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NRI की THE TRICHY STORY, कभी नहीं भूलेगा ये NIGHTMARE
मध्य प्रदेश के रहने वाले NRI कारोबारी अपने पूरे परिवार के साथ अमेरिका में रहते हैं, ग्रीन कार्ड होल्डर भी हैं और इंडो यूएस कॉरिडोर के एक्टिव सदस्य हैं.
अभिषेक मेहरोत्रा 3 years ago
जब कभी भी दिल्ली के पॉश मार्केट की बात आती है तो उनमें सबसे पहला नाम खान मार्केट का निकलकर सामने आता है. लेकिन इस बार खान मार्केट का नाम एक दूसरी वजह के लिए जाना जा रहा है. यहां से एक हाई नेट वर्थ NRI के साथ एक ऐसी घटना हुई कि ये उनके लिए एक नाइटमेयर साबित हुई। उसके साथ जो घटा वो एक तरह से भयावह The Trichy Story बन गया उसके लिए। उस भयावह घटना के बाद वो कुछ घंटों तक तो इतना असहाय रहा कि उसे कुछ समझ ही नहीं आया। इस मामले में पुलिस जांच कर रही है लेकिन इस घटना ने देश के इस पॉश मार्केट जहां ज्यादातर बड़े बिजनेसमैन आते हैं उसकी सुरक्षा पर सवाल खड़ा कर दिया है.
The Trichy Story मे हम बात कर रहे हैं ऐसे प्रवासी भारतीय की, जो रहता तो बोस्टन में है पर उसका दिल में दिल्ली बसता है। वे देश को आगे ले जाने की कई योजनाओं पर सरकार के साथ मिलकर काम कर रहा है। ये NRI करीब 25 दिन पहले अपने देश लौटने से पहले कुछ शॉपिंग करने चला गया दिल्ली के लुटियन जोन के खान मार्केंट में, एतिहातन इसने अपने ड्राइवर को कार में रखे इसके बैग को नजर रखने को भी कहा। पर चोर-बदमाशों की नजर में वो कई दिनों से था, उसकी रेकी की जा रही थी। और अंत में चोर-बदमाश अपने प्लान में कामयाब हो गए। उन्होंने एनआरआई का न केवल लैपटॉप, मोबाइल पार किया, साथ ही उसका पासपोर्ट और ग्रीन कार्ड। 5000 अमेरिकी डॉलर और 4 लाख की नगदी भी चोर ले गए। जब एनआरआई से हमने बात कि तो वो बहुत सज्जनता के साथ बोले कि पुलिस का सहयोग तो मिल रहा है, पर चोरी किया गया सामान नहीं मिल पा रहा है।
NRI बिजनेसमैन के साथ कैसे घटी ये घटना
मूल रूप से मध्य प्रदेश के इंदौर के रहने वाले प्रमित माकोडे बोस्टन सेंटर ऑफ एक्सिलेंस फॉर हेल्थ एंड हयूमन डेवलपमेंट के को-फाउंडर हैं। वे 25 दिन पहले शॉपिंग करने के लिए खान मार्केट आए हुए थे. वो कार से उतरकर शॉपिंग करने के लिए बाहर चले गए. गाड़ी में उनका ड्राइवर बैठा हुआ था, लेकिन तभी कुछ लोग उसके पास आए और बोले तुम्हारी गाड़ी के नीचे कुछ रखा है. ड्राइवर जैसे ही उतरा वो लोग गाड़ी से बैग लेकर चले गए. अपराधियों ने जिस बैग को चुराया उसमें 5000 डॉलर, 4 लाख रुपये कैश, एक लैपटॉप, एक आईफोन, एयरपॉड्स, एक भारतीय पासपोर्ट और उसका ग्रीन कार्ड था. पुलिस ने मामले की जांच शुरू कर दी है.
THE TRICHY STORY का जालइ
जब पुलिस ने इस मामले की जांच करते हुए सीसीटीवी फुटेज निकाली तो पता चला कि कुल 9 बदमाश इसमें इन्वॉल्व थे। इनके बारे में खोजबीन पर ये जानकारी मिली कि ये सब तमिलनाडु के तिरुचिरापल्ली के निकले, ये पूरा गैंग दिल्ली में ऑपरेट करता है। इस घटना के दो दिन बाद इस गैंग ने दिल्ली के दूसरे पॉश मार्केट में भी ऐसी ही घटना को अंजाम दिया। ये गैंग दिल्ली से सामान चुराकर उसे त्रिचि कूरियर करता है और वहां कुछ सामान बेच दिया जाता है और कुछ डिसमेंटल कर दिया जाता है। छानबीन में पता चला कि ये गैंग उसके ऊपर लोधी गार्डन से नजर रख रहा था, जहां वे वॉक के लिए जाते थे। प्रमित कहते हैं, यह घटना रोहिणी, द्वारका या करोल बाग जैसे बाहरी इलाकों में तो होती है लेकिन मैं आश्चर्य में हूं कि राष्ट्रीय राजधानी के एक ऐसे इलाके में ये घटना हुई है जो पॉश भी है और साथ-साथ ये इलाका सीसीटीवी कैमरों से लैस भी है.
रिकवरी प्रोसेस भी है बहुत Complicated
प्रमित बताते हैं कि उनका पासपोर्ट और ग्रीन कार्ड पुलिस ने ढूंढ लिया है पर अब इसको पाने के लिए उन्हें कोर्ट जाना है। वहां का प्रोसेस भी काफी पेचीदा है। मैं पहले ही इस घटना की वजह से 25 दिन से भारत में रह रहा हूं, दो बार इंटरनेशनल फ्लाइट के टिकट कैंसिल कर चुका है, इंपोर्टेंट फैमिली फंक्शन मिस कर चुका हूं पर अभी भी मेरा पूरा सामान मुझ तक नहीं पहुंच पाया है। उन्होंने दबे स्वर में ये भी बताया कि कुछ ब्रोकर टाइप लोग मिलने आए जो कह रहे हैं कि हमको इतना पैसा दो हम आपका सामान दिलवा देंगे।
इंडो यूएस कॉरिडोर पर एक्टिवली करते हैं काम
प्रमित मकोड़े पिछले 20 सालों से विदेश में हैं. वो वहां अपने माता-पिता ,उनकी पत्नी सहित परिवार के अन्य सदस्यों के साथ रहते हैं. सभी अमेरिकी पासपोर्ट धारक हैं और ग्रीन कार्ड होल्डर भी हैं. प्रमित मकूड़े इंडो-यूएस कॉरिडोर में सक्रिय रूप से काम करते हैं और इस वजह से वह सरकार के शीर्ष अधिकारियों और यहां तक कि पुलिस से भी बहुत अच्छे से जुड़े हुए हैं. वो इससे पहले अपने अनौपचारिक रिश्तों के कारण तमिलनाडु के तिरुचिरापल्ली भेजा जा रहे अपने लैपटॉप को दिल्ली की एक कूरियर सेंटर फिर से प्राप्त करने में भी कामयाब रहे थे. यह प्रमुख रूप से उनकी अनौपचारिक पहुंच के कारण संभव हुआ. अभी तक, वह और पुलिस बाकी सामान बरामद नहीं कर पाए हैं. लेकिन उन्हें उम्मीद है कि पुलिस इस मामले में सक्रियता से काम कर सामान बरामद करेगी.
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