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ईडी ने मनी लॉन्ड्रिंग जांच में रिलायंस के दो पूर्व अधिकारियों को किया गिरफ्तार

ईडी ने अपनी जांच में पाया कि अनिल अंबानी समूह से जुड़ी कंपनियों ने कथित रूप से 40,000 करोड़ रुपये से अधिक की मनी लॉन्ड्रिंग की.

बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 3 months ago

प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने मनी लॉन्ड्रिंग मामले में बड़ी कार्रवाई करते हुए रिलायंस समूह से जुड़े दो पूर्व वरिष्ठ अधिकारियों को गिरफ्तार किया है. यह मामला कथित लोन फ्रॉड और वित्तीय अनियमितताओं से जुड़ा हुआ है.

ईडी के अनुसार, अमिताभ झुनझुनवाला और अमित बापना को प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट (PMLA) के तहत हिरासत में लिया गया है. यह कार्रवाई केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) द्वारा पहले दर्ज की गई कई एफआईआर के आधार पर की गई है.

किन कंपनियों से जुड़ा है मामला

सीबीआई की जांच में सामने आया कि यह मामला रिलायंस होम फाइनेंस लिमिटेड (RHFL) और रिलायंस कमर्शियल फाइनेंस लिमिटेड (RCFL) से जुड़ा है. इन कंपनियों में बड़े पैमाने पर वित्तीय अनियमितताओं और बैंक फंड के दुरुपयोग के आरोप हैं.

₹40,000 करोड़ से अधिक की मनी लॉन्ड्रिंग का आरोप

ईडी ने अपनी जांच में पाया कि अनिल अंबानी समूह से जुड़ी कंपनियों ने कथित रूप से 40,000 करोड़ रुपये से अधिक की मनी लॉन्ड्रिंग की. एजेंसी ने अब तक लगभग 17,000 करोड़ रुपये की संपत्तियां अस्थायी रूप से जब्त की हैं. इसमें मुंबई स्थित अनिल अंबानी का करीब 3,700 करोड़ रुपये का आवास भी शामिल है.

अनिल अंबानी से भी हो चुकी है पूछताछ

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, जांच एजेंसियों ने अनिल अंबानी से कई बार पूछताछ की है. हालांकि, उनका कहना है कि उन्होंने वर्ष 2017 में संबंधित कंपनियों के बोर्ड से इस्तीफा दे दिया था.

झुनझुनवाला और बापना की भूमिका

अमिताभ झुनझुनवाला, जो रिलायंस अनिल अंबानी ग्रुप के पूर्व ग्रुप मैनेजिंग डायरेक्टर और रिलायंस कैपिटल के वाइस चेयरमैन रह चुके हैं, पहले भी जांच एजेंसियों के रडार पर रहे हैं. जांचकर्ताओं का मानना है कि उन्होंने RHFL और RCFL से जुड़े वित्तीय फैसलों में अहम भूमिका निभाई. वहीं, अमित बापना रिलायंस फाइनेंस में एक वरिष्ठ अधिकारी के रूप में कार्यरत थे.

कैसे हुआ घोटाला

ईडी के अनुसार, RHFL और RCFL ने कई बैंकों और वित्तीय संस्थानों से जनता का पैसा जुटाया, जिसमें से 11,000 करोड़ रुपये से अधिक की राशि बाद में एनपीए (Non-Performing Assets) में बदल गई. जांच में यह भी सामने आया कि इस धन को शेल कंपनियों के नेटवर्क के जरिए अन्य रिलायंस समूह की कंपनियों में ट्रांसफर किया गया, जिनकी वित्तीय स्थिति बेहद कमजोर थी और जिनका कोई ठोस व्यवसाय नहीं था.

किन बैंकों ने दर्ज कराई शिकायत

ईडी ने यह मामला जुलाई 2025 में दर्ज किया था, जो यस बैंक, यूनियन बैंक ऑफ इंडिया और बैंक ऑफ महाराष्ट्र की शिकायतों पर आधारित था. सीबीआई ने कंपनियों के खिलाफ आपराधिक साजिश, धोखाधड़ी और भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के उल्लंघन के तहत मामला दर्ज किया है.

ईडी की आगे की कार्रवाई

मार्च 2026 में ईडी ने इस पूरे मामले में पैसे की हेराफेरी के तरीके (मोडस ऑपरेंडी) का खुलासा किया था और संपत्तियों को जब्त करने का आदेश जारी किया था. एजेंसी ने कहा है कि वह वित्तीय अपराधों के खिलाफ अपनी कार्रवाई जारी रखेगी और अवैध संपत्तियों को उनके वास्तविक हकदारों तक पहुंचाने के लिए प्रतिबद्ध है.
 


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