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Patanjali विवाद: 'आंखें बंद' रखने वाली सरकार ने खोली जुबां, सुप्रीम कोर्ट से कही ये बात

पतंजलि और इंडियन मेडिकल एसोसिएशन की लड़ाई में SC के निशाने पर आई सरकार ने सफाई दी है.

बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 2 years ago

पतंजलि आयुर्वेद के भ्रामक विज्ञापन को लेकर सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) बेहद सख्त है. अदालत ने बाबा रामदेव और आचार्य बालकृष्ण को जहां कड़ी फटकार लगाई है. वहीं, केंद्र सरकार की भूमिका पर भी सवाल उठाए हैं. पिछली सुनवाई में कोर्ट ने कहा था कि हम हैरान हैं कि आखिर इस मामले में केंद्र ने अपनी आंखें क्यों बंद रखीं? अब सरकार ने इस पर अपना जवाब दाखिल किया है.  

आरोप लगाना ठीक नहीं
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, सुप्रीम कोर्ट में आज हुई सुनवाई के दौरान केंद्र सरकार ने कहा है कि कोई भी व्यक्ति अपनी इच्छा से आयुष या फिर एलोपैथी चिकित्सा ले सकता है. दोनों सिस्टम से जुड़े लोगों की ओर से एक-दूसरे पर आरोप लगाने और उन्हें नीचा दिखाने से बचना चाहिए. इससे पहले बाबा रामदेव और उनके सहयोगी आचार्य बालकृष्ण सुप्रीम कोर्ट से दोबारा माफी मांग चुके हैं. दोनों ने कहा है कि भविष्य में ऐसी गलती नहीं होगा. हालांकि, अदालत ने एक बार फिर से उनकी माफी स्वीकार करने से इंकार कर दिया है. कोर्ट ने कहा कि आपने कोर्ट के आदेश का उल्लंघन किया है, लिहाजा कार्रवाई के लिए तैयार रहें.

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हमने मना किया था
केंद्र सरकार ने अपने जवाब में कहा कि यदि किसी विज्ञापन में जादुई उपचार की बात की जाती है तो उनके खिलाफ कार्रवाई के लिए राज्यों के पास पर्याप्त अधिकार हैं. हालांकि, हमने कानून के मुताबिक फैसला लिया था. सरकार ने कहा कि पतंजलि ने कोरोना से निपटने के लिए 'कोरोनिल दवा तैयार की थी और उसके विज्ञापन को लेकर हमने पतंजलि से कहा था कि वह तब तक ऐसे विज्ञापन न निकाले, जब तक मामले का परीक्षण आयुष मिनिस्ट्री कर रही है. 

जारी की थी चेतावनी 
केंद्र ने आगे कहा कि लाइसेंसिंग अथॉरिटी को बताया गया था कि कोरोनिल दवा संक्रमण से निपटने में एक सहायक औषधि के तौर पर है. सरकार ने कोरोना खत्म करने के गलत दावों को लेकर भी चेतावनी दी थी. साथ ही राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों से कहा गया था कि वे ऐसे विज्ञापनों पर रोक लगाएं. हमारी नीति है कि देश में चिकित्सा की आयुष और एलोपैथी की पद्धति एक साथ चलें. गौरतलब है कि इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (IMA) ने पतंजलि के खिलाफ याचिका दायर की है. IMA ने बाबा की कंपनी पर आधुनिक चिकित्सा प्रणालियों के खिलाफ भ्रामक दावे और विज्ञापन प्राकशित करने का आरोप लगाया है. 


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