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Vedanta को आखिर सुप्रीम कोर्ट से क्यों लगा झटका? आखिर क्या है ये पूरा मामला?
2018 में प्लांट बंद करने को लेकर हुए विवाद में 13 लोगों की मौत हो गई थी. इसके बाद प्लांट को सरकार ने बंद कर दिया.
बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 2 years ago
अनिल अग्रवाल की कंपनी वेदांता (Vedanta) को गुरुवार को सुप्रीम कोर्ट से बड़ा झटका लगा. दरअसल वेदांता ने सुप्रीम कोर्ट में तमिलनाडु स्थित प्लांट को फिर से खोले जाने की याचिका लगाई थी. जिसे सुप्रीम कोर्ट ने ये कहकर खारिज कर दिया कि उसने बार बार नियमों का उल्लंघन किया है. माना जा रहा है कि सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले का असर शुक्रवार को कंपनी के शेयरों पर पड़ सकता है. गुरुवार को ये तब सामने आई जब बाजार बंद हो गया था.
सु्प्रीम कोर्ट ने क्या कहा?
मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, इस मामले की सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ ने कहा कि वेदांता ने बार बार पर्यावरणीय नियमों का उल्लंघन किया है. ऐसे में इस कार्रवाई के अलावा कोई और विकल्प रह नहीं जाता है. हालांकि सुप्रीम कोर्ट ने ये भी कहा कि हम जानते हैं कि वेदांता कई लोगों को रोजगार देने के साथ साथ देश की एसेट बिल्डिंग में योगदान दे रहा है. लेकिन इसे सस्टेनेबल डेवलपमेंट के सिद्धांतों को लेकर सचेत रहना होगा. कंपनी को (polluter Pays Principle) को ध्यान में रखना होगा. लोगों का स्वास्थ्य बेदह अहम है और राज्य सरकार को इसकी रक्षा करनी होगी.
आखिर क्या है ये पूरा मामला?
दरअसल साल 2018 में इस प्लांट के खिलाफ प्रदर्शन हो रहा था. लेकिन अचानक प्रदर्शन के हिंसक होने के कारण पुलिस को बल का इस्तेमाल करना पड़ा जिसमें हुई गोलीबारी से 13 लोगों की मौत हो गई थी. इसके बाद प्लांट पर कार्रवाई करते हुए तमिलनाडु सरकार ने स्टरलाइट कॉपर को बंद करने का आदेश दे दिया था. तमिलनाडु सरकार ने बंद करने का आदेश इसलिए दिया क्योंकि कंपनी पर्यावरण नियमों का उल्लंघन कर रही थी. सबसे अहम बात ये है कि जिस वक्त सरकार ने इस प्लांट को बंद किया था उस वक्त ये 400000 टन धातु अयस्कों का उत्पादन कर रही थी.
वेदांता ने सरकार के फैसले को दी चुनौती
इस मामले में तमिलनाडु सरकार के फैसले को चुनौती देते हुए वेदांता ने अदालत में केस फाइल कर दिया. इसके बाद ग्रीन ट्रिब्यूनल ने कंपनी को बंद करने के आदेश को गलत बता दिया. लेकिन जब इसके बाद सरकार सुप्रीम ने भी बंद करने का निर्णय को सही बताया और राहत के लिए हाईकोर्ट जाने को कहा. इस पर हाईकोर्ट के राहत न देने पर वेदांता वापस जब सुप्रीम कोर्ट में इसकी सुनवाई हुई तो उसने इसे खारिज कर दिया.
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