह सिर्फ ‘तकनीकी-प्रेरित प्रक्रिया’ और ‘समयबद्ध परिणामों’ के साथ पुरानी शराब नई बोतल में जैसा है. इसमें भी कई खामियां हैं जिससे लोग सोच रहे हैं कि क्या यह वास्तव में सुधार की मंशा से था या सिर्फ शोर मचाने के लिए? नई सरकार को तुरंत न्यायपालिका और आपराधिक कानूनों को विकसित लोकतंत्रों के मानकों के अनुसार प्रभावी रूप से सुधारना चाहिए.
पुलिस: यह एक विषय है जिसके बारे में ज्यादा कहा जाए तो बेहतर होगा. भारत की पुलिस बल एक रक्षक के बजाय एक अव्यवस्थित गिरोह की तरह लगती हैं. बेशक, कई सफलताएं हैं और विभिन्न रैंकों में कुछ अच्छे पुलिस अधिकारी भी हैं, लेकिन कुल मिलाकर ये सफलताएं और अधिकारी एक छोटे से हिस्से में हैं. भारत के सुप्रीम कोर्ट ने कई साल पहले पुलिस सुधारों का मूल ढांचा बताया था, जिसे जानबूझकर नजरअंदाज किया गया. इसे आधार बनाकर सुधार करने का समय अब आ गया है, हमें एक ऐसी पुलिस बल की आवश्यकता है जो मजबूत गश्त और निष्पक्ष जांच पर ध्यान केंद्रित करे और आम जनता व गिरफ्तार किए गए लोगों के मानवाधिकारों की रक्षा करे. मोदी 3.0 को इसे एक प्रमुख प्राथमिकता बनाना चाहिए.
मोदी 2.0 में दिखी सुधारों की कमी
बीजेपी, नौकरशाही, न्यायपालिका और पुलिस में सुधार की कमी स्पष्ट रूप से मोदी 2.0 के समय में आम उदासीनता का कारण बना है. मतदाताओं ने अपने जीवन की गुणवत्ता में उस हद तक सुधार नहीं देखा है, जैसा कि उन्होंने पीएम नरेंद्र मोदी को दिए गए जनादेश के साथ उम्मीद की थी. मोदी को अपने वर्तमान कार्यकाल में मतदाताओं के विश्वास को पुनः स्थापित करना चाहिए और सबसे महत्वपूर्ण है अर्थव्यवस्था. यह हमेशा किसी भी सरकार की सफलता का मुख्य चालक रहता है. जबकि मोदी 1.0 और 2.0 ने प्रमुख आंकड़ों को ठीक से संभाला है और व्यापक स्तर पर व्यापार करने में आसानी को बढ़ाया है लेकिन बड़े सुधारों की कमी के कारण अर्थव्यवस्था में ज्यादा सुधार नहीं हो पाया है.
नौकरशाही का हस्तक्षेप हो कम
स्टार्टअप और छोटे और मझोले व्यवसाय (SMB) आज भी नौकरशाही, न्यायिक और पुलिस उत्पीड़न का सामना कर रहे हैं, जबकि बड़े व्यवसायों के लिए व्यापार करना और बढ़ना अपेक्षाकृत आसान हो गया है. जबकि रूपरेखा और नियम कानून अभी भी बाबुओं द्वारा नियंत्रित किए जा रहे हैं जो छोटे-छोटे बदलाव कर रहे हैं जिसपर नौकरशाही अपना नियंत्रण बनाए रखे हुआ है. आम उद्यमी के लिए व्यापार वातावरण को सरल बनाने की कोई भी पहल लोकतांत्रिक नहीं है, न ही उन्हें चलाने और नेतृत्व करने के लिए चुने गए लोग बाजार में उपलब्ध सबसे प्रतिभाशाली है. उदाहरण के लिए, आज कितने IIM, IIT या अन्य यूनिवर्सिटी ग्रेजुएट व्यापार और आर्थिक विकास के लिए पहल चला रहे हैं? यह समय है कि बेहतरीन संसाधनों को लाने के लिए नौकरशाही की बेड़ियों को तोड़ा जाए (जिसमें बीजेपी भी शामिल है).
अन्य सुधारों की भी है आवश्यकता
डिजिटल सार्वजनिक अवसंरचना (DPI) जो भारत ने बनाई है और दुनिया को दिखाई है, वह मोदी का देश को तोहफा है. हमें हर क्षेत्र में DPI जैसी प्रगति करनी चाहिए. GST में सुधार की अब आवश्यकता है क्योंकि हमारे पास GST के सक्सेसफुल इंप्लीमेंटेशन से डेटा और सीख हैं. गिफ्ट सिटी को एक विश्वस्तरीय वित्तीय केंद्र के रूप में विकसित करने और इसकी वास्तविक क्षमता को पूरा करने के लिए तेजी लानी चाहिए. बैंकिंग क्षेत्र सबसे महत्वपूर्ण है जहां पूंजीकरण की आवश्यकता हो सकती है और बैंकों के विलय का मामला हो सकता है, इससे दक्षता और प्रतिभा का पूंजीकरण होगा.
RERA सही कदम है और RERA को वर्तमान रियल एस्टेट क्षेत्र की वास्तविकताओं को ध्यान में रखते हुए ताज़ा करना पड़ सकता है. भारत द्वारा निर्मित DPI और अब ONDC की पहल ने यह उम्मीद जगाई है कि भारत भी भारत के लिए AI विकसित करेगा और भारत AI का वैश्विक केंद्र बनेगा. पीएम मोदी भारत की देवभूमि में आध्यात्मिकता का दावोस बना सकते हैं.
मोदी 3.0 द्वारा दृष्टिकोण और संचालन में कई अन्य बदलाव किए जाने की आवश्यकता है, जिन्हें सोशल कमेंटेटर और विशेषज्ञों द्वारा सबसे अच्छा संबोधित किया जा सकता है, लेकिन व्यापार के दृष्टिकोण से इस सरकार को निरंतर, लगातार और प्रभावशाली बड़े सुधारों को अपना प्राथमिक मंत्र बनाना चाहिए, विशेषकर बीजेपी और अर्थव्यवस्था में की दृष्टि से. निरंतर परिवर्तन व पुनर्निर्माण और एक विशाल छलांग से मोदी सरकार को भारत की वास्तविक आर्थिक क्षमता का एहसास कराने में मदद मिलेगी.
(कॉलमनिस्ट- एस रवि, एक प्रैक्टिसिंग चार्टर्ड अकाउंटेंट हैं और कई बड़ी सार्वजनिक कंपनियों में इंडिपेंडेंट डायरेक्टर हैं और उनके विचार और सुझाव नीतियों को बनाने में महत्वपूर्ण रहे हैं)
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