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संजय बनाम संजय: निरुपम ने दागे आरोपों के गोले, निशाने पर राउत; आखिर क्या है खिचड़ी घोटाला?
पूर्व कांग्रेस लीडर का कहना है कि संजय राउत ही घोटाले के मास्टरमाइंड हैं, उन्हें गिरफ्तार किया जाना चाहिए.
बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 2 years ago
'हाथ' का साथ छोड़ने वाले संजय निरुपम (Sanjay Nirupam) अब दूसरों का खेल बिगाड़ने में लग गए हैं. पहले उन्होंने अपनी पूर्व पार्टी यानी कांग्रेस पर जमकर आरोप लगाए और अब उनके आरोपों की बंदूक संजय राउत (Sanjay Raut) की तरफ घूम गई है. राउत महाराष्ट्र के पूर्व मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे के करीबी और शिवेसना (यूबीटी) के नेता हैं. निरुपम ने आरोप लगाया है कि राउत ही खिचड़ी घोटाले (Khichdi Scam) के मास्टरमाइंड हैं. इतना ही नहीं उन्होंने ED से राउत की गिरफ्तारी की मांग भी की है. बता दें कि 2022 में एक मनी लॉन्ड्रिंग मामले में ED ने राउत को गिरफ्तार किया था. करीब तीन महीने बाद उन्हें जमानत मिल सकी थी.
'खिचड़ी चोर' कहकर बुलाया
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, पूर्व कांग्रेस नेता संजय निरुपम ने दावा किया है कि महाराष्ट्र में हुए खिचड़ी घोटाले में संजय राउत ने मुख्य भूमिका निभाई थी. उन्होंने कहा कि उत्तर पश्चिम मुंबई से शिवसेना (यूबीटी) के लोकसभा उम्मीदवार अमोल कीर्तिकर 'खिचड़ी चोर' को ईडी ने समन भेजा है. पूछताछ के बाद ED क्या करेगी मुझे नहीं पता, लेकिन उनके खिलाफ कार्रवाई होनी चाहिए. जनता को पता होना चाहिए कि एक बेईमान व्यक्ति को उम्मीदवार बनाया गया है. जब मैंने इस घोटाले पर काम करना शुरू किया, तो पता चला कि इसके सरगना संजय राउत हैं. उन्होंने अपनी बेटी, भाई और पार्टनर के नाम पर रिश्वत ली थी.
राउत को गिरफ्तार करे ED
संजय निरुपम ने कहा कि इस घोटाले में संजय राउत के परिवार ने एक करोड़ रुपए की रिश्वत ली थी. निरुपम ने आगे कहा कि राउत ने अपनी बेटी के नाम पर चेक के माध्यम से रिश्वत ली, जबकि उनकी बेटी विधिता को शायद इसके बारे में पता भी नहीं होगा. पूर्व कांग्रेस लीडर ने कहा कि यदि प्रवर्तन निदेशालय (ED) मामले की जांच कर रहा है, तो उसे संजय राउत को भी गिरफ्तार करना चाहिए. इस घोटाले में दोषी सभी के खिलाफ करवाई होनी चाहिए. गौरतलब है कि खिचड़ी घोटाले में ED ने आज अमोल कीर्तिकर को समन भेजकर पूछताछ के लिए बुलाया था.
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ऐसे दिया घोटाले को अंजाम
निरुपम ने जिस घोटाले में संजय राउत पर आरोप लगाया है, वो 2020 से जुड़ा है. कोरोना महामारी के दौरान वर्ष 2022 में बृहन्मुंबई महानगर पालिका (BMC) ने संकट में फंसे प्रवासी मजदूरों को खिचड़ी बांटने का निर्णय किया था. खिचड़ी के पैकेट बांटने का ठेका BMC ने ‘फोर्स वन मल्टी सर्विसेज’ को का दिया गया. आरोप है कि इसी दौरान मिलीभगत से घोटाले को अंजाम दिया गया. आर्थिक अपराध शाखा ने 6.37 करोड़ रुपए के घोटाले में संजय राउत के पार्टनर सुजीत पाटकर और सुनील कदम सहित शिवसेना यूबीटी के कई नेताओं के खिलाफ मामला दर्ज किया था. संजय राउत के पार्टनर की कंपनी को ही खिचड़ी वितरित करने का ठेका मिला था.
ऐसे सामने आया घोटाला
जून 2022 में शिवसेना के विभाजन के बाद उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाली महाविकास अघाड़ी (MVA) की सरकार गिर गई. इसके बाद एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाले शिवसेना गुट ने भाजपा के साथ मिलकर सरकार बनाई. समझौते के तहत शिंदे CM और पूर्व CM देवेंद्र फडणवीस बने. NCP लीडर शरद पवार को बड़ा झटका देते हुए उनके भतीजे और अजित पवार भी शिंदे गुट से जा मिले. इसके बाद पिछली सरकार के कार्यकाल में BMC के कामकाज की जांच शुरू हुई और कथित खिचड़ी घोटाले सामने आया.
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